मशीनीकरण और प्रौद्योगिकी किसानों की आय बढ़ाने का बेहतर प्रयास: कृषि उपकरण

किसानों की आय को बढाने के लिए वैसे तो हरकोई प्रयास कर रहा है। फिर चाहे सरकारी तंत्र हो या फिर निजी क्षेत्र की कंपनिया हो सभी किसानों की आय को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। लेकिन किसानों की आय बढ़ाने के लिए जरुरी है उनके पास आधुनिक कृषि यंत्रों का होना। जो कंपनियां कृषि के अच्छे कृषि यन्त्र बना रही है, वो थोड़े महंगे होने की वजह से किसान उनको आसानी से नहीं खरीद पाता है। क्योंकि जब भी किसान उस कृषि यंत्र को खरीदने की सोचता है तो उससे पहले अपनी जेब देखता है। वो भी एक दौर था जब किसान कृषि उपकरण का इस्तेमाल करना तो दूर उसके बारे में जानते भी नहीं थे। मौसम चाहे कोई भी हो गर्मी, बरसात या ठंड किसान हर मौसम में खेती को तैयार रहते थे। वहीं आज के इस आधुनिकिकरण के दौर में किसानों के लिए खेती भी अब काफी आसान हो चुकी है। वहीं कृषि की अगर बात करें तो ये एक श्रम साध्य व्यवसाय है। इसके श्रम को आसान बनाने में कृषि मशीनीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका है। कृषि मशीनीकरण कृषि के आधुनिकीकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कृषि यंत्रीकरण न केवल इस प्रकार के बीज, उर्वरक, पौध संरक्षण रसायन और पानी सिंचाई के लिए रूप में विभिन्न आदानों के उपयोग के लिए सक्षम आपूर्ति है यह एक आकर्षक उद्यम खेती बनाकर गरीबी उन्मूलन में मदद करता है।

कृषि मशीनरी के प्रकार

इस बात से तो हम सभी अवगत हैं कि खेती में कई तरह के कार्य होते हैं। कृषि मशीनरी इन सभी प्रकार के कार्यों को आसान बनाने में सक्षम है। इन कृषि यंत्रों की मदद से किसान अपने सभी कार्यों को आसानी से और कम समय में कर सकते हैं। भारत में खेती के अलग-अलग कार्यों के लिए खेती के उपकरण इस्तेमाल किए जाते हैं। जैसे- कर्षण और शक्ति की बात करें तो कई तरह के ट्रेक्टर इसके लिए प्रयोग किए जाते हैं। वहीं जुताई के लिए लगभग 20 तरह के अलग-अलग मशीनों का प्रयोग किया जाता है। रोपण के लिए लगभग 9 तरह के उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। खाद और कीटनाशक के लिए भी उपकरण बनाए गए हैं जिसमें 6 प्रकार के उपकरण शामिल हैं। सिंचाई, उत्पादन को छाँटना, कटाई, कटाई-उपरान्त कार्य, पुआल बनाना, लादना, दोहन व अन्य कार्यों के लिए कई उपकरण बनाए जाते हैं। इन सभी तरह के कृषि यंत्रों से किसानों के काम काफी आसान हो जाता है।

सरकार द्वारा कृषि मशीनरी पर योजनाएं

परंपरागत और पुराने औजारों के स्थान पर नए और विकसित कृषि यंत्रों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नीतियां और कार्यक्रम बनाए गए हैं। इनके कारण किसान ट्रैक्टर, बिजली से चलने वाले जुताई यंत्र, हारवेस्टर्स जैसी नई मशीनों का उपयोग खेती में कर पा रहे हैं। इन यंत्रों को खरीदने में किसानों को सक्षम बनाना, कस्टम किराया सेवाओं की उपलब्धता तथा इन मशीनों के परीक्षण, मूल्यांकन और अनुसंधान और विकास सेवाओं के लिए आवश्यक मानव संसाधन का विकास करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि मशीनों के निर्माण के लिए एक बड़ा औद्योगिक आधार भी विकसित किया गया है। संसाधनों के संरक्षण के लिए उपकरणों को भी किसानों द्वारा अपनाया गया है।

