बेमौसमी सब्जियों की खेती कर मालामाल हो जाइए...

पॉलीहाउस तकनीक से खुले वातावरण की अपेक्षा उच्च  गुणवत्तायुक्त एवं ज्यादा मात्रा में किसान विभिन्न प्रकार की  सब्जियों का उत्पादन कर सकते है। बदलते मौसम के कारण सब्जियों की पैदावार व गुणवत्ता पर प्रभाव पड रहा है जिसके कारण किसानों को खुले वातावरण में पैदा की गई सब्जियों से अधिक लाभ प्राप्त नहीं हो पता है। वर्षा ऋतु में एवं ग्रीष्म ऋतु में खुले में उगाई गई सब्जियों पर बीमारियों व कीटों में विशेषकर विषाणु रोग फैलाने वाले कीटों का प्रकोप अधिक होता है।

गुणवत्तायुक्त एवं बेमौसमी सब्जी उत्पादन के लिए पॉलीहाउस तकनीक एक वरदान : पॉलीहाउस एक घर नुमा ढांचा होता है जो यूवी. प्रतिरोधी पॉलीथिन की शीट से ढका होता है। इन पॉलीहाउस में कुछ चयनित ग्रीष्मकालीन बेमौसमी सब्जियों व उनकी चयनित केवल संकर किस्मों से अधिक अच्छी गुणवत्ता की पैदावार संभव है।

निचले एवं मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में पॉलीहाउस में उगाई जाने वाली केवल तीन ही बेमौसमी फसलें है – शिमला मिर्च, टमाटर और पार्थिनोकार्पिक खीरा है।

सर्दियों में गर्मी : पॉलीहाउस में सर्दियों में भी बाहर की अपेक्षा अधिक गर्मी रहती है। इसलिए इसे सर्दी की ऋतु में भी गर्मी की फसलों जैसे शिमला मिर्च, टमाटर और खीरा इत्यादि उगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

गर्मियों में ठंडा : देश के पर्वतीय क्षेत्रों में पॉलीहाउस को गर्मियों में ठंडा रखने में कम लागत आती है तथा इन क्षेत्रों में सब्जी की बेमौसमी निरंतर उपलब्धता एवं उच्च गुणवत्ता हेतु प्राकृतिक हवादार पॉलीहाउस विशेष रूप से उपयोगी है।

अधिकतर ग्रीष्मकालीन पॉलीहाउस में उगाई जाने वाली सब्जियों के लिए औसत तापमान 18-25 डिग्री सेल्सियस चाहिए जो की इन क्षेत्रों में खुले वातावरण में अधिक समय तक नहीं रहता है। अतः ऐसे क्षेत्रों में पॉलीहाउस में सब्जियां उगना व्यवहारिक एवं लाभप्रद है।

पॉलीहाउस में सब्जियों की सफल खेती हेतु निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए...

1- मध्य पर्वतीय क्षेत्रों के किसान पतझड़-सहित व बसंत ऋतु में बेमौसमी धनियां, हरी पत्तेदार सब्जियां तथा मटर इत्यादि को केवल पॉलीहाउस में पूर्ण रूप से लगभग सारा साल उगा सकते है, लेकिन इस बात का किसान ध्यान रखें की इन फसलों से उन्हें आमदनी केवल बेमौसम उत्पादन से ही संभव है।

2- पॉलीहाउस में केवल अनियमित बढ़वार वाली संकर किस्में व रोग प्रतिरोधी किस्मे ही लगाएं तथा शीर्चनोचन एवं काट-छांट पर विशेष ध्यान दे।

3- पॉलीहाउस के अंदर एवं बहार सफाई का विशेष ध्यान रखें तथा एवं दरवाजा हमेशा बंद रखें।

4- ड्रिप-सिंचाई विधि द्वारा तथा फर्टिगेशन (खाद+पानी) का विशेष ध्यान रखें तथा उपयुक्त समय पर सिंचाई व तरल खाद फल बनने के बाद देते रहें।

5- दोहरा दरवाजा, किनारे व ऊपर मलमल के जाले (40-50 मैश) का प्रयोग करे तथा पॉलीहाउस के ऊपर रोलिंग टाइप के हरे छायादार जले 50% का उपयोग अप्रेल से सितंबर तक आवश्यकतानुसार 11 बजे (सुबह) से 3 बजे (शाम) तक करें। ध्यान रखें पॉलीहाउस में दिन का तापमान 25 डिग्री सेंटीग्रेड से उपन न जायें।

6- परिवर्तित प्राकृतिक हवादार पॉलीहाउस प्रायः बेमौसमी सब्जियों जैसे मिर्च, टमाटर एवं खीरे की व्यापारिक खेती के लिए उपयुक्त है।

पॉलीहाउस में शिमला मिर्च की खेती..

