देश में बढ़ रही है भैंस की इन नस्लों की मांग

भैंस एक दुधारू पशु है. कुछ लोगों द्वारा भैंस का दूध गाय के दूध से अधिक पसंद किया जाता है. यह ग्रामीण भारत में बहुत उपयोगी पशु है. आज हम आपको ऐसी ही भैंसों की नस्लों के बारे में बताएंगे  जिनकी आज के समय में  बहुत ज्यादा मांग  है.

मुर्रा नस्ल

मुर्रा भैंस का साइंटिफिक नाम बुबालस बुबालिस है. देसी भैंसों की अपेक्षा इस नस्ल की भैंसों की आंख और सींग छोटे होते हैं, जिसको देखकर आप पहचान सकते हैं.  इस नस्ल की भैंसों का सींग घुमावदार होता है और काफी छोटा होता है. अगर हाथ से सींग को छुएंगे तो इसका किनारा आपको काफी पतला महसूस होगा. गर्दन लंबी होती है जबकि इसकी पीठ काफी चौड़ी होती है. इस भैंस की चमड़ी काफी पतली होती है और इसका रंग हल्का काला रंग होता है.

आमतौर पर मुर्रा भैंस की कीमत 40 से 80  हजार रूपये के बीच में होती है. यह भैंस प्रतिदिन 12 लीटर दूध दे सकती है. अगर भैंस 12 लीटर से ज्यादा दूध देने में सक्षम है तो उसकी कीमत 45 हजार से ज्यादा हो सकती है. भारत के अलग-अलग हिस्सों में इस के दामों में अंतर हो सकता है.

नीली रावी नस्ल

इस नस्ल का जन्म स्थान मिंटगुमरी (पाकिस्तान) है. इस नस्ल की भैंस का शरीर काला, बिल्ली जैसी आंखें, माथा और पूंछ का निचला हिस्सा सफेद, घुटनों तक सफेद टांगे, मध्यम आकार की होती है. इसके सींग भारी होते हैं. यह  औसतन 16-18 लीटर दूध देती है और दूध में वसा की मात्रा 7 प्रतिशत होती है. इस नस्ल के भैंसे का औसतन भार 600 और भैंस 450 किलो की होती है. इस नस्ल की भैंसों को जरूरत के अनुसार ही खुराक दें. फलीदार चारे को खिलाने से पहले उनमें तूड़ी या अन्य चारा मिला लें ताकि अफारा या बदहजमी ना हो.

भदावरी नस्ल

भदावरी भैंस की भी हमारे देश में बहुत ज्यादा मांग है. यह मुर्रा भैंस से तो कम दूध देती है लेकिन इसके दूध में वसा की बहुत अधिक मात्रा है. यह प्रतिदिन 4 - 5 (कि.ग्रा ) दूध देती है. इसके दूध में औसतन 8 प्रतिशत वसा पाया जाता है. यह मात्रा अलग -अलग भैंसों में 6 से 14 प्रतिशत तक हो सकती है. इसके दूध में पाई जाने वाले वसा का प्रतिशत, देश में पायी जाने वाली भैंसों की किसी भी नस्ल से अधिक है. 

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मनीशा शर्मा, कृषि जागरण

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