किसानों को मुख्यधारा से जोड़ना डीडी किसान चैनल का लक्ष्य - डॉ मनोज कुमार पटारिया

26 मई 2015 को डीडी किसान चैनल की शुरूआत हुई। सरकार का ये सराहनीय कदम था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चैनल को लांच किया था लेकिन चैनल को एक साल दो महीने पूरे होने के बाद भी क्या किसान खुश है, क्या किसानों की समस्याओं का निदान हुआ है, क्या आज वो मंडी मे सही भाव पर अपना खाघान्न बेच पाता है, क्या बैंक की पॉलिसी या बैंक की जानकारी किसानों को मिल पा रही है, क्या  भारत का किसान हाईटेक हो गया है अब। जिस देश के गाँव मे अभी भी बिजली पहुँची ही नही है या जँहा पहुँची है वँहा ना के बराबर बिजली है उस देश मे चैनल खुलने से किसानों को कितना फायदा हो रहा है ये तो वक्त ही बताएँगा। इन्ही सब मुद्दों पर चर्चा की चैनल के एडिशनल डायरेक्टर जनरल, चैनल हेड डॉ मनोज कुमार पटारियाँ से कृषि जागरण पत्रिका की कोरेस्पोंडेंट दीपशिका सिंह ने।

डीडी किसान चैनल खुलने का क्या उद्धेश्य है? 
ये चैनल खास तौर पर किसानों के लिए और ग्रामीण समुदाय के लिए पूरी तरह समर्पित है।  उनकी जो जानकारी चाहिए जैसे कृषि का वैज्ञानिक जानकारियाँ, मौसम, मंडी भाव की समय पर ताजा जानकारी देकर किसानों का मुनाफा बढ़ाने कोशिशे की जाती है। किसान चैनल उन्हे ना सिर्फ कृषि आधारित जानकारी उपलब्ध कराता है बल्कि शिक्षा, कुटीर उघोगो, बैंकिग और संस्कृति से जुड़ी हर जानकारी चैनल समय-समय पर देता रहता है।

इस चैनल के माध्यम से कितने किसानों को फायदा हो रहा है?
डीडी किसान चैनल दूरदर्शन का एक सराहनीय कदम है। चैनल की पहुँच काफी दूर दराज इलाको तक है। एक समय पर चैनल की दर्शक संख्या दो करोड़ का आँकड़ा भी पार कर लिया था। औसतन तौर पर क करोड़ तक ये संख्या रहती है। चैनल के कई प्रोग्राम भी काफी लोकप्रिय है जैसे खेत-खेलिहान,फूलों-किसान,पर्यावरण की ओर, लोक रंग ये सभी कार्यक्रम लोगों द्रारा काफी पसंद किए जा रहे है।

किसान चैनल के टारगेट आडियंस क्या है सिर्फ किसान या उनका परिवार भी?
किसान चैनल सिर्फ लोगों को कृशि की जानकारी नही देता बल्कि इसमे किसान के परिवार का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। इस चैनल मे सूचना, मनोरंजक कार्यक्रम लोगों तक पहुँचाया जाता है। चैनल पर पहली बार कृषि कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस प्रोग्राम मे कविताओं के माध्यम से कृषि विज्ञान की जानकारी किसानों की दी जाती है। चैनल पर फिक्शन सीरियल, नॉन फिक्शन सीरियल भी किसानों और उनके परिवार के लिए बनाए जाते है। कई बार सीरियलों के माध्यम से किसानो को   वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।

चैनल किसानों की समस्या का किस प्रकार निदान करता है? 
चैनल पर रोज फोन-इन कार्यक्रम के माध्यम से किसानों की समस्या का निदान किया जाता है। चैनल मे किसान किसी भी समय पर फोन करके अपना सवाल रिकॉर्ड कर सकते है। वैज्ञानिक उन सभी सवालों का जवाब समय-समय पर देते रहते है। चैनल मे कई बार किसानों और वैज्ञानिको के बीच मार्डरेटर का इस्तेमाल भी किया जाता है जिससे सही और सटीक जानकारी किसानों तक पहुँचाई जा सकें।

