1. पशुपालन

Bee Keeping: मात्र 20,000 रुपए में शुरू करें मधुमक्खी पालन, जानिए इसके व्यवसाय से जुड़ी अहम जानकारी

कंचन मौर्य
कंचन मौर्य
Beekeeping

Beekeeping

मधुमक्खी पालन (Bee Keeping) एक ऐसा व्यवसाय है, जिसके जरिए मौजूदा समय में ग्रामीण व शहरी, दोनों क्षेत्रों के लोगों को अच्छा रोजगार प्राप्त हो रहा है. इतना ही नहीं, इससे फसलों की उपज में वृद्धि होती है. इसके साथ ही मधुमक्खी पालन से शहद और मोम प्राप्त होते हैं. मधुमक्खी पालन (Bee Keeping) किसानों के लिए अनुकूल व्यवसाय है. 

यह कृषि में सहायक होने के साथ-साथ आमदनी का एक बेहतर जरिया है, इसलिए आज हम मधुमक्खी पालन से जुड़ी अहम जानकारी लेकर आए हैं, लेकिन उससे पहले मधुमक्खी पालन पर चल रहे नए शोध की जानकारी देते हैं.

मधुमक्खियों पर चल रहा नया शोध (New research on bees)

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों द्वारा मधुमक्खी पालन से फसलों की उपज बढ़ाने हेतु कार्य किया जा रहा है. इस शोध में विशेषज्ञों द्वारा मधुमक्खी के परागण की क्रिया को देखा जाएगा, साथ ही शहद की गुणवत्ता का आकलन किया जाएगा. बता दें कि देश में लगभग 1.25 लाख मीट्रिक टन शहद का उत्पादन होता है. इसके साथ ही लगभग 67 हजार 500 मीट्रिक टन शहद का निर्यात किया जा रहा है.  

क्या है मधुमक्खी पालन? (What is Beekeeping?)

मधुमक्खी पालन को आर्निथोलॉजी (Apiculture) कहा जाता है. हमारी पृथ्वी पर लगभग 20 हजार से ज्यादा प्रकार की मधुमक्खियां पाई जाती हैं, लेकिन इनमें सिर्फ 4 प्रकार की मधुमक्खियां शहद बना पाती हैं. मधुमक्खियां मोन समुदाय में रहने वाली कीट वर्ग की जंगली जीव है, जिन्हें पालकर शहद व मोम प्राप्त किया जाता है. खास बात यह है कि मधुमक्खी पालन कोई एक व्यक्ति या समूह शुरू कर सकता है.

मधुमक्खियों की प्रमुख प्रजातियां (Major species of bees)

भारत में मुख्यत: मधुमक्खियों की 4 प्रजातियां पाई जाती हैं.  

  1. एपिस डोरसेटा (भंवर मधुमक्खी)

  2. एपिस फलोरिया (उरम्बी मधुमक्खी)

  3. एपिस सेराना इण्डिका (भारतीय मधुमक्खी)

  4. एपिस मेलिफेरा (इटालियन मधुमक्खी)

मधुमक्खी पालन का उपयुक्त समय  (Best time for beekeeping)

आमतौर पर सालभर मधुमक्खी पालन (Bee Keeping) किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए जनवरी से मार्च का समय काफी उपयुक्त माना गया है. वहीं नवंबर से फरवरी का समय व्यवसाय के लिए काफी फायदेमंद होता है.

मधुमक्खी पालन में लागत  (Cost of beekeeping)

अगर कोई मधुमक्खी पालन (Bee Keeping) का व्यवसाय शुरू करना चाहता है, तो वह लगभग 5 बाक्स से भी शुरू कर सकता है. बता दें कि एक बॉक्स की कीमत लगभग 4 हजार रुपए होती है. इस तरह अगर 5 बॉक्स लेंगे, तो इसमें 20 हजार रुपए की लागत लग जाएगी.