पॉलीहाउस में किसान आजकल रंगीन शिमला मिर्च उगा रहे हैं जो महानगरों व छोटे शहरों में अच्छी कीमत पर बिक जाती है तथा किसान अधिक आमदनी अर्जित कर रहें है। शिमला मिर्च के सकल उत्पादन के लिए आवश्यक है कि पॉलीहाउस उत्पादक ऐसी संकर किस्मों का चयन करें जिनका आकार अच्छा हो तथा चार लोब हो एवं आकार घंटीनुमा हो। 

चयनित प्रजातियों में अच्छी अवधि तक मंडीकरण योग्य फल देने की क्षमता का होना आवश्यक है। किसानों को चाहिए कि वे शिमला मिर्च की संकर प्रजाति को उगाने से पहले क्षेत्र के अन्य पॉलीहाउस उत्पादकों से विचार-विमर्श  अवश्य करें ताकि उनसे अच्छी पैदावार देने वाली संकर किस्मों का व्यवहारिक ज्ञान हो।

क्यारी बनाना : 85-100 से.मी. चौड़ी तथा 25-20 से.मी. ऊँची क्यारियाँ बनानी चाहिए और दो क्यारियों के बिच की दुरी 50 से.मी. रखनी चाहिए जिससे काम करने में आसानी हो। क्यारियों को रोगाणु रहित बनाने के लिए 5% फॉर्मलीन 40% का घोल बनाकर उसे 3-4 लीटर प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से डालकर ड्रैंच करें। पौध रोपण तभी करें जब फार्मलीन की गंध समाप्त हो जाये।

पौध तैयार करना एवं रोपाई : शिमला मिर्च का बीज महंगा होने के कारण पौध संरक्षित तरिके से पॉलीहाउस में मिट्टी रहित  प्लास्टिक ट्रे  में तैयार करनी चाहिए व जमीन से उठी हुई क्यारियों में से जो पहले से उपचारित हो तथा इसे कीटरोधी नेट द्वारा अच्छी तरह ढका गया हो का उपयोग किया जा सकता हैं। 20-25 दिनों में तैयार पौध को अच्छी तरह से तैयार भूमि में उठी हुई क्यारियों में रोपाई करें। निचले एवं मध्यवर्गीय क्षेत्रों में पूरे वर्ष में शिमला मिर्च की रोपाई जनवरी-फरवरी और जुलाई-अगस्त दो बार कर सकते हैं। लेकिन ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में मार्च-अक्टुम्बर तक शिमला मिर्च की पौध की रोपाई लाइनों में करें जिनकी दुरी 40 से 50 से.मी. और पौध से पौध की दुरी 30 से 40 से.मी. रखें।

सिंचाई एवं फर्टिगेशन : पॉलीहाउस या नेट हॉउस में उगाई गई फसल में ड्रिप विधि से सिंचाई व उर्वरक देना ठीक रहता हैं। गर्मियों में प्रत्येक दिन सर्दियों में हर दूसरे दिन सिंचाई करनी चाहिए। पानी में कोई भी घुलनशील मिश्रित  खाद या उर्वरक जैसे पॉलिफिड (19:19:19) 1.5की.ग्रा. प्रति 100 वर्ग मीटर की दर से सप्ताह में दो बार सिंचाई के साथ करें। फर्टिगेशन रोपाई के बाद तीसरे सप्ताह में शुरू करें व अंतिम तोड़ाई से 15 दिन पहले बंद कर दें। यदि पॉलिफिड 19:19:19) एन.पी.के. का प्रयोग करें तो 2.0-2.2 ग्राम प्रति वर्गमीटर की दर से सप्ताह में दो बार पानी का घोल प्रत्येक फर्टिगेशन के लिए उपयुक्त हैं। 7 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी तथा प्रत्येक पौधे के साथ अवस्था के अनुसार 100 से 250 मि.लीटर घोल डालें।

पौधों की कटाई, छटाई तथा सहारा देना :

1- प्रजाति के अनुसार 9 से 13 पत्ते आने के बाद मुख्य फूल या क्राउन वड को निकल दें।

2- पॉलीहाउस की ऊंचाई के अनुसार 2 या 4 टहनियां या शाखाएँ रखें।

3- प्रत्येक नोक पर एक फूल या दो पत्तें रखें बाकि फूल या पत्ते निकाल दें तथा अतिरिक्त शाखाओं की निरंतर कटाई या छटाई करें।

4- प्रत्येक शाखा को नारियल की रस्सी या सुतली से लपेटे तथा इसी के सहारे ऊपर की दिशा में रस्सी या सूतली को घुमाते हुये ट्रेनिंग करें।

पॉलीहाउस में टमाटर की खेती :

