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किसानों को व्यवसायी बनकर खेती करने की ज़रूरत - अमित कुमार बी के खरे, इण्डोगल्फ़ क्रॉपसाइंसेज़

किसानों को आज के समय में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए आगे बढ़ना चाहिए जिससे कम लागत में वह अच्छा मुनाफ़ा कमा सकें. खेती की आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देते हुए इण्डोगल्फ़ क्रॉपसाइंसेज़ लिमिटेड (Indogulf Cropsciences Ltd.)  के ब्रांडिंग एंड डेवलपमेंट इंचार्ज अमित कुमार बी के खरे ने कृषि जागरण टीम के साथ बात की. इस दौरान हमने किसानों से जुड़े कुछ ख़ास और चर्चित मुद्दों को उठाया और उनपर उनके क्या विचार हैं, यह साक्षात्कार के ज़रिए जानने की कोशिश की.

पीएम मोदी के साल 2022 तक देश के किसानों की आय दोगुना करने के उद्देश्य में कंपनी का क्या योगदान है?

हमारे देश में ज़्यादातर फ़ोकस उत्पादन पर ही किया जाता है, लेकिन उस उत्पादन के साथ आमदनी कैसे बढ़े, इसके बारे में ज़्यादा ज़ोर नहीं दिया जा रहा था. इसी पर ध्यान देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्पादन और किसानों की आमदनी के गैप को कैसे दूर किया जाए,  इसपर ज़ोर देने की बात कही और एक लक्ष्य निर्धारित किया है. इसी के तहत खेती के कामों के लिए लोगों की मजदूरी बढ़ाना भी बहुत ज़रूरी है, जो कि उत्पादन के दाम बढ़ाने के साथ ही संभव है. अब इसी प्रक्रिया में इण्डोगल्फ़ के उत्पाद काफी सहायक हैं.

हमारे सभी उत्पादों में फसलों के लिए पोषक तत्व मौजूद हैं. किसानों को कम डोज़ और कीमत में फसल का अच्छा उत्पादन मिलता है. फसल स्वस्थ होती है, तो कीमत भी अच्छी मिलती है. मार्किट में भी स्वस्थ पैदावार की अच्छी मांग है और उसी के मुताबिक भी किसानों को उनकी कीमत भी अच्छी मिलती है. हम भविष्य में किसानों के लिए बेहतर करने की दिशा में काम कर रहे हैं और इसके तहत नए उत्पाद लेकर आएंगे.

कीटनाशक से किसानों को सुरक्षित रखने के लिए आप क्या करते हैं?

एग्रीकल्चर से जुड़ी किसी भी ट्रेड कम्पनी की यह ज़िम्मेदारी बनती है कि वह खेती-किसानी को सुरक्षित बनाए और किसानों की सुरक्षा को भी अहमियत दे. किसान हैं, तो ही हम हैं. किसानों की गाढ़ी मेहनत से ही हमें अपना खाना मिल पाता है, ऐसे में उन्हें सुरक्षा देना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए. हम इसके लिए अपने हर एक उत्पाद के साथ एक दिशा-निर्देश या लीफ़लेट रखते हैं जिससे किसानों को वह उत्पाद इस्तेमाल करने का तरीका पता चले. हर राज्य में हमारे डेवलपमेंट अफसर हैं जो किसानों और डीलर्स को इसके लिए जागरुक भी करते हैं कि कैमिकल का कितना और कैसे उपयोग करना चाहिए.

किसानों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली "सेफ़्टी किट" क्या है?

हमारा कहना है कि किसान खेतों में कीटनाशक का छिड़काव करते समय अपनी सुरक्षा का ख्याल ज़रूर रखें. जहां सरकार की तरफ से किसानों के लिए सुरक्षा किट उपलब्ध कराई जाती है, हम भी किसानों के लिए एक सेफ़्टी किट उपलब्ध कराते हैं. इस किट को फसलों में कीटनाशक के छिड़काव के दौरान इस्तेमाल किया जाता है. इससे किसान केमिकल के गलत प्रभाव या किसी तरह की एलर्जी से सुरक्षित रह सकते हैं. .

