मेहनत से सब कुछ संभव है - एम. एल. धवन

जब हम मेहनत करके अपनी मंजिल को हासिल करने की कोशिश करते हैं तो हजारों परेशानियां हमारे सामने आती हैं। यदि दृढ़ निश्चय किया जाए तो इस तरह की परेशानियों से पार पाकर हम अपनी मंजिल हासिल कर लेते हैं। ऐसा कहना है सुपरकिंग टायर्स मैन्यूफेक्चरर प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एम. एल. धवन का जिन्होंने अलग मुकाम बनाया। सुपरकिंग टायर्स आज सफलता के मुकाम पर है। इस कंपनी की सफलता के पीछे एम. एल. धवन की कड़ी मेहनत रही है। कृषि जागरण ने एम. एल. धवन से बात कर उनसे कंपनी कि गतिविधियों के विषय में विस्तार से बात की। पेश हैं उनसे बातचीत के कुछ मुख्य अंश -

सुपरकिंग टायर्स की शुरुआत कैसे हुई?

सुपरकिंग मैन्यूफेक्चरर प्राइवेट लिमिटेड की शुरुआत साल 1976 में हुई थी। उस समय हम ट्यूब बनाते थे। हर किसी का सपना होता है अपने बिजनेस को आगे बढ़ाना और इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए हमने 1982 में कृषि क्षेत्र में उपकरणों के साथ टायर्स का निर्माण करना शुरू किया। हमें महसूस हुआ कि किसान महंगे टायर्स नहीं खरीद पाते हैं इसलिए हमने किसानों को कम मूल्य में अच्छे कृषि टायर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा। तब से लेकर अब तक हम सफलता की ओर अग्रसर हैं। ये मेहनत का ही नतीजा है कि आज हमने अपने ग्राहकों के बीच एक पहचान बनाई है इसलिए मैं तो कहना चाहूंगा कि मेहनत से सबकुछ संभव है।

शुरुआती दिनों में किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा ?

जहां तक शुरूआती दिनों का सवाल है तो शुरूआती दिन काफी कठिन रहे। शुरुआत में हमें इस काम की पूरी जानकारी नहीं थी। सबसे मुश्किल काम होता है किसी काम को शुरू करने से पहले उसकी पूरी जानकारी होना जिसमें हमें काफी परेशानी हुई। हमें अन्य परेशानियों का भी सामना करना पड़ा। वैसे भी शुरुआत छोटे काम की करें या बड़े से, परेशानियों का तो सामना करना ही पड़ता है। कंपनी शुरू होने के बाद किसानों ने उत्पादों को स्वीकार किया। हम अपने ग्राहकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरे हैं। आज यही कारण है कि इन 40 सालों में अच्छे उत्पादों की वजह से कंपनी अपने ग्राहकों के विश्वास पर खरी उतरी है।

कृषि क्षेत्र में आपके मुख्य टायर कौन-से हंै ?

यदि हम टायर्स की बात करें तो हमारे पास मुख्य रूप से ट्रैक्टर टायर, एग्रीकल्चर इम्प्लीमेंट्स में उपयुक्त टायर्स, नॉन-ट्रैक्शन और एग्रीकल्चर ट्रैक्टर ट्रायलर टायर मुख्य रूप से कृषि में इस्तेमाल किए जाने वाले टायर्स हैं।

भारत में कंपनी की उपस्थिति कैसी है ?

देश के लगभग सभी राज्यों में हम कार्य कर रहे हैं। इसी के साथ एक्सपोर्ट में हमारी कंपनी काफी अच्छा परफाॅर्म कर रही है। अभी तक कुल उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत हम एक्सपोर्ट करते हैं लेकिन हम डोमेस्टिक मार्केट पर पूरा ध्यान दे रहे हैं। हम कोशिश कर रहे हैं अपने टायर्स को सीधे किसानों तक पहुंचाएं ताकि बिचैलियों को जो पैसा जाता है वो उनको न पहुंचकर सीधा फायदा किसानों को मिले।

सुपरकिंग टायर कैसे किसानों की आय दोगुना करने में मुख्य भूमिका निभा रही है ?

जहां तक किसानों की आय को दोगुना करने का सवाल है हम किसानों को किफायती दामों में अच्छे टायर मुहैया कराते हैं। यदि किसानों को कम मूल्य में अच्छे उत्पाद मिलेंगे तो उनकी लागत कम आएगी और काम अच्छा होगा जिससे कि किसानों की आय भी बढ़ेगी और खर्च में भी कमी आएगी।

किसानों से आप क्या कहना चाहेंगे ?

किसानों को बस इतना ही कहना चाहूंगा कि वो किसी भी उत्पाद का चयन करने से पहले उसकी गुणवत्ता को पूरी तरह जांच लें। हमेशा ऐसे उत्पाद लें जो कि अच्छे और किफायती हों। मैं इस बात में विश्वास करता हूं कि मेहनत से सबकुछ संभव है इसलिए मेहनत करना कभी भी नहीं छोड़ना चाहिए। किसान भाई निराश न हों मेहनत का फल उन्हें अवश्य मिलेगा। 

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