कहां से प्राप्त करें बॉक्स व मधुमक्खियां  (Where can I get boxes and bees)

जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली में नेशनल बी बोर्ड से प्रमाणित संस्थाएं हैं, जहां से मधुमक्खियां खरीदी जा सकती है. इसके अलावा आप उद्यान विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र से भी मधुमक्खियां खरीद सकते हैं. यहां से आप बाक्स भी प्राप्त कर सकते हैं. आगे बताते चले कि मधुमक्खी पालन (Bee Keeping) वाला बॉक्स 12 इंच चौड़ा होता है औऱ 22 इंच लंबा होता है. इसके एक बक्से में 10 या उससे कम फ्रेम होते हैं. अगर फ्रेम कम हैं, तो शहद भी कम इक्ट्ठा होगा.

मधुमक्खी पालन के फायदे (Benefits of beekeeping)

  • आय में बढ़ोत्तरी होती है, साथ ही स्वरोजगार अच्छा मिल जाती है.

  • शुद्ध शहद, रायल जेली व मोम प्राप्त होता है.

  • मधुमक्खी के मौन वंश को खेतों व मेड़ों पर रखने से गुना उपज में बढ़ोत्तरी होती है.

  • मधुमक्खी पालन में कम लागत लगती है, साथ ही समय की बचत होती है.

  • कम उपज वाले खेत से भी शहद और मधुमक्खी के मोम का उत्पादन किया जा सकता है.

  • मधुमक्खी पालन से पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

  • मधुमक्खियां फूल वाले पौधों के परागण में अच्छी भूमिका निभाती हैं.

मधुमक्खी से प्राप्त उत्पाद  (Bee Products)

मधुमक्खियों से शहद, मोम और रायलजेली का निर्माण किया जाता है. इनका सेवन मानव स्वस्थ के लिए लाभकारी माना गया है. बता दें कि रोजाना शहद का सेवन करने से अस्थमा, कब्ज व , रक्तचाप जैसी बीमारियां नहीं होती हैं. इसके अलावा रायल जेली का सेवन करने से ट्यूमर की बीमारी का खतरा कम होता है, साथ ही दिमाग तेज होता है.

मधुमक्खी पालन के लिए सरकारी मदद (Government help for beekeeping)

केंद्र सरकार द्वारा एक महत्वपूर्ण योजना मधुमक्खी पालन लोन योजना (Madhumakhi Palan Loan Yojana) चलाई जा रही है. इसके तहत मधुमक्खी पालन के लिए लोन दिया जाता है. इस योजना का एकमात्र उद्देश्य यह है कि किसानों को मधुमक्खी पालन की तरफ प्रोत्साहित किया जाए.

मधुमक्खी पालन से आमदनी (Income from beekeeping)

अगर आपको 2 माह में एक बाक्स से लगभग 50 से 60 किलो शहद का उत्पादन प्राप्त होता है, तो एक बाक्स पर लगभग 3 हजार रुपए का मिल सकते हैं. इस तरह जैसे-जैसे बाक्सों की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे आमदनी बढ़ती जाएगी.

क्या कहते हैं मधुमक्खी पालक?

कृषि जागरण ने मधुमक्खी पालन से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए हरियाणा के करनाल जिले के मधुमक्खी पालक संदीप जट्टान से बातचीत की. उन्होंने बताया कि इस वक्त बाजार में सबसे ज्यादा मांग शहद, मोम और रायलजेली की होती है. ऐसे में आप मधुमक्खी पालन से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

अगर छोटे स्तर पर मधुमक्खी पालन करना है, तो 4 से 5 बॉक्स से शुरुआत कर सकते हैं. वैसे कुछ किसान 10 से 20 बॉक्स से भी इसकी शुरुआत करते हैं. मगर इससे पहले जरूरी है कि आप मधुमक्खी पालन के लिए प्रशिक्षण ट्रेनिंग जरूर लें. संदीप जट्टा का कहना है कि मधुमक्खी पालन में सबसे ज्यादा ध्यान मार्केटिंग पर देना होता है. इसके लिए आप सोशल मीडिया की मदद ले सकते हैं. इसके अलावा अपने उत्पाद को स्थानीय बाजार में बेच सकते हैं. आगे बता दें कि संदीप जट्टान भी मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग देते हैं. उनका कहना है कि आप मधुमक्खी पालन करते हैं, तो पहले माह ही इसमें लागत लगने वाली निकाल आती है. इसके अतिरिक्त भी अच्छा लाभ होता है.

English Summary: important information related to beekeeping business

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