सेफ़्टी किट का इस्तेमाल किसान कैसे कर सकते हैं, इसके लिए कोई ट्रेनिंग दी जाती है?

किसान अगर फसलों पर किसी कीटनाशक का छिड़काव कर रहा है, तो इस बात का वह ख़ास ध्यान रखे कि उसके शरीर का कोई भी अंग खुला न हो. अपने शरीर को पूरी तरह से ढंक कर ही वह छिड़काव करे. इस्तेमाल किए जाने वाले इन केमिकल में अलग-अलग पैमाने पर टॉक्सिसिटी होती है, जैसे किसी कीटनाशक पर आपको लाल, पीला, जैसा मार्क मिलेगा, जिससे यह निर्धारित किया जाता है. इण्डोगल्फ़ किसान किट में भी किसानों के लिए दस्ताने, चश्मा, टोपी, ऐप्रन जैसी चीज़ें हैं जिन्हें पहनने के बाद ही किसान को कीटनाशक छिड़काव करने की सलाह दी जाती है. इसके साथ ही, हम एक नोज़ल भी उपलब्ध कराते हैं. ज़्यादातर लोग इस नोज़ल की बात नहीं करते हैं, लेकिन यह ज़रूरी है. हर्बिसाइड्स के लिए अलग नोज़ल आते हैं. हमारे अलग-अलग उत्पाद के लिए अलग नोज़ल हैं.

नहीं, हम किट को इस्तेमाल करने के तरीके के बारे में कोई ट्रेनिंग नहीं देते. दरअसल, किट के साथ ही किसानों को जो लीफ़लेट उपलब्ध कराया जाता है, उसमें इसी से जुड़ीं कुछ तसवीरें होती हैं. इन तस्वीरों में किट के हर एक आइटम को इस्तेमाल करने का तरीका दिखाया गया होता है. किसान या कोई भी उन तस्वीरों को देखकर आसानी से यह समझ सकता है कि किस चीज़ का इस्तेमाल कैसे करना है. 

किसानों के लिए आपका क्या सन्देश है जिससे वो कम लागत में अधिक मुनाफ़ा कमा सकें?

किसानों को सबसे पहले यह समझने की बहुत ज़रूरत है कि हर कीटनाशक का एक निश्चित पैरामीटर होता है, जितना और जैसे इस्तेमाल करने के बारे में बताया गया हो, ठीक उतना ही और ठीक वैसे ही करें, न कम और न ज़्यादा. इस बारे में अगर आप कुछ और जानकारी लेना चाहते हैं, तो आप अपने नज़दीक के केवीके या किसी संबंधित यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ से ले सकते हैं.

दूसरी ख़ास बात यह कि हम सभी यह जानते हैं कि भारत में कई जगह पानी का स्तर घटता जा रहा है. ऐसे में किसानों को चाहिए की वे नई-नई तकनीक को इस्तेमाल में लाएं. हम खेतों को पानी नहीं देते, हमारा मकसद पौधों को पानी देना होता है, इसी को ध्यान में रखते हुए किसानों को ड्रिप सिंचाई पद्धति का इस्तेमाल करना चाहिए, या किसान स्प्रिंकलर से भी सिंचाई कर सकते हैं. इसमें पानी की बर्बादी नहीं होती है.

किसानों को खेती अब मार्किट वैल्यू के हिसाब से करने की ज़रूरत है. मार्किट में क्या डिमांड है, उस हिसाब से उत्पादन करेंगे, तो परिणाम भी बेहतर ही मिलेंगे. अब वक्त है कि किसानों को यह समझ आये कि उन्हें एक बिज़नेसमैन की तरह सोचना और काम करना है, अगर ऐसा होता है, तो ज़ाहिर सी बात है की उनकी आय दोगुनी होगी और वो तरक्की करेंगे.


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