1. सम्पादकीय

ई-नाम: खेत से आधुनिक मंडी की ओर

देश का किसान समृद्ध स्थिति में है. ऐसा हम मानतेहैं लेकिन इसकी हकीकत कुछ और ही है। कृषि मंडी एक ऐसा स्थान है जहाँ पर किसान अपना पूरा उत्पाद बेचता है। अभी तक किसानों के सामने मंडी ही सबसे बड़ी समस्या रही है। इसके न होने के कारण किसानों को न तो उनकी फसल का सही दाम मिल पाता है और सबसे बड़ी समस्या होती है उत्पाद को बचाने की।

किसान का उत्पाद सही भाव न मिलने के चक्कर में पड़ा-पड़ा सड जाता है और उसका नुकसान किसान को ही उठाना पड़ता है। यदि किसान का उत्पाद सही समय पर मंडी में पहुँच जाए तो किसान को सही लाभ मिल जाता है। सरकार किसानों की मंडी की समस्यां को दूर करने के लिए काफी प्रयास कर रही है। 2014 में सरकार के बदलने पर नई सरकार द्वारा नई योजनाएँ शुरू की गई जिसमें मंडी की स्थिति को सुधारने के लिए ई-नाम की शुरुआत की गई।

इस योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और बिचैलियों को मंडी से हटाने के उद्देश्य से 14 अप्रैल को औपचारिक तौर पर राष्ट्रीय कृषि बाजार पोर्टल (National Agriculture Market e- Nam) की शुरुआत की। इसे ई-मंडी भी कहा गया है। इससे न केवल किसानों को फायदा होगा  बल्कि थोक कारोबार और उपभोक्ताओं को भी इसका लाभ मिलेगा। ई-मंडी प्लेटफॉर्म पर देशभर के किसी भी कोने के थोक कारोबारी गुणवत्तापूर्ण माल खरीद सकेंगे। खरीद-बिक्री में बिचैलियों का हस्तक्षेप खत्म होने से उपभोक्ताओं को कृषि उत्पाद वाजिब दाम पर मिलने का रास्ता साफ होगा।

राष्ट्रीय कृषि बाजार (-नाम

राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) एक पैन-इंडिया इलेक्ट्रॉनिक व्यापार पोर्टल है जो कृषि से संबंधित उपजो के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार का निर्माण करने के लिए मौजूदा ए.पी.एम.सी मंडी का एक प्रसार है। ई-नाम पोर्टल सभी ए.पी.एम.सी से संबंधित सूचना और सेवाओं के लिए एक ही स्थान पर सेवा प्रदान करता है। इसमें अन्य सेवाओं के बीच उपज के आगमन और कीमतों व्यापार प्रस्तावों को खरीदने और बेचने व्यापार प्रस्तावों पर प्रतिक्रिया के लिए प्रावधान शामिल हैं। जब सामग्री लेनदेन (कृषि उपज) मंडी के माध्यम से होना आरंभ होता है तो ऑनलाइन बाजार से लेन-देन संबंधित व्यय और जानकारी कम होती है।

कृषि बाजार को राज्यों द्वारा उनके कृषि-व्यवसाय विनिमय द्वारा संचालित किया जाता है जिसके अंतर्गत राज्य को विभिन्न बाजार क्षेत्रों में बांटा जाता है जिसमें से प्रत्येक का संचालन अलग-अलग कृषि उपज बाजार समिति (ए.पी.एम.सी) जो इसके अपने व्यवसाय विनिमय (शुल्क के साथ) को लागू करता है के द्वारा किया जाता है। बाजारों का यह विखंडन यहां तक कि राज्य के भीतर एक बाजार से दूसरे बाजार में कृषि उपजो के आवागमन तथा कृषि-उत्पाद के अलग-अलग तरह से निपटान में बाधा पहुंचाता है और मंडी शुल्कों के अलग-अलग स्तर किसानों के अनुरूप लाभ के बिना उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढती जाती हैं।

ई-नाम राज्य एवं राष्ट्रीय दोनों ही स्तर पर ऑनलाइन व्यापार मंच का निर्माण करके इन चुनौतियों को ध्यान दिलाता है संपूर्ण एकीकृत बाजारों की प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने के लिए एकरूपता को प्रोत्साहित करता है खरीददारों और विक्रेताओं के बीच की विषम जानकारी को हटाता है तथा वास्तविक मांग एवं आपूर्ति पर आधारित वास्तविक समय मूल्य की खोज को बढ़ावा देता है नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता को बढ़ावा देता है और अपनी उपज की गुणवत्ता वाले अनुरूप मूल्यों एवं ऑनलाइन भुगतान तथा बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद की उपलब्धता के जरिए किसान को राष्ट्रव्यापी बाजार की पहुँच प्राप्त करवाना और उपभोक्ता को अधिक उचित मूल्य पर उत्पाद उपलब्ध करवाना है।

