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आधुनिक कृषि से ही कृषि विकास संभव - हुकुमदेव नारायण यादव

बदलते परिवेश और शहरों के आधुनिकीकरण ने किसानों को बेसहारा कर दिया है। आज हर जगह सभी मुद्दे पर चर्चा की जाती है लेकिन किसान और किसानी की बात छूट जाती है। गांव की गरीब जनता व किसानों से बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता भी संसद में पहुंचने के बाद किसानों को भूल जाते हैं, लेकिन इन सबके बीच कोई ऐसा जमीनी नेता भी होता है जो सिर्फ गरीबों और किसानों की बात करता है।

हुकुमदेव नारायण यादव ऐसे ही नेता हैं जो गरीबों और किसानों की आवाज माने जाते हैं। वह जब संसद में बोलना शुरू करते हैं तो विपक्षियों की घिघ्घी बंध जाती है। वह जब किसानों, गरीबों की समस्याओं पर खुलकर चर्चा करते हैं तो बड़े-बड़े वक्ताओं के मुंह पर ताले लग जाते हैं।

ज्ञात हो कि हुकुमदेव नारायण यादव भारत की 16वीं लोकसभा के सदस्य, भारतीय जनता पार्टी के सदस्य, कृषि मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष तथा किसानों के पक्षधर नेता हैं। वे बिहार के मधुबनी से लोकसभा सदस्य हैं।

कृषि जागरण टीम ने किसानों की समस्याओं को लेकर उनसे चर्चा परिचर्चा की प्रस्तुत है उनके हुई बातचीत का कुछ प्रमुख अंश....

भारतीय जनता पार्टी किसानों की आय दोगुनी करने के लिए क्या कर रही है?

जब भी कोई योजना बनती है तो उसके तीन स्तर होते हैं। पहला अल्पकालिक, दूसरा तात्कालिक और तीसरा दीर्घकालिक। भारत सरकार की जो भी योजना है वह दीर्घकालिक है। सबकी यही अपेक्षा रहती है कि कोई भी योजना हो वह तात्कालिक हो। यह तो किसानों की आय दोगुनी करने की योजना है, यह कैसे तात्कालिक हो सकती है? किसान की आय दोगुना करना है तो पहले उत्पादकता बढ़े, प्रोसेसिंग यूनिट बने, कोल्ड स्टोरेज बने, भण्डारण गृह बने, फिर उनकी पैकेजिंग हो, ट्रांसपोर्टिंग हो, फिर उनकी मार्केटिंग व्यवस्था हो। इतनी व्यवस्था व इतनी सुविधा चार छह महीने में संभव नही है। यह दीर्घावधि की योजना है। इस दिशा में सरकार के कदम उठ रहे हैं। इसके लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकारों के सहयोग की भी जरूरत है क्योंकि बिना राज्य के सहयोग से सरकार किसी भी योजना को अमल में नहीं ला सकती है। दोनों सरकारों के साझेदारी, भागीदारी, समर्पण, निष्ठा से ही किसी योजना के परिणाम निकलते हैं। सरकार किसानों को केवल धान व गेहूँ उगाने पर जोर नहीं दे रही है बल्कि किसानों की आय को दोगुना करने के लिए सरकार मछलीपालन, पशुपालन, मुर्गीपालन इत्यादि पर भी जोर दे रही है जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

अधिक उत्पादन होने से किसानों को उसका उचित दाम नहीं मिल रहा है। किसान इसके विरोध में फसल को नष्ट कर रहे हैं। सरकार इसको रोकने के लिए क्या कदम उठा रही है?

यह सवाल राज्य सरकार से पूछा जाना चाहिए क्योंकि यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। अगर किसी राज्य का किसान अपनी दाल, प्याज, आलू इत्यादि को सड़क पर फेंक रहा है तो वहां के राज्य सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह किसानों की फसलों को खरीदे व उसके लिए गोदामों की व्यवस्था करे। अगर कहीं ऐसा हो तो राज्य सरकार से पूछिए की आप किसानों की फसलों को क्यों नहीं खरीद रहें तथा  गोदामों व कोल्डस्टोरेज की व्यवस्था क्यों नहीं कर रहें है ?  इस सबको बनवाना और जमीन उपलब्ध करवाना राज्य सरकार का काम है। हालांकि केन्द्र सरकार इस पर भी काम कर रही है। 

सरकार के तमाम प्रयास के बावजूद अभी 50प्रतिशत कृषि योग्य भूमि असिंचित है। कृषि योग्य भूमि को सिंचित बनाने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?

