बिहार सरकार राज्य के किसानों के लिए कई सरकारी योजनाएं चला रही है, जिससे किसानों को कृषि से जुड़ी हर तरह की सहायता प्रदान की जा रही है. वहीं, बिहार के किसानों अब आधुनिक खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं. इसी बदलाव का एक बड़ा उदाहरण है बटन मशरूम की खेती, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है और खास बात यह है कि अब यह खेती केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रही, बल्कि महिलाएं भी बड़े पैमाने पर इसमें भागीदारी निभा रही हैं.
इसके अलावा, राज्य सरकार भी मशरुम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण, सब्सिडी और तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रही है और इससे किसानों को यह फायदा हो रहा है कि वह मशरुम की खेती को नई आधुनिक तरीकों से कर पा रहे हैं.
चलिए आगे इसी क्रम में जानें मशरुम की खेती कैसे करें और क्या सावधानियां बरते-
खाद तैयार करने में सबसे ज्यादा ध्यान जरूरी
अगर आप बटन मशरुम की खेती कर रहे हैं तो इस बात का विशेष रुप से ख्याल रखें कि इस फसल में अहम रोल खाद कंपोस्ट का होता है, लेकिन कई किसान इसमें साधारण गोबर खाद से उगाने की कोशिश करते हैं, जिसमें उन्हें सही उत्पादन नहीं मिल पाता है. ऐसे में किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए कंपोस्ट तैयार करने की वैज्ञानिक विधि अपनानी चाहिए इस प्रकार-
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सूर्य प्रकाश के अनुसार, इसमें भूसा (पुआल), जिप्सम, सरसों की खली, मुर्गी का खाद (लाही) और थोड़ी मात्रा में यूरिया का इस्तेमाल किया जाता है.
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इन सभी सामग्रियों को पानी में भिगोकर 24 घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है, जिसके बाद इन्हें अच्छी तरह मिलाकर कंपोस्ट तैयार किया जाता है.
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इसके अलावा कंपोस्ट में नारियल के छिलके का उपयोग भी किया जाता है, जिससे नमी और हवा का संतुलन बना रहता है. पूरी प्रक्रिया में लगभग 17 से 18 दिन का समय लगता है.
स्पॉन और लेयरिंग का सही तरीका
मशरूम उत्पादन में स्पॉन (बीज) की गुणवत्ता भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है. स्पॉन को कंपोस्ट में सही तरीके से लेयरिंग करके लगाया जाता है. थैलियों में सबसे नीचे कंपोस्ट की परत बिछाई जाती है, उसके बाद स्पॉन डाला जाता है. साथ ही यह प्रक्रिया कई परतों में दोहराई जाती है, जिससे मशरूम का विकास समान रूप से होता है और उत्पादन बढ़ता है.
तापमान और वातावरण का रखें खास ध्यान
बटन मशरूम की खेती के लिए नियंत्रित वातावरण आवश्यक है. इसके लिए एक विशेष कमरे की जरूरत होती है, जो पूरी तरह से एयर कंडीशंड हो. तापमान लगभग 14 डिग्री सेल्सियस के आसपास बनाए रखना जरूरी होता है. इसके अलावा नमी (ह्यूमिडिटी) और वेंटिलेशन का संतुलन भी बनाए रखना चाहिए. यदि तापमान या नमी में थोड़ी भी गड़बड़ी होती है, तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है.
कम लागत में अधिक मुनाफा
विशेषज्ञों के अनुसार, बटन मशरूम की खेती में शुरुआती निवेश थोड़ा अधिक हो सकता है, खासकर यदि आप नियंत्रित वातावरण (एसी रूम) तैयार करते हैं. लेकिन एक बार सेटअप तैयार हो जाने के बाद इससे नियमित और अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. किसान सही तकनीक और प्रबंधन के जरिए किसान हर लॉट में 1 से 2 टन तक उत्पादन हासिल कर सकते हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि की संभावना बढ़ जाएगी.
लेखक: रवीना सिंह
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