सरकार द्वारा प्रायोजित विभिन्न योजनाओं, जैसे - कृषि का मेक्रो प्रबंधन, तिलहन, दलहन और मक्के के लिये तकनीकी अभियान, बागवानी के लिये प्रौद्योगिकी अभियान, कपास प्रौद्योगिकी अभियान और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अभियान आदि के अंतर्गत किसानों को कृषि के उपकरण और मशीनों को खरीदने के लिये वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

फार्म प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान

किसानों को फार्म मशीनरी के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा देश में कुछ प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान स्थापित की गई है जो किसानों के लिए काफी मददगार है। फार्म  प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थानों (एफएमटी एंड टीआई) को बुदनी (मध्य प्रदेश), हिसार (हरियाणा)गर्लादिन्ने (आंध्र प्रदेश) और बिश्वनाथ चारिआली (असम) में स्थापित किया गया है। इन संस्थानों के पास सालाना 5,600 कर्मियों को कृषि यंत्रीकरण के विभिन्न पहलुओं का प्रशिक्षण देने की क्षमता है। ये संस्थान कृषि मशीनों सहित ट्रैक्टर का भी परीक्षण और उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार करते हैं।  

उत्तरी क्षेत्र फार्म  प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान, हिसार (हरियाणा) के बारे में सूत्रों से पता चला की इस वर्ष 2017-18 में वहां कुल 2933 प्रशिक्षणों का आयोजन किया गया और जिसमें लगभग 50 प्रतिशत से ज्यादा किसानों ने भाग लिया था। प्रशिक्षण में उत्तरी क्षेत्रों से किसानों ने काफी संख्या में भाग लिया।

सरकारी तरीका: 

यदि कोई किसान नया कृषि यन्त्र खरीद ना चाहता है सबसे वो सबसे पहले तो यह सुनिश्चित कर ले कि उसको किस कंपनी का कृषि यन्त्र खरीदना हैं उसके बाद किसान उस कृषि यंत्र परअनुदान की जानकारी के लिए अपने जिले या ब्लाक स्तर के कृषि कार्यालय पर संपर्क करे. वहां से अनुदान की पूरी प्रक्रिया को समझें उसके बाद ही उस कृषि यंत्र को ख़रीदें। यदि कोई भी कृषि अधिकारी जानकारी देने में जरा भी आनाकानी करता है तो इसके लिए जिला स्तर पर कृषि अधिकारीयों से मुलाकात कर किसान अपनी समस्या बता सकते है।किसान को कृषि यंत्रों के विषय में पूरी जानकारी जिला और ब्लाक स्तर कृषि कार्यालय पर आसानी से मिल जाएगी।

सरकार द्वारा कितनी सब्सिडी दी जाती है :

सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी राज्य सरकारों पर निर्भर करती है क्योंकि हर एक राज्य के कृषि विभाग की अलग योजना है जिसके हिसाब से अनुदान दिया जाता है। वैसे ज्यादातर राज्यों में 30 प्रतिशत से 50 प्रतिशत का अनुदान कृषि यंत्रों पर दिया जाता है।

कृषि यंत्र से महिला किसानों को काफी मदद मिल रही हैं देश के कृषि क्षेत्र में महिला किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है।पिछले कुछ वर्षों में महिला किसानों ने कृषि क्षेत्र में सफलताओं के कई उदाहरण भी पेश किए हैं।अगर आंकड़ों की बात करें तो देश के कुल कृषि श्रमिकों की आबादी में करीब 37 प्रतिशत महिलाएं हैं। लेकिन, खेती बाड़ी में उपयोग होने वाले ज्यादातर औजार, उपकरण और मशीनें पुरुषों के लिए ही बनाए जाते हैं। लेकिन अब महिलाओं के अनुसार भी कृषि उपकरण तैयार किए जा रहे हैं जिससे उनको खेती में ज्यादा परेशानियों का सामना ना करना पड़े।

Comments