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White spots: जानिए त्वचा पर होने वाले सफ़ेद धब्बे कितने तरह के होते है

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आजकल त्वचा पर सफ़ेद दाग होने की समस्या काफी बढ़ रही है. यह जरूरी नहीं कि शरीर पर सफेद दाग होना किसी बड़ी बीमारी का लक्षण है. हालांकि, हमारी छोटी लापरवाही की वजह से ये समस्या भविष्य में बड़ा रूप ले सकती है. इसलिए आज हम आपको इस लेख में बताएंगे कि किस तरह आप शरीर में पड़े अलग -अलग तरह के सफ़ेद दागों से छुटकारा पा सकते है. ऐसे में आइए हम जानते है इन सफ़ेद दाग -धब्बों के बारे में और उनके मुख्य लक्षणों और इलाज के बारे में.

एक्जिमा (Eczema)

यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें हमारे शरीर पर लाल रंग के चख्त्ते हो जाते है. जिस पर बाद में खुजली होने लगती है. जिस पर धीरे -धीरे सफ़ेद रंग की परत पड़ने लग जाते है. ये समस्या ज्यादातर आँखों के ऊपरी हिस्से और घुटनों को अपना शिकार बनाती है. 

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लक्षण :  इस समस्या के लक्षणों का ज्यादा जल्दी पता नहीं चलता क्योंकि ये समस्या 5 वर्ष की उम्र से ही होनी शुरू हो जाती है. इसमें त्वचा की सतह पर पड़े  पैचेज़ लाल और मोटे हो जाते है और उनपर खुजली होने लगती है.  

इलाज : जितना हो सके शरीर खुजलाने से बचे और डॉक्टर द्वारा दी गई दवा का सेवन अच्छे से करे. 

धूप की वजह से सफ़ेद धब्बे (White spots due to sunlight)

यह एक ऐसी समस्या है जिसमें हमारे शरीर पर सफ़ेद रंग के स्पॉट्स होने लगते है. यह समस्या ज्यादातर उन लोगों में होती है जिनकी त्वचा का रंग हल्का सफ़ेद होता है. यह समस्या ज्यादातर महिलाओं में पायी जाती है.

लक्षण : इसके होने के मुख्य लक्षण है धूप में ज्यादा रहना. इसकी वजह से हाथों और पैरों में सफ़ेद दाग होने लगते है.

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इलाज : किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह ले और धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूर करे.

टीनिया वर्सीकोलर (Tinea versicolor)

यह एक ऐसी समस्या है जिसमें हमारे शरीर पर हल्के -हल्के सफ़ेद रंग के दाग पड़ने शुरू हो जाते है. जोकि समय के साथ -साथ बढ्ने लगते है और गहरे होते जाते है. पहले ये हल्के गुलाबी होते है या फिर ये लाल या भूरे भी हो सकते है.

लक्षण : इसके मुख्य लक्षण है एलेर्जी होना, त्वचा में सूखापन और त्वचा पर पपड़ी बनना आदि. इसके होने के कई कारण हो सकते है जैसे - शरीर में अधिक पसीना आना, तेलिया त्वचा होना, इम्यून सिस्टम कमजोर होना आदि.

इलाज : किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह से ही दवा का सेवन करे. सही तरह से परहेज करने पर ये समस्या करीब 2 माह में पूरी तरह खत्म हो जाती है.



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