हिरवा (कुल्थी) के फायदे सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे...

हिरवा (कुल्थी) (मैक्रोटिलोमा यूनिफ्लोरम) अनाज की फली प्रजातियों में से एक है। रासायनिक संरचना अधिक सामान्यतः खेती वाले फलियां के साथ तुलनीय है। अन्य फलियां की तरह, हिरवा (कुल्थी) मेथियोनीन और ट्रिप्टोफैन में कमी है, हालांकि यह लोहा और मोलिब्डेनम का उत्कृष्ट स्रोत है। कुल्थी का आकार बड़े अंडाकार आकार से छोटे गोलाकार और चिकनी सतहों के साथ भिन्न होता है। एशिया में फलियां का प्रमुख उपभोक्ता भारत है, जिसका औसत पल्स खपत प्रति व्यक्ति प्रति व्यक्ति 34 ग्राम है। दलहन भारतीय आहार का एक अभिन्न हिस्सा है। ग्रीन ग्राम, मूड दाल, चना दाल, चना, हरी चने और हिरवा (कुल्थी) कुछ सबसे अधिक खपत होने वाली दालें हैं। हिरवा (कुल्थी) मुख्यतः कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, एम.पी., छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड के पहाड़ियों में खेती की जाती है। यह अन्य देशों में मुख्य रूप से श्रीलंका, मलेशिया, वेस्टइंडीज आदि में खेती की जाती है।

हिरवा को बहुत सारे नामों से जाना जाता है जैसे कि अंग्रेजी में हार्सग्राम हिन्दी में कुल्थी, मराथी और गुजराती में कुलेथ उड़ीसा में कोलाथ, बंगाली में कुल्थी-कलाई, कन्नड में हुरूले तथा छत्तीसगढ़ में इसे हिरवा के नाम से जाना जाता है।

हिरवा (कुल्थी) एक आवश्यक फसल है, इसका उपयोग किसान भाई दाल के रूप में करते है तथा इसके दिलके को गायों को चारे के रूप में दिया जाता है। इसका उपयोग जैविक (हरे) खाद बनाने में भी किया जा सकता है। यह फली वाली सफल है जो कि किसान भाईयों द्वारा दिसम्बर के बाद खोतों में लगा दिया जाता है हिरवा को मामूली गर्मी तथा शुष्क जलवायु चाहिए होती है इस स्थिती में हिरवा अधिक मात्रा में उत्पदन प्राप्त किया जा सकता है।

हिरवे में विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते है जो निम्न हैं

संघटक हिरवा (कुल्थी)

हिरवा से हमारे शरीर को काफी हद तक लाभ प्राप्त होती है जैसे कि-

  1. वजन का कम होना
  2. पथरी का अचूक इलाज
  3. शूगर पेसेन्ट के लिए अत्यंत लाभदायक
  4. सर्दी, बुखार एवं खासी में लाभदायक
  5. इसके बहुत से आयुर्वेदिक गुण भी है जो कि शरीरीक बीमारीयों के लिए उपयोग किए जाते हैं।
  6. मनुष्य में सीमन की मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है। 

हिरवे में पॉलीफेनोल फ्लेवोनोइड और प्रोटीन विशेष एंटी ऑक्सीडेंट्स में विशेष रूप से समृद्ध है। दूसरे शब्दों में यह आपके शरीर को युवा और जीवंत रख सकता है! क्या हैए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के वैज्ञानिकों ने पाया है कि कार्बोहाइड्रेट पाचन को धीमा करके और इंसुलिन प्रतिरोध को कम करने के कारण हिरवे बीज में भोजन के बाद उच्च रक्त शर्करा को कम करने की क्षमता होती है। यह एक अतिरिक्त मधुमेह के अनुकूल भोजन बनाता है.

पारंपरिक औषधीय ग्रंथ अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, ल्यूकोडर्मा, मूत्र संबंधी मुक्ति, गुर्दा की पथरी और हृदय रोग के लिए इसके उपयोग का वर्णन करते हैं। आयुर्वेदिक व्यंजनों ने पीलिया या पानी की अवधारण से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए हिरवे की भी सिफारिश की है। गठियाए कीड़े, नेत्रश्लेष्मलाशोथ और ढेर भी घोड़ा ग्राम की शक्ति से पहले बटेर करने के लिए कहा जाता है।

हिरवा स्वाद में कसैला और मूत्रवर्धक गुण लिए होता है यह कफ निकालने, और बुखार और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने के लिए भी फायदेमंद है। कुछ अध्ययनों के अनुसारए हिरवा के लिपिड अर्क पेप्टिक अल्सर के उपचार के लिए फायदेमंद होते है और कहा जाता है कि पेट दर्द किसी भी प्रकार (जैसे- गैस, पेट के कीड़े या कब्ज) का हो इसका उपयोग कर इसका इलाज किया जा सकता है हिरवे में लोहा की भी कुछ मात्रा पाई जाती है जो कि महिलाओं में होने वाले माहवारी के लिए अच्छी लाभदायक होती है। मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति में गुलुकोस की मात्रा सामान्य रखने में भी इसकी खासी भूमिका है, इसमें कुछ मात्रा में मैग्नीशियम, कैल्सियम, आयरन और अमीनो एसिड पाए जाते है जो कि स्पर्म की माख बढ़ाने में सहायक है।

उपयोग

हिरवा (कुल्थी) का उपयोग करते समय, हमेशा याद रखें कि शूल शरीर के लिए गर्मी पैदा कर सकता है और यही कारण है कि विशेषज्ञ आपको इसे छाछ या जीरा के साथ रखने के लिए कहते हैं, ताकि शरीर की गर्मी संतुलित हो सके।

आप भुना हुआ बीज पाउडर करके सूप, खिचडी, चपाती के लिए करी के रूप में एक ही बार में दो बार हिरवा (कुल्थी) का सेवन कर सकते हैं। आपके लिए कई स्वादिष्ट व्यंजन हैं जो कि हिरवा (कुल्थी) से बन सकते हैं।

छत्तीसगढ़ के लोग इसे सब्जी के रूप में उपयोग में लाते है इसकी गुण को देखते हुए छत्तीसगढ़ में इसे बहुतायत रूप से भोजन में लिया जाता है, छत्तीसगढ़ के आदिवासी लोगों के भोजन का प्रमुख भाग है हिरवा जिन्हें वे खुद लगा कर खुद ही खाते है बाजार में इसकी मांग बहुत ज्यादा है क्योंकि यह आयुर्वेद में भी उपयोग में लाया जाता है। छत्तीसगढ़ आदिवासी बहुल क्षेत्र है जहां लोग हिरवे को पहले सूखा भुनते है और इसे तब तक भुना जाता है जब इसमें से एक सौंधी सी खुशबु न आ जाए फिर इसे कुकर में पानी डाल कर पकाया जाता है फिर लहसुन मिर्च के साथ तड़का लगा कर परोस दिया जाता है यह खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होता है। छत्तीसगढ़ी लोग इसमें कभी हिरवे के साथ भटा तथा सेम मिलाकर भी सब्जी बना लेते है जो कि खाने में बहुत स्वादिष्ट होता है।

- योगेश कुमार, किपु किरन सिह महिलांग, एवं सौमित्र तिवारी

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