सरकार इसके लिए कई बड़े कदम उठा रही है जिसके लिए सरकार ने प्रधानमंत्री सिंचाई योजना भी चला रखी है। इस योजना के तहत हर खेत को पानी, हर हाथ को काम देने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य सरकारों को भी इस योजना को अमल में लाने के लिए निर्देश दिया गया है। इसी के तहत स्प्रिंकलर इरिगेशन, ड्रीप इरिगेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। वन ड्रॉप मोर क्रॉप योजना भी इसी के अंतर्गत आती है। सरकार की सभी योजनाएं एक दूसरे से जुड़ी हुई है। पिछली सरकार को 40 प्रतिशत खेत को पानी देने में 60 साल लगे है और अतिवादी सोच वाले सोचते है कि मोदी जी फूंक दे तो 60 प्रतिशत खेत को तुरंत पानी मिल जाए। जल्द ही पूरे खेत को पानी मिलने लगेगा बस हमें अतिवादी दृष्टि को बदलने की जरूरत है।   

सरकार किसानों को उनके फसल का उचित दाम दिलवाने के लिए क्या रणनीति बना रही है?

किसानों को उनकी फसल का उचित दाम ना मिलना एक समस्या है जो आज पैदा नही हुई है। यह आजादी के पहले की समस्या है। इस पर काबू पाने के लिए थोड़ा समय लगेगा। किसानों की सबसे बड़ी समस्या कृषि जोत का कम होना व भंडारण क्षमता नहीं होना भी है। किसान खेत में अन्न उपजाता है उसे सीधे मंड़ी में औने पौने दाम में बेचता है। विडंबना यह है कि जिस फसल का सीजन होता है उस समय उस फसल की अधिक उपलब्धता होने के कारण उसकी कम कीमत मिलती है। किसानों को चाहिए कि वे अन्न का भंडारण करें, जब उसकी कीमतों में बढोत्तरी हो तब उन्हें मंडियों व बाजारों में बेचें। हालांकि राज्य सरकार इस ओर ध्यान दे रही है और किसानों की फसलों को एमएसपी रेट पर खरीद रही है।

आगामी दो सालों में सरकार किसानों के लिए क्या करने जा रही है?

सरकार आने वाले दो सालों में कृषि की सभी योजनाओं में तेजी लाएगी। योजना की घोषणा करना एक अलग बात है पर उस योजना को धरातल पर पहुंचाना अलग बात है। हमारी सरकार किसी भी योजना को धरातल पर लाकर काम करती है। सरकार इसके लिए बड़े स्तर पर काम कर रही है। इसके लिए किसानों को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। आधुनिक, वैज्ञानिक, यंत्रिकृत कृषि व्यवस्था के तहत ही कृषि का विकास किया जा सकता है। इसलिए सरकार इन विधाओं में बढ़ोत्तरी कर रही है। सरकार की जितनी भी योजनाएं है उसको सभी किसानों तक पहुंचाया जाएगा। किसानों में जागरूकता भी फैलाया जा रहा है क्योंकि बहुत किसानों को यह पता नही होता कि किस योजना का लाभ कैसे लिया जा सकता है। सभी वर्गों को लाभ प्रदान करने के लिए सभी योजनाओं को ब्लाक स्तर, तहसील स्तर तक पहुंचाया जाएगा

कृषि जागरण पत्रिका के माध्यम से आप किसानों से क्या कहना चाहेंगे?

मैं किसानों से कहना चाहता हूं कि सबसे पहले इस देश के किसानों का कायाकल्प होगा। सभी किसान एक वर्ग बनें, जातिप्रथा तोड़े, रोटी के साथ बेटी के लिए भी जातिप्रथा को तोड़े। सभी किसान एक हो जाएं। किसानों से मैं यह भी कहना चाहूंगा कि किसान जागरूक हों और सरकार की जितनी भी योजनाएं है उसकी जानकारी लेने के लिए स्वयं सरकारी कार्यालयों तक जाएं और अगर कोई कमी लगे तो तत्काल  संबंधित अधिकारी को सूचित करें। किसानों को सामूहिक रूप से सामूहिक संघर्ष करना चाहिए। कृषि जोत लगातार कम होती जा रही है इसलिए किसानों को समूहिक रूप से बड़ा जोत बनाकर खेती करना चाहिए। किसान जब तक जागरूक नहीं होगा उसका उद्धार नहीं होगा इसलिए किसानों की जिम्मेदारी है कि वो सरकारी योजनाओं की जानकारी इकट्ठा करे और उसका लाभ ले।


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