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पेंसिल और माचिस की तीलियां बनाने के लिए उपयोग होते हैं ये पेड़, खेती कर कमाएं लाखों का मुनाफा

आज इस लेख मे कुछ ऐसे पेड़ों की जानकारी देने जा रहे हैं जिनका इस्तेमाल माचिस से लेकर फर्निचर तक और दरवाजों से लेकर पेंसिल बनाने के लिए किया जाता है. किसान एक बार खेती कर कमा सकते हैं बंपर मुनाफा...

निशा थापा

बिना पेड़-पौधों के मनुष्य जीवन अधूरा है. पेड़ों से हमें हवा, पानी, फल, लकड़ी, पत्ते, जड़ी- बुटियां आदि बहुत सारी चीजें प्राप्त होती हैं, इसके अलावा पेड़ पर्वावरण से कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करके हमारे लिए ऑक्सीजन छोड़ते हैं. घर में इस्तेमाल होने वाले लकड़ी के फर्निचर, कुर्सियां, टेबल आदि में पेड़ो का ही योगदान है.  कई लोगों के लिए केवल पेड़ ही एक अच्छी आमदनी का जरिया बन रहे हैं.  इन्हीं में से कुछ पेड़ ऐसे हैं जिनसे माचिस, पेंसिलें आदि बनाई जाती हैं. इस लेख के माध्यम से आज हम आपको ऐसे ही पेड़ो की जानकारी देने जा रहे हैं.

पोपलर की लकड़ी बनती हैं माचिस की तीलियां
पोपलर की लकड़ी बनती हैं माचिस की तीलियां

पोपलर की लकड़ी बनती हैं माचिस की तीलियां

आपके मन में बचपन से ही यह सवाल जरूर आया होगा कि आखिर माचिस की तीलियां कौन सी लकड़ी से बनी हैं, दरअसल माचिस की तीलियां एक विशेष पेड़ से बनती हैं, उसका नाम है पोपलर पेड़ और अफ्रीकन ब्लैक वुड पेड़. इसके साथ ही पोपलर की लकड़ी से चॉप स्टिक्स, प्लाईवुड, बक्से आदि बनाए जाते हैं. वर्तमान में इसकी खेती बहुत ही चलन में हैं, ऐसा इसलिए भी है क्योंकि किसान पोपलर की खेतों में सब्जी उत्पादन कर बंपर कमाई कर रहे हैं. पोपलर का पेड़ 5 डिग्री से 45 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी खूब बेहतरीन तरीके से पनपता है, यानि कि इसके पेड़ों में मौसम की मार का कोई असर नहीं पड़ता है. साथ ही किसान इनके खेतों में अदरक, हल्दी, टमाटर, आलू जैसे फसलों की खेती कर सकते हैं. बता दें कि बाजार में एक क्विंटल पोपलर के लकड़ी की कीमत 700 से 800 रुपए है.

देवदार के वृक्ष हिमालयी क्षेत्रों के समीप पाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल पेंसिल बनाने के लिए किया जाता है.
देवदार के वृक्ष हिमालयी क्षेत्रों के समीप पाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल पेंसिल बनाने के लिए किया जाता है.

देवदार की लकड़ियों से बनती हैं पेंसिल

पेंसिल हमें लिखना पड़ना सिखाती है. स्कूल के बच्चों को शुरूआती दिनों में पेंसिल से ही लिखवाया जाता है. इसके अलावा पेंसिल का इस्तेमाल चित्र बनाने के लिए किया जाता है. पेंसिल बनाने के लिए देवदारी की लकड़ी का इस्तेमाल किया होता है. देवदार के वृक्ष हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू- कश्मीर के हिमालय से सटे क्षेत्रों में बड़े पैमाने में पाए जाते हैं. इसके साथ ही देवदार की लकड़ी का उपयोग फर्नीचर, और इसके पत्तों का उपयोग औषधी के तौर पर किया जाता है. इसके अलावा रेड सिडार, टीक और आबनूस की लकड़ी से भी पेंसिल बनाई जाती है.

बबूल वृक्ष

बबूल के पेड़ का कुछ अलग ही महत्व है. पुराने जमाने में लोग बबूल के पेड़ के टहनियों से दंत मंजन किया करते थे. अभी भले ही बबूल की जगह अलग दंत मंजनों ने ले ली है. मगर अभी भी गांव में बड़े बुजुर्ग लोग दंत मंजन के लिए इसका ही इस्तेमाल करते हैं. बबूल के पेड़ की छाल सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक मानी जाती है. बबूल की लकड़ी बहुत ही मजबूत होती है, इसलिए बड़े- बड़े दरवाजों व फर्नीचरों के लिए इसका उपयोग किया जाता है.

यह भी पढ़ें: Top 5 Expensive Tree Wood: 5 ऐसे पेड़ जिसे बेचकर आप बन जाएंगे करोड़पति, जानें खासियत और कीमत

बबूल के पेड़ की टहनियों से किया जाता है दंत मंजन
बबूल के पेड़ की टहनियों से किया जाता है दंत मंजन

खास बात यह कि इन पेड़ों को एक बार उगाकर आप सालों साल इससे लाभ ले सकते हैं, साथ ही पेड़ों से साथ अन्य फसलों की खेती कर आपको अच्छा मुनाफा मिल सकता है. इन पेड़ों की खेती के लिए न ही अधिक पानी की आवश्कता पड़ती है और न ही अधिक देखभाल की.

English Summary: These trees are used for making pencils and matchsticks Published on: 18 December 2022, 12:20 PM IST

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