1. सरकारी योजनाएं

मधुमक्खी पालकों को मिल रहा राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत अनुदान

मधुमक्खी का किसानों की फसलों के उत्पादन बढ़ाने में अहम योगदान रहता है। ये विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों के फूल से पर-परागण का कार्य कर फसल उत्पादन को बढ़ाती है। अगर मधुमक्खी ना हो तो मधु उत्पादन व अनाज उत्पादन हेतु दूसरे देश पर निर्भर होना पड़ेगा. इसके साथ ही एकीकृत मधुमक्खी पालन विभाग केंद्र हरियाणा के कुरूक्षेत्र जिले के रामनगर में खोला गया है। यह मधुमक्खी केंद्र भारत और इजरायल के पेशेवरों की सहायता से हरियाणा सरकार, इजरायल और सिनाडको के संयुक्त अभ्यास का परिणाम है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य किसान एवं छात्रों को मधुमक्खी पालन की उन्नत वैज्ञानिक तकनीकों को प्रदान करना है। इसका सीधा फयदा किसानों को होगा.

अनुदान देकर विभाग दे रहा बढ़ावा

हरियाणा में राष्ट्रीय बागवानी मिशन 40 फीसदी अनुदान मधुमक्खीपालकों को देता है। इस योजना का लाभ 50 सुपर बॉक्स सुपर इनर के साथ किसानों को दिए जाते है। जो किसान वैज्ञानिक तरीकों से खेती करने वाले किसान मधुमक्खी के बॉक्स को अपने खेत में लगवाते है. जिसमे मधुमक्खियां पर-परागण कर फसल की उत्पादक्ता बढ़ती है.

श्रमिक मक्खियां बनाती शहद

बागवानी विभाग अधिकारी अमबाला डॉ हवा सिंह का मानना है कि सभी मधुमक्खियां किसानों के लिए  उपयोगी होती है। उनके मुताबिक प्रत्येक बॉक्स में एक रानी मक्खी होती है और उसके साथ रक्षक फौज भी होती है। उसके बाद श्रमिक मक्खियों की फौज भी अहम कार्य करती है। इसमें कई तरह की निखट्टू मक्खियां भी होती है। ये सारी श्रमिक मक्खियां विभिन्न फूलों से शहद को बनाने का कार्य करती है। इजरायल और इंडिया के वैज्ञानिकों ने इस बारे में अवगत करवाया है कि अगर मधुमक्खी ना हो तो पैदावार 35 प्रतिशत ही होगी। देश की 80 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर करती है, 35 प्रतिशत उत्पादन होने पर हमें दूसरे देशों से अन्न व सब्जियों पर निर्भर होना पड़ता है, इसीलिए मधुमक्खियों का कार्य बेहद ही सराहनीय है।

किशन अग्रवाल, कृषि जागरण

English Summary: Beekeepingers get subsidy under National Horticulture Mission

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