1. औषधीय फसलें

बेल उगाने वालों पर आयुर्वेद कंपनियों की नज़र !

गिरीश पांडेय
गिरीश पांडेय

पिछले कुछ सालों में खेती को लेकर लोगों का रवैया बदला है. अब किसान हो या कोई और व्यक्ति, वह पारंपरिक खेती के बजाय व्यवसायिक खेती पसंद कर रहा है क्योंकि व्यवसायिक खेती में उसे मुनाफा अधिक मिल रहा है. किसान हो या कोई और, अपना नुकसान कोई नहीं चाहता. हर कोई यही चाहता है कि वह जितनी मेहनत करे उसे उससे बढ़कर नतीजे मिले. आज हम आपको एक ऐसे ही पौधे की खेती के बारे में बताएंगे जो अपको न सिर्फ फायदा देगा बल्कि मालाममाल कर देगा.
क्या है बेलपत्र

बेलपत्र एक गरम जलवायु में होने वाला पौधा है और यह अक्सर आपको मैदानी इलाकों में अधिक मात्रा में मिलेगा. बेलपत्र का प्रयोग भगवान शिव पर चढ़ाने के लिए बहुत होता है. ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव को बेलपत्र बहुत पसंद है और वह इसके चढ़ाने से बहुत प्रसन्न हो जाते हैं. बेल के विषय में यह बात तो सब जानते हैं परंतु यह एक बहुत कमाल की औषधि भी है, यह बहुत कम ही लोग जानते हैं. बेलपत्र से बवासीर, अल्सर और न जाने कितने रोगों का इलाज संभव है.

कैसे करें इसकी खेती

बेल की खेती करना बेहद आसान है. आपको इसका बीज या पौधा आपके नज़दीकी नर्सरी से मिल जाएगा. यदि आपके पास एक एकड़ या इससे अधिक की ज़मीन है तो बेल की खेती आपके लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है. आपको बस इतना करना है कि शुरुआती दिनों में पौधे का ख्याल रखें और यह देखते रहें कि पौधे को कम पानी या अधिक धूप न लगे. समय-समय पर इसकी गुढ़ाई करते रहें और अच्छी व जैविक खाद का प्रयोग इसमें करें.

मंडी में नहीं बिकेगी बेल

ये अवश्य ध्यान रखें कि बेलपत्र को आप किसी मंडी में न बेचें. बेलपत्र एक औषधीय पौधा है और इसके इसी गुण से आप मुनाफा कमाएंगे. बेल को आप आयुर्वेदिक औषधि बनाने वाली कंपनियों को ही बेचें. इसकी पूरी जानकारी इंटरनेट के माध्यम से आपको मिल जाएगी. इंटरनेट पर बेल को खरीदने और बेचने वाले डीलर का नबंर आपको आसानी से मिल जाएगा.

क्या है बेल के लाभ

  • ज्वर यानी बुखार आने पर बेल की पत्तियों से बना काढ़ा बहुत लाभदायक है.
  • हार्ट अटैक में बेल का सेवन बहुत लाभ पहुंचाता है क्योंकि बेल हमारे दिल को मज़बूत बनाकर हार्ट अटैक के खतरे को टाल देता है.
  • अक्सर पेट में गर्मी बढ़ जाती है और मुंह में छाले होना शुरु हो जाते हैं, ऐसे में बेल के पत्तियों को कूटकर उसका पानी पीने से पेट नरम और ठंडा रहता है.
  • बवासीर के रोग में बेल का गुदा बहुत लाभदायक होता है. बेल के गुदे का लगभग एक हफ्ते तक लगातार सेवन बवासीर में बहुत लाभ पहुंचाता है.
  • आंतों का कमज़ोर होना और बच्चों को दस्त लगना यह दो बीमारियां बहुत सामान्य तौर पर देखी जाती हैं और बेल इन दोनों ही बीमारियों में बहुत कारगर है.

 नोट - बेल से संबंधित और अधिक जानकारी के लिए हमारे अगले लेख की प्रतीक्षा करें और यदि आपकी कुछ राय हो तो कंमेंट अवश्य करें.

गिरीश पांडे

English Summary: How to Start Aegle marmelos farming

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