चैनल मे और नए प्रयोग किस तरह के किए जा रहे है? 
चैनल को हम लगातार सर्वागीण चैनल के रूप मे स्थापित करने की कोशिश कर रहे है। इसमे हम आदिवासी समाज,आर्टस और कल्चर को ध्यान मे रखकर कई प्रोग्राम जुड़ने की कोशिश कर रहे है। दूरदर्शन के डीडी स्पोर्टस चैनल के साथ मिलकर  स्वदेशी खेल,ट्राईबल गेम और इनोवेशन पर बहुत जल्दी प्रोग्राम लाए जाएँगे।

चैनल भाषा की समस्या का समाधान किस प्रकार करता है? 
पहले चरण मे चैनल का प्रयास था इसे हिंदी चैनल के रूप मे स्थापित करना एक बार इसमे सफलता मिलने के बाद दूसरे चरण मे जाने का प्रयास करेंगे। दूसरे चरण मे क्षेत्रीय भाषाएं और बोलियाँ सम्मिलत है। क्षेत्रीय केंद्र इसमे हमारी मदद कर सकते है। दूरदर्शन का एक विंग जिसे narrow कास्टिंग विंग कहते है। इसके माध्यम से देश के करीब पचास से ज्यादा केंद्र अपनी- अपनी क्षेत्रीय भाषाओं मे कृषि का कार्यक्रम दिखाते है। किसान चैनल का इनसे लगातार तालमेल बना रहते है। किसानों के लिए कोई बढ़िया प्रोग्राम उसका हम क्षेत्रीय भाषाओं मे डबिंग करके दर्शको तक पहुँचाने की लगातार कोशिश कर रहे है। विभिन्न केंद्रों से टाई- अप करके इस बाधा को दूर करने की लगातार कोशिश की जा रही है।

चैनल पर किस प्रकार के प्रोग्राम दिखाए जाते है?
चैनल पर खेत- खलिहान प्रोग्राम में किसानों को आज या अभी क्या करना है इस बारें मे बताया जाता है। इस प्रोग्राम के माध्यम से किसानों को ताजा जानकारी कार्यक्रम के माध्यम से सुबह-सुबह दी जाती है। शाम को प्रोग्राम होता है हैलो किसान जो कि लाइव प्रोग्राम है। जिसमे किसान फोन करके सीधे तौर पर हमसे जुड़ सकते है। किसान जिस नंबर पर फोन करते है वो एक टोल फ्री नंबर है। इस सीरियल के माध्यम से किसानों को विशेषज्ञ उनकी समस्या का समाधान करते है। 

कोई संदेश जो आप किसानों को देना चाहें? 
किसानों को खासतौर पर यही कहना चाहूँगा की वो सब जागरूक बनें। जैसे की आजकल हम सब जानते है ज्ञान का युग है। किसानों के पास कई माध्यम जैसे चैनल, पत्र-पत्रिकाएँ, सोशल मीडिया और मोबाईल तो सबके पास है ही। किसानों के पास बहुत से माध्यम है हमारे पास पहुँचने के लिए। सरकार आपके पास पहुँचने का लगातार प्रयास कर रही है। किसानों का ये कर्तव्य बनता है की आप हम तक अपने सुझाव पहुँचाए। इससे आप पनी मदद के साथ हजारों किसानों का भला भी होगा। हम और आप मिलकर के समाज की मुख्यधारा मे आए। अगर आप(किसानों) का साथ मिलेगा तो हमारे बीच के गेप को हम आराम से पार कर सकते है। हमारी कोशिश रहती है की समय पर आपको सारी जानकारी उपलब्ध करा सकें। जानकारी के माध्यम से आप और हम मिलकर कृषि आधारित भारत की अर्थव्यवस्था को विकास की राह पर बहुत आगे ले जाया जा सकें।

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