1. लाइफ स्टाइल

दादाजी क्यों कहते थे - 'पैर दबा दो' !

समय जैसे-जैसे बदलता गया हम भी बदलते गए अर्थात हमने अपनी आदतों, रहन-सहन को पूरी तरह बदल दिया. आज हालात यह है कि हम वो हो गए हैं जो हम कभी थे ही नहीं. भारतीय चिकित्सा और आयुर्वेद में कईं प्रकार की पद्धतियां थी जो हमें शारीरिक और मानसिक कष्ट से दूर रखती थीं. आज हम आपको एक ऐसी ही पद्धति के बारे में बताने जा रहे हैं. अक्सर हमारे बड़े-बूढ़े हमे यह कहते थे कि बेटा पैर दबा दो और हम दबा दिया करते थे परंतु क्या आपने कभी यह सोचा कि पैर दबाना इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता था? शायद यह बात आपके दादा-दादी या बड़ों को भी मालूम नहीं होगी.

क्या है रहस्य?

पैर दबाने को लेकर हम अक्सर यही मानते हैं कि जब पैरों में दर्द होता है तो पैर दबाये जाते हैं. परंतु इसके पीछे एक और रहस्य है जो सीधा हमारे शरीर से जुड़ा हुआ है. वह रहस्य यह है कि हमारे पैर की पिंडलियों का सीधा संबंध हमारे उदर यानी पेट से होता है. जब पैर दबाने के दौरान हम पिंडलियों को दबाते हैं तो हमारे पेट और विशेषकर हमारी आंतों में इसका प्रभाव पड़ता है और हमारा पेट गतिशील और स्वस्थ बना रहता है. साथ ही पाचन तंत्र बेहतर तरीके से कार्य करने लगता है और हमारा पेट स्वस्थ रहता है.

निरोगी काया के लिए पेट का स्वस्थ होना आवश्यक बताया गया है. यदि पेट या पाचन ठीक कार्य न करें तो जीवन अस्त व्यस्त हो जाता है. पैर की पिंडलियों को दबाने से संपूर्ण शरीर में खून का संचालन ठीक रहता है और शरीर स्थिर अवस्था में बना रहता है. यदि पेट लंबे समय तक खराब रहता है तो यह मानव शरीर में दूसरे रोगों को जन्म देता है जैसे - शरीर में वाक् की मात्रा का बढ़ जाना, अनियमित और असमय सिरदर्द जिसे पित्त्चशिरोवेदना भी कहते हैं, सांस लेने में परेशानी, शरीर के क्षिद्रों का बंद हो जाना जिससे शरीर असंतुलित हो जाता है. कुल मिलाकर बात यह है कि पैर दबाना या पिंडली दबाना हमारे शरीर के लिए उत्तम है और यह शरीर को सुचारू रूप से संचालित रखने में सहायक है.

गिरीश पांडे, कृषि जागरण

English Summary: Why did grandfather say - 'Pull the foot'!

Like this article?

Hey! I am . Did you liked this article and have suggestions to improve this article? Mail me your suggestions and feedback.

Share your comments

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें. कृषि से संबंधित देशभर की सभी लेटेस्ट ख़बरें मेल पर पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें.

Subscribe Newsletters

Latest feeds

More News