Goat farming Benefits: आज के समय में पशुपालन पशुपालकों के साथ किसान भाई भी कर रहे हैं, क्योंकि यह एक ऐसा बिजनेस है जिसमें कम मेहनत में अच्छा मुनाफा हो जाता है और ऐसे में अगर पशुपालक या किसान भाई पशु की तलाश में है, तो बकरी पालन उनके लिए सही विकल्प है, जिसमें तोते जैसे मुंह वाली बकरी की बीटल नस्ल का पालन करके वह रोजाना 3 किलो दूध से तगड़ी कमाई कर सकते हैं. साथ ही बकरी की यह नस्ल ग्रामीण इलाकों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है, क्योंकि बकरी के दूध के साथ इसके मीट की भी बाजारों में अधिक डिमांड है. चलिए आगे जानते हैं इस नस्ल से कितना होगा मुनाफा.
बीटल नस्ल की खासियत
बीटल नस्ल की पंजाब की प्रसिद्ध नस्ल मानी जाती है. यह नस्ल मीट और दूध दोनों उद्देश्यों के लिए बेहद उपयोगी है. बीटल बकरियों की सबसे बड़ी खासियत इनकी तेज़ वृद्धि और अच्छी उत्पादन क्षमता है. साथ ही एक वर्ष की उम्र में ही बीटल नस्ल की बकरी का वजन लगभग 35 से 40 किलोग्राम तक पहुंच जाता है. यही कारण है कि बाजार में इनकी मांग काफी अधिक रहती है. दूध उत्पादन के मामले में भी यह नस्ल काफी आगे है. एक स्वस्थ बीटल बकरी प्रतिदिन करीब 2.5 से 3 लीटर तक दूध देती है, जिससे किसानों और पशुपालकों को दोगुना मुनाफा हो जाता है.
जहानाबाद के साथ इन राज्यों के लिए सही विकल्प
बिहार बेहद ही लंबे समय से पशुपालन के लिए जाना जाता है, लेकिन हाल ही कुछ ही सालों में बकरी पालन ने अपनी खास पहचान बनाई है. राज्य के कई जिलों में किसान इसे व्यवसायिक रूप से अपना रहे हैं और ऐसे ही जहानाबाद जिला भी अब बकरी पालन के एक नए केंद्र के रुप में उभरा है. यहां के किसान मजदूरी को छोड़कर बकरी पालन कर अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे हैं.
इसके अलावा, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और अब छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी इस नस्ल को सफलतापूर्वक पाला जा सकता है.
पहचान और प्रजनन क्षमता
बीटल नस्ल की बकरियों की पहचान उनके अनोखे शारीरिक लक्षणों से होती है. इनका मुंह तोते के समान आगे की ओर निकला हुआ होता है और कान लंबे तथा नीचे की ओर झुके रहते हैं. शरीर मजबूत और ऊंचाई सामान्य से अधिक होती है, जिससे ये देखने में भी आकर्षक लगती हैं. साथ ही प्रजनन क्षमता के लिहाज से भी यह नस्ल किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है. बीटल बकरी साल में औसतन तीन से चार बच्चों को जन्म दे सकती है, जिससे पशुपालकों को बड़ा इजाफा होता है.
कितना होगा मुनाफा?
बकरी पालन की सबसे बड़ी खासियत इसका कम खर्च होना है, यानी की अगर बकरी पालन कर रहे हैं, तो आपको शुरुआती दौर में चारा और देखभाल पर थोड़ा खर्च आता है, लेकिन जैसे-जैसे बकरियां बड़ी होती हैं, वे खुले में उपलब्ध घास और कृषि अवशेषों पर ही निर्भर हो जाती हैं.
साथ ही बकरी पर महीने का खर्च लगभग 300 रुपये तक आता है. बड़े फार्म में यह खर्च और भी कम हो जाता है, क्योंकि संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है. इसके अलावा यह बकरी रोजाना 3 किलो दूध देती है और कम खर्च में पाली जाने वाली इन बकरियों की भारी मांग होने के कारण व्यापारी ₹15,000 तक भुगतान करते हैं.
लेखक: रवीना सिंह
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