-नाम की आवश्यकता क्यों  

कृषि उपजो के लिए सामान्य राष्ट्रीय बाजार को मुहैया कराने के लिए के लिए ई-नाम का निर्माण करना आवश्यक था। वर्तमान ए.पी.एम.सी विनियमित बाजार यार्ड पहले विक्रय स्थल (अर्थात् जब किसान उपज को फसल की कटाई के बाद बेचने के लिए लाते हैं) से लिए जाने वाले कृषि से संबंधित सामग्रियों के व्यापार को तालुका/तहसील या ज्यादा से ज्यादा जिला स्तर के स्थानीय मंडी तक ही सीमित करता है। एक राज्य के लिए एक ही एकीकृत कृषि बाजार नहीं होता है और उसी राज्य के भीतर किसी एक बाजार क्षेत्र से किसी दूसरे बाजार क्षेत्र में जाने वाली उपज पर लेन-देन शुल्क भी लगता है।

एक ही राज्य के विभिन्न बाजारों में व्यापार के लिए एकाधिक लाइसेंस आवश्यक हैं। ये सभी कृषि अर्थव्यवस्था को अत्यधिक सस्ता और बहुत अधिक महंगा बनाने का कार्य करते हैं जो बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं और जिला एवं राज्य की सीमाओं के पार कृषि उत्पादों की मूल गति को रोकते हैं। ई-नाम बाजारों के विखंडन की इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर पूर्णतया बदलना चाहता है जिसके परिणामस्वरूप अंतिम उपभोक्ता के लिए वित्तीय मध्यस्थता का खर्च व्यर्थ व्यय और मूल्य कम से कम हो सके। इसका निर्माण स्थानीय मंडी की सामर्थ्य पर होता है तथा यह अपनी उपज को राष्ट्रीय स्तर पर पेश करने की अनुमति देता है।

राष्ट्रीय कृषि बाजार कैसे काम करता है 

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय कृषि बाजार का विकास किया जा रहा है। इसके लिए इन्टरनेट आधारित व्यापार पोर्टल विकसित किया गया है जो देश की सभी इच्छुक मंडियों को उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ कृषि उपज मंडी के कर्मचारियों व व्यापारियों के प्रशिक्षण आधारभूत सरंचना आदि के लिए वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है जिससे कृषि उपज मंडी इस व्यवस्था को प्रभावशाली रूप से चला पाने में सक्षम हों।

-नाम के उद्देश्य

विनियमित बाजार में पारदर्शी विक्रय सुविधा और मूल्य की खोज के लिए राष्ट्रीय ई-बाजार मंच प्रारंभ से ही है। अपनी राज्य कृषि विपणन बोर्ड/ए.पी.एम.सी के द्वारा ई-व्यापार के विज्ञापन के लिए इच्छुक राज्य अपनी ए.पी.एम.सी अधिनियमा में तदनुसार उपयुक्त प्रावधानों को पूरा करते हैं।

बाजार यार्ड में भौतिक उपस्थिति या दुकान/ परिसर के कब्जे के किसी पूर्व शर्त के बिना राज्य के अधिकारियों द्वारा व्यापारियों/खरीदारों और कमीशन एजेंटों की लिबरल लाइसेंस। व्यापारी का एक लाइसेंस राज्य भर के सभी बाजारों में मान्य रहेगा।

कृषि उपज की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप और खरीददारों द्वारा सूचित बोली सक्षम करने के लिए प्रत्येक बाजार में परख करने की क्रिया के लिए (गुणवत्ता परीक्षण) मूलभूत सुविधाओ का प्रावधान। सामान्य व्यापार के लिए गुणवतियो को अब तक 90 उपजों के लिए विकसित किया गया है।

बाजार शुल्क एकत्र करने के एक स्तर, अर्थात् किसान के पहले थोक खरीद पर

आने वाले किसानों की सुविधा के लिए मंडी में ही इस सुविधा का उपयोग करने के लिए चयनित मंडी में या नजदीक मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं का प्रावधान। सुश्री नागार्जुन फर्टलाइजर्स और केमिकल्स लिमिटेड रणनीतिक साथी (एस.पी) है, जो विकास परिचालन और मंच का रखरखाव करने के लिए जिम्मेदार है। रणनीतिक साथी की मुख्य भूमिका बहुत ही व्यापक है और इसमें सॉफ्टवेयर बनाना ई-नाम के साथ एकीकृत होने के इच्छुक राज्यों में मंडियों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इसे अनुकूल बनाना और मंच पर चलाना शामिल है।

सफल कार्यान्वयन के लिए राज्य की आवश्यकताएं

बाजार का