Farm Activities

आधुनिक तरीके से करें राजमा की इन 6 उन्नत क़िस्मों की खेती

rajma farming

पिछले कुछ सालों से मैदानी क्षेत्र के किसानों में रबी के मौसम में राजमा की खेती करने का चलन काफी बढ़ गया है. हालांकि, राजमा की खेती कितने रकबे में होती है इसके कोई सरकारी आंकड़े उपलब्ध नहीं है. हम आपको राजमा की आधुनिक खेती करने के तरीके और उन्नत किस्मों के बारे में बता रहे हैं.

भूमि की तैयारी

राजमा की खेती के लिए दोमट और हल्की दोमट मिट्टी उत्तम होती है. दरअसल, इस मिट्टी में पानी के निकास की अच्छी व्यवस्था होती है. इसलिए राजमा की अच्छी फसल होती है. बुवाई से पहले खेत को मिट्टी पलटने वाले हल जुताई करना चाहिए. इसके बाद 2 से 3 जुताई कल्टीवेटर से करें. ध्यान रहे बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी होना चाहिए. 

प्रमुख उन्नत किस्में -

पीडीआर 14 - इस किस्म को उदय के नाम से भी जाना जाता है. जिसके दानों का रंग लाल चित्तीदार होता है. यह 125 से 130 दिन में पक जाती है और इससे प्रति हेक्टेयर 30 -35 क्विंटल राजमा पैदा होता है.

मालवीय 137- 110 से 115 में पकने वाली इस किस्म के दानों का रंग लाल होता है. इससे प्रति हेक्टेयर 25 से 30 क्विंटल की पैदावार होती है.

वीएल 63 - यह किस्म 115 से 120 दिनों में पक जाती है. इसके दानों का रंग भूरा चित्तीदार होता है. इससे भी प्रति हेक्टेयर 25 से 30 क्विंटल होती है.

अम्बर - राजमा की यह किस्म 120 से 125 दिनों में पक जाती है. इसके दानों का रंग लाल चित्तीदार होता है. इससे प्रति हेक्टेयर 20 से 25 क्विंटल होती है.

उत्कर्ष- इस किस्म से प्रति हेक्टेयर 20 से 25 क्विंटल की पैदावार होती है. दानों का रंग गहरा चित्तीदार होता है. यह किस्म 130 से 135 दिनों में पक जाती है.

अरुण - इसके दानों का रंग भी गहरा चित्तीदार होता है. यह किस्म 120 से 125 दिनों में पक जाती है. इससे प्रति हेक्टेयर 15 से 18 क्विंटल की पैदावार होती है.

Rajma

बीज की मात्रा-

बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर 120 से 140 किलो बीज की आवश्यकता पड़ती है. कतार से कतार की दूरी 30 से 40 सेंटीमीटर, पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर और पौधे की गहराई 8 से 10 सेंटीमीटर रखें. बुवाई से पहले बीज को उपचारित कर लेना चाहिए.

बुवाई

इसकी बुवाई का सही समय अक्टूबर का तीसरा और चौथा सप्ताह है. वहीं पछेती बुवाई नवंबर के पहले सप्ताह तक होती है लेकिन इससे पैदावार घट जाती है. 

खाद और उर्वरक

राजमा की अच्छी पैदावार के लिए प्रति हेक्टेयर नाइट्रोजन 120 किलोग्राम, फास्फेट 60 किलोग्राम और पोटाश 30 किलोग्राम देना चाहिए. बुवाई के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा यानी 60 किलो देना चाहिए. वहीं शेष आधी मात्रा टाप ड्रेसिंग में दें. 

सिंचाई

इसमें 2 से 3 सिंचाई की जरुरत होती है. पहली सिंचाई बुवाई के चार सप्ताह बाद करना चाहिए.  दूसरी सिंचाई एक महीने बाद की जाती है. राजमा की फसल में हल्की सिंचाई करना चाहिए.

निराई-गुड़ाई

पहली सिंचाई के बाद खेत की निराई और गुड़ाई करना चाहिए. ध्यान रहे निराई के समय पौधे के ऊपर मिट्टी चढ़ा देनी चाहिए. 

फसल कटाई

राजमा की फलियां पकने पर कटाई कर लेना चाहिए. सुखने के बाद फलियां कूटकर बीज निकाल लेते हैं. 



English Summary: rajma new varieties of rajma rabi season farming rajma production

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