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पहाड़ों में कमाल दिखा रहा है पावर वीडर

छोटी जोत वाले पर्वतीय इलाकों में खेत को जोतने वाले पावर वीडर काफी तेजी से लोकप्रिय हो रहे है। पावर वीडर के उपयोग होने से श्रम संसाधनों की कमी भी अब खेती में किसी भी रूप में आड़ों नहीं आ रही है। उत्तराखंड के नैनीताल जिले के पर्वतीय इलाके में ही कृषि विभाग सौ से ज्यादा पावर वीडर को भेज चुका है। पहाड़ के फार्म मशीनरी बैंको में भी पावर वीडर की सबसे ज्यादा डिमांड रही है। साढ़ें पांच हॉर्स पावर और तकरीबन 70 - 80 किलों वजनी पावर वीडर मशीन पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि  के मशीनीकरण में काफी ज्यादा बड़े परिवर्तन लेकर आ रही है। बता दें कि उत्तराखंड के कुमांऊ छह जिलों में 169 फार्म मशीनरी बैंक को स्थापित कर दिया गया है। कृषि अधिकारियों के मुताबिक पर्वतीय इलाकों में ज्यादातर कम ही जोत वाले किसान है। यहां पर सबसे बड़ी समस्या श्रम संसाधनों की है. जिसमें खेत जोतने के लिए कोई भी श्रमिक नहीं मिलते है।

किसानों को मिल रही सब्सिडी

यहां पर फार्म मशीनरी बैंक के तहत गठित समूह करने वाले किसानों को कुल 80 % सब्सिडी भी दी जाती है। लेकिन वही दूसरी ओर अगर कोई किसान निजी रूप से पावर वीडर खरीदता है तो उसे राज्य सरकार  की ओर से 40 से 50 % तक की सब्सिडी मिलती है। तकरीबन 50 हजार रूपये वाले छोटे वीडर की कीमत 36 हजार तक हो सकती है। इसके लिए जरूरी है कि किसान राजस्व विभाग व कृषि विभाग में बतौर किसान पंजीकृत होना चाहिए। देश में कृषि यंत्रीकरण को तेजी से बढ़ावा देने के लिए खेती के अंदर छोटे से छोटे उपकरण तेजी से लोकप्रिय होते जा रहे है। इन सभी को संचालित करने के लिए किसी भी रूप में श्रमिकों की जरूरत नहीं होती है। ग्रास कटिंग मशीन से लेकर कीटनाशक का छिड़काव करने तक के लिए तमाम तरह की मशीनें अपने फार्म मशीनरी बैंकों में रख रहे है। पावर वीडर जैसी मशीनों में भी डीजल व पेट्रोल दोनों ही तरह के विक्लप किसानों के पास मनौजूद है कि वह पावर वीडर को किस तरह से चलाना चाहते है। इनको बानने वाली कंपनियां भी किसानों को काफी सपोर्ट कर रही है जो कि इनके लिए काफी फायदेमंद है।

क्या होता है पावर वीडर

पावर वीडर आमतौर पर एक छोटी सी मशीन होती है जो कि पूरी तरह से खरपतवार को हटाने के लिए प्रयोग की जाती है. इस मशीन को काफी आसानी से इस्तेमाल किया जाता है। इसके संचालन के लिए किसी भी तरह के विशेष प्रशिक्षण की जरूरत नहीं होती है। यह दो छोटे स्ट्रोक इंजन के जरिए संचालित होता है। इस इंजन का उपयोग वीडर के सामने लगे ब्लेडों को घुमाने के लिए किया जाता है, वीडर में इंजन को स्टार्ट करने के लिए रिकॉर्डर स्टार्टर लगे होते है। इंजन चालू होने के बाद मशीन को किसी व्यक्ति के द्वारा धक्का देकर आगे बढानें का कार्य किया जाता है।



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