1. खेती-बाड़ी

रजनीगंधा की खेती में रखें इन बातों का ध्यान, होगी अच्छी उपज

रजनीगंधा की खेती से आप अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. आम तौर पर इसको "निशीगंधा" के नाम से भी जाना जाता है. इसे सदाबाहार उगने वाली जड़ी-बूटियों की श्रेणी में रखा गया है. फूल एवं सुगन्ध उद्योग के लिए रजनीगंधा की खेती भारत में बड़े स्तर पर की जाती है. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं.

जलवायु

इसकी खेती के लिए उष्ण तथा उपोषण जलवायु बेहतर है. इसकी सबसे अधिक मांग महानगरों जैसे बंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली व मुम्बई आदि में है.

मिट्टी

इसकी खेती रेतीली और चिकनी मिट्टी में सबसे बेहतर होती है. मिट्टी का पीएच मान अगर 6.5-7.5 तक का है, तो उपज अधिक होने की संभावना है.

खेती की तैयारी

रजनीगंधा की खेती के लिए भूमि की जुताई अच्छे से करें. मिट्टी को भुरभुरा बनाने के बाद उसे समतल कर लें. रोपण के वक्त 10-12 टन रूडी खाद का उपयोग कर सकते हैं.

बीज

बिजाई के लिए रोपण में 45 सेंटीमीटर तक का अंतर रखें. बीजों की बुवाई 5-7 सेंटीमीटर की गहराई में प्रजनन विधी द्वारा की जानी चाहिए.

सिंचाई

इसकी फसल को सप्ताह में एक बार सिंचाई की जरूरत है. मिट्टी और जलवायु की जरूरतों को देखते हुए सिंचाई की अवधी अलग हो सकती है. खरपतवारों को हटाने के लिए समय-समय पर निड़ाई-गुड़ाई का काम करते रहें. इस पौधें को मुख्य तौर पर तना गलने वाली बीमारी से बचाना होता है, ऐसे में खेतों में जल जमाव न होने दें.

तुड़ाई

इसके फूलों के खिलने का समय अगस्त-सितंबर महीना है. तुड़ाई का काम निचले 2-3 फूलों के खिलने के बाद शुरू कर देना चाहिए. डंडियों को तीखे चाकू से काटना चाहिए.  

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English Summary: Tuberose farming is profitable for farmers know more about Tuberose cultivation and market demand

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