1. पशुपालन

ओस्मानाबादी बकरी का पालन कैसे करें, आइये जानते हैं

श्याम दांगी
श्याम दांगी

Osmanabadi Goat

बकरी की यह नस्ल महाराष्ट्र के ओस्मानाबादीजिले में पाई जाती है इसलिए इसे ओस्मानाबादी बकरी कहा जाता है. जो कि दूध और मांस उत्पादन दोनों के लिए उपयोगी होती है. इस नस्ल की बकरी कई रंगों में पाई जाती है. इसके प्रौढ़ नर बकरे का वजन लगभग 34 किलो और मादा बकरी का वजन 32 किलो ग्राम होता है. बकरी की यह नस्ल रोजाना 0.5 से 1.5 लीटर दूध देने में सक्षम होती है.

ओस्मानाबादी बकरी का चारा

यह बकरी हर किस्म का चारा खाती है. यह खट्टा, मीठा और कड़वा चारा भी चाव से खाती है. तो आइए जानते हैं बकरी की नस्ल का पसंदीदा चारा कौन-सा है.

फलीदार चारा- मटर, बरसीम, लहसुन और ग्वार फलियां आनंद से खाती है. इसके अलावा इसे गैर फलीदार चारे में जई और मक्का पसंद है.

पत्तियां- इस नस्ल को बरगद, नीम, आम, बेरी, अशोका और पीपल की पत्तियां खाना भाता है.

झाड़ियां- इसके अलावा यह करौंदा, बेरी, गोखरू और खेजरी जैसी झाड़ियों की पत्तियां खाना पसंद करती है.

घास-इसे घास में स्टाइलो घास, नेपियर घास, गिन्नी घास और दूब घास खिलाया जा सकता है.

सब्जियां- यह नस्ल सब्जियां भी चाव से खाती है. इसे मूली, गाजर, शलजम, चुकंदर, गोभी खिलाई जा सकती है.

मिश्रित भोजन- इसे सरसों की खली, नारियल की खली, मूंगफली की खली, गेहूं, शीशम और अलसी का चूरा, बाजरा, मक्का, ज्वार और जौ भी  खिलाया जा सकता है.

मेमने की खुराक प्रबंध कैसे करें

जन्म के तुरंत बाद मेमने की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए खीस पिलाएं. दरअसल, खीस में विटामिन, आयरन, कॉपर, मैग्नीशियम जैसे तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. जन्म के बाद मेमने को प्रतिदिन 400 मिलीलीटर दूध पिलाना चाहिए. एक महीने बाद दूध की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए.

 दुधारू बकरी की खुराक

दूध देने वाली बकरी को प्रतिदिन साढ़े चार किलो चारा लगता है जिसमें एक किलो सुखा चारा जरूर खिलाना चाहिए.

गाभिन बकरियों की देखरेख कैसे करें?

गाभिन बकरियों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इसके लिए ब्याने के 6 से 8 सप्ताह पहले से दूध निकालना बंद कर देना चाहिए. ब्यांत के 15 दिनों पहले से विभिन्न बीमारियों से बचाव के लिए ब्यांत घर की अच्छे से साफ सफाई कर देनी चाहिए.

 मेमनों की देखरेख

जन्म के तुरंत बाद मेमने की अच्छे से सफाई कर दें. वहीं मुंह, नाक, कान की सुखे कपड़े से सफाई करना चाहिए. यदि मेमना सांस नहीं ले रहा है तो श्वसन पथ को अच्छे साफ कर देना चाहिए. मेमने को 30 मिनट बाद ही खीस पिलाना चाहिए.

प्रमुख टीके

जन्म के बाद मेमने को टैटनस का टीका जरूर लगवाएं. वहीं क्लोस्ट्रीडायल बीमारी से बचाव के लिए सीडीटी टीका लगवाना चाहिए. जन्म के 5 से 6 सप्ताह बाद रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए टीका जरूर लगवाएं.

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