पॉलीहाउस में विभिन्न पहाड़ी क्षेत्रों में टमाटर उत्पादन की अपार संभावनाए हैं क्योंकि खुले वातावरण में तैयार टमाटर की फसल कम गुणवत्ता व कम पैदावार वाली होती हैं तथा बीमारी व कीटों से बचाने के लिए किसान इन फसल पर अत्यधिक छिड़काव करते हैं जिसके कारण वातावरण प्रदूषित होता हैं तथा लोगों को विभिन्न घातक बीमारियाँ होने का डर बना रहता हैं।

शिमला मिर्च की तरह टमाटर में भी जीवाणु मुरझन रोग का प्रकोप पाया गया हैं तथा इसके सफल उत्पादन के लिए जीवाणु मुरझन ग्रसित क्षेत्रों में इस रोग की प्रतिरोधी संकर किस्में ही लगाये तथा ऐसी संकर किस्मों का चुनाव करें जिनका आकार गोल या उच्च गोल हो तथा इसके फल लम्बी अवधि तक तरोताजा रहें। इसके साथ-साथ चयनित संकर प्रजातियों में ज्यादा दिनों तक मंडीकरण योग्य फल देने की क्षमता का होना भी आवश्यक हैं।

महत्वपूर्ण सस्य क्रियायें : टमाटर की केवल अनियमित बढ़वार वाली संकर किस्में जैसे की अमीशा, नवीन 2000 प्लस (जीवाणु मुर्झान रोग प्रतिरोधी) किस्में ही लगाए। टमाटर की भी मांग बढ़ रही हैं जिसके लिए किसान बी.एस.एस.- 366 किस्म (जीवाणु मुरझन रोग सहनशील लगाए).

पॉलीहाउस की ऊंचाई के अनुसार 2 टहनियां लेकर रस्सी या सुतली से ट्रेनिंग करें तथा अतिरिक्त टहनियों की काट-छाट करते रहें।

सिंचाई : ड्रिप विधि से सिंचाई करें तथा तरल पौधे लगाने के तीन सप्ताह बाद भूमि के कम उपजाऊपन के अनुसार सप्ताह में एक या दो बार दें तथा अंतिम तोड़ाई से 15 दिन पहले तरल खाद बंद कर दे।

खीरा की खेती पॉलीहाउस में..

खीरे का उत्पादन अभी तक खुले वातावरण में ही बरसात ऋतु में किया जाता रहा हैं किन्तु फल मक्खी के अत्यधिक प्रकोप के कारण इसकी सफल खेती के लिए किसानों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हैं। सर्दी के मौसम व आरम्भिक बसंत व ग्रीष्म ऋतु में खीरे की उपलब्धता बाजार में कम होने के कारण इसकी खेती किसानों को इस समय ज्यादा लाभप्रद हो सकती हैं। 

अतः निचले व मध्य क्षेत्रों के पॉलीहाउस उत्पादक कम खर्च से परिवर्तित प्राकृतिक हवादार पॉलीहाउस में खीरे की दो फसलें (बसंत तथा पतझड़ शीत) ऊगा सकते हैं तथा बाजार में उस समय खीरे के भाव भी ठीक होते हैं तथा कीटनाशकों व फफूंदनाशकों का छिड़काव किये बिना ही पॉलीहाउस में इसका सफल उत्पादन कर सकते हैं। 

पॉलीहाउस में खीरे के सफल उत्पादन के लिए सस्य कियायें :

1- पॉलीहाउस में खीरे के सफल उत्पादन के लिए पार्थिनोकार्पिक किस्में जिनमे बिना परागकण के फल तैयार होते हैं जैसे की क्यानख, पी.सी.पी.एच.-5, इसेटिस, मल्टीना, मनसोर, हसन इत्यादि ही लगाए।

2- पॉलीहाउस की ऊंचाई के अनुसार एक या दो टहनियां लेकर रस्सी या सुतली से ट्रेनिंग करें तथा अतिरिक्त टहनियों की काट-छाट करते रहें।

3- पहली पांच गांठों तक फूलों को निकाल दें।

सिंचाई : ड्रिप विधि से सिंचाई करें तथा तरल खाद पौधे लगाने के तीन सप्ताह बाद भूमि के उपजाऊपन के अनुसार सप्ताह में एक या दो बार दें तथा अंतिम तोड़ाई से 15 दिन पहले तरल खाद देना बंद कर दें।

अतः किसान भाई पॉलीहाउस तकनीक अपनाकर सिर्फ बेमौसमी सब्जिया ही नहीं अपितु विषाणु रहित बढियाँ गुणवत्ता वाली सब्जियां उगाकर अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं लेकिन इसके लिए आवश्यक हैं की किसान कम लागत वाली तकनीक को अच्छी तरह जाने ताकि कम से कम खर्चों में उच्च गुणों वाली सब्जियों का उत्पादन कर सकें। बाजार की उच्च मांग के अनुसार तथा खुले वातावरण के खतरों से बचने के लिए तथा सिमित जगह पर पॉलीहाउस में इन फसलों की खेती करना एक अच्छा विकल्प हैं।

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