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हाइड्रोपोनिक चारा : हरा चारा बनाने की आधुनिक विधि

भारत दुनिया में सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करता है। ऐसे में पशुओं के लिए हरा चारे का प्रबंध करना काफी चुनौती पूर्ण है। खासकर उन इलाकों में जहां पानी की उपलब्धता कम है। अधिकांश रकबा सूखे की चपेट में है। इन जगह पर पशुपालन कर डेयरी उद्दोग को आमदनी का जरिया बनाना लाभकारी है। राष्ट्रीय कृषि विकास परियोजना के अन्तर्गत देश में आधुनिक विधि से हरा चारा उत्पादन की तकनीकों का प्रचलन शुरु हुआ।

 

भारत दुनिया में सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करता है। ऐसे में पशुओं के लिए हरा चारे का प्रबंध करना काफी चुनौती पूर्ण है। खासकर उन इलाकों में जहां पानी की उपलब्धता कम है। अधिकांश रकबा सूखे की चपेट में है। इन जगह पर पशुपालन कर डेयरी उद्दोग को आमदनी का जरिया बनाना लाभकारी है। राष्ट्रीय कृषि विकास परियोजना के अन्तर्गत देश में आधुनिक विधि से हरा चारा उत्पादन की तकनीकों का प्रचलन शुरु हुआ। यह हमारे यहां कोई नई शुरुआत नहीं है इसके लिए वैज्ञानिक पिछले 30 वर्षों से सतत प्रयास कर रहें हैं। इस आधुनिक विधि का नाम हाइड्रोपोनिक विधि है। इस विधि द्वारा पानी की बचत होती है। साथ ही किसान कम मेहनत में पशुओं के लिए हरा चारे का उत्पादन कर सकता है।

इसके अन्तर्गत कम समय व लागत में बोहतर हरा चारा के उत्पादन किया जाता है। पशुओं के लिए हरा चारा संतुलित एवं पौष्टिक आहार है। अतएव किसानों के समक्ष चारे का प्रबंध करने का सिरदर्द होता है। देश में कुछ हिस्से ऐसे भी हैं जहां वर्षा बहुत कम होती है। ऐसी जगहों पर यह विधि काफी हद तक कारगर साबित हुई है। हरा चारा दूध में पोषकता बढ़ाने के लिए उपयोगी है। जिसके द्वारा दूध में असंतृप्त वसा,वसीय अम्लों,विटामिन्स की मात्रा बढ़ती है। आधुनिक अनुसंधान के मुताबिक हरा चारे से गाय का दूध उच्च वसीय अम्लों से युक्त है। इस प्रकार के गाय के दूध में ओमेगा 3 नामक महत्वपूर्ण तत्व पाया जाता है। जो आंखों एवं मस्तिष्क के लिए काफी लाभदायक होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कम लागत में अधिक लाभकारी विधि का इस्तेमाल सर्वाधिक महाराष्ट्र में किया गया है।

 

क्या है हाईड्रोपोनिक विधिः इस विधि में प्लास्टिक की एक ट्रे में जिनकी माप 2 फीट x1.5 फीट x3 इंच होती है। इसमें बाजरा या गेहूं के बीजों को पानी में भिगोकर लगभग 12 घंटे के लिए रख ली जाती है। 72 ट्रे( तश्तरी) का प्रबंध किया जाता है। जिनमें प्रत्येक ट्रे में 1 किलो सूखे बीज रखते हैं। प्रारंभ में जमे बीजों पर लगातार पानी का छिड़काव करते हैं। इस लगतार प्रक्रिया के द्वारा 7 से 8 दिन के अंदर पशुओं को खिलाने योग्य हरा चारे की प्राप्ति होती है। ज्ञात हो कि इस प्रक्रिया के दौरान एक टाइमर एसेंबली का भी प्रयोग किया जाता है। सात दिनों के भीतर लगभग एक किलोग्राम बीज से 8 से 10 किग्रा चारा उत्पादित किया जाता है। एक ट्रे से लगभग एक गाय को खिलाने के लिए पर्याप्त चारा प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रकार एक सप्ताह के लिए प्रति गाय के लिए एक ट्रे से पर्याप्त मात्रा में चारा प्राप्त किया जा सकता है। अर्थात एक किसान यदि 10 गाय हैं तो उसे लगभग 80 ट्रे का प्रबंध करना होगा। मक्का द्वारा प्राप्त किये जाने वाले चारे के लिए एक किलोग्राम के लिए लगभग 1.63 रुपए का खर्चा आता है।

हाईड्रोपोनिक विधि से चारा बनाने के लिए किसान को पूरा ढांचा तैयार करने के लिए कुल 25000 हजार रुपए की लागत लगानी होगी। जिसमें 80 ट्रे साथ ही 1 हॉर्स पावर का इलेक्ट्रानिक मोटर व फॉगर एवं टाइमर की लागत शामिल है।

अधिक जानकारी के लिए आप वेबसाइट rkvy.nic.in पर जाकर हाईड्रोपोनिक विधि चारा बनाने के लिए जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

English Summary: Hydroponic fodder: Modern method of making green fodder Published on: 05 November 2017, 02:53 IST

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