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रासायनिक फर्टिलाइजर छोड़िए! देसी गाय का गोबर, बढ़ेगी पैदावार और आमदनी होगी तगड़ी

Cow Dung Fertilizer: अगर आप किसान है और अपने खेतों में रासायनिक उर्वरक का इस्तेमाल कर रहे हैं और फसल से अधिक उपज नहीं मिल रही है, तो इस जैविक खाद को अपनाएं और खेत की मिट्टी को उपजाऊ बनाने के साथ उपज बढ़ाएं कैसे? आगे जानें इस जैविक खाद के बारे में सबकुछ.

KJ Staff
cow dung fertillizer
रासायनिक फर्टिलाइजर छोड़िए और इस खाद को अपनाएं (Image Source-AI generate)

देश के किसान लगातार रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भर होते जा रहे हैं, जिनसे किसानों को शुरुआत में रासायनिक उर्वरकों से उत्पादन में तो बढ़ोतरी हुई, लेकिन लंबे समय तक इनके उपयोग से मिट्टी की सेहत पर गंभीर नुकसान पहुंचा, जिससे खेतों की उर्वरता घट रही है, मित्र कीट खत्म हो रहे हैं और मिट्टी का पीएच असंतुलित हो चुका है और इसका सीधा असर फसल की गुणवत्ता, उपज और किसानों की आमदनी पर पड़ रहा है. ऐसे में किसान अब फिर से गौ आधारित जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं, क्योंकि यह खेत की मिट्टी और इंसानों के लिए भी सुरक्षित मानी जा रही है.

गौ-आधारित खेती से क्या बदवाव होगा?

अगर किसान भाई देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से तैयार जैविक खाद का इस्तेमाल अपने खेतों में करते हैं, तो वह इससे खेतों में बड़ा बदलाव ला सकते हैं. यह सिर्फ रासायनिक उर्वरकों का सस्ता विकल्प है, बल्कि मिट्टी को फिर से जीवंत बनाने में भी अहम भूमिका निभाती है. जैविक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीव सक्रिय होते है, जिससे पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है और फसलों की जड़ें मजबूत होती हैं, जिससे किसानों को भी फसल से अच्छा उत्पादन मिल सकता है.

क्या है घन जीवामृत?

घन जीवामृत एक ठोस जैविक खाद है, जिसे देसी गाय से गोबर और गौमूत्र से तैयार किया जाता है. साथ ही इस खाद को रासायनिक उर्वरकों की तुलना में सस्ता और ज्यादा सुरक्षित विकल्प माना जाता है. घन जीवामृत का सबसे बड़ा किसानों को यह फायदा हो सकता है. यह खेत की मिट्टी के प्राकृतिक स्वरूप को लौटाता है, और लंबे समय तक खेत की सेहत बनाएं रखता है. अगर किसान इस जीवामृत का अपने खेतों में नियमित प्रयोग करते हैं, तो वह खेती का लागत कम करने के साथ फसल से अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं.

घन जीवामृत बनाने की आसान विधि

अगर आप भी घन जीवामृत बनाने की सोच रहे हैं, तो आप इसे घर पर ही आसान तरीकों से तैयार कर सकते है. इसके अलावा घन जीवामृत को बनाने में किसानों को किसी महंगे उपकरण और रसायन की आवश्यकता नहीं होती. आगे जानें सामग्री के बारे में और बनाने की पूरी विधि

सामग्री:

  • 100 किलोग्राम देसी गाय का ताजा गोबर

  • 2 किलोग्राम गुड़

  • 2 किलोग्राम बेसन

  • किसी पुराने पेड़ के नीचे की 1 किलोग्राम मिट्टी

  • 5 लीटर गोमूत्र

बनाने की विधि:

अगर आप घन जीवामृत बना रहे हैं, तो सबसे पहले गोबर को किसी साफ जगह पर फैलाएं. उसके बाद इसमें गुड़, बेसन और पेड़ के नीचे की मिट्टी को अच्छे से मिलाएं. अब इसमें गौमूत्र मिलाकर इसे आटे की तरह गूंथ लें. जब मिश्रण पूरा एकसार हो जाए, तो इसके छोटे-छोटे उपले बना लें. इन उपलों को छायादार स्थान पर सुखाया जाए, ताकि धूप से इसके लाभकारी जीवाणु नष्ट न हों. पूरी तरह सूखने के बाद घन जीवामृत तैयार हो जाता है. इसकी खास बात यह है कि इस जीवामृत को 6 महीने तक बनाकर सुरक्षित रखा जा सकता है.

खेतों में कैसे करें इस्तेमाल?

घन जीवामृत को खेतों में इन दो तरीकों से आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है-

1. खेत की तैयारी के समय:

घन जीवामृत के सूखे उपलों को पीसकर पाउडर का रुप दें. उसके बाद 100 किलोग्राम घन जीवामृत को 250 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर खेत में डाल दें. साथ ही यह ध्यान रखें कि इस खाद के इस्तेमाल के दौरान खेतों में नमी जरुर हो, ताकि सूक्ष्म जीव सक्रिय हो सकें.

2. खड़ी फसल या फलदार पेड़ों में:

दूसरा तरीका यह है कि किसान घन जीवामृत के सूखे उपलों को फसल या पेड़ों के पास 3–4 सेंटीमीटर की दूरी पर रख दें. सिंचाई के साथ ही ये उपले धीरे-धीरे मिट्टी में घुल जाएंगे और पौधों को पोषण देना शुरू कर देंगे, जिससे पौधों की भी बढ़ोतरी भी तेजी से होना शुरु हो जाएगी.

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: chemical fertilizers Use cow dung from indigenous breeds it will increase yields and generate substantial income Published on: 20 January 2026, 02:18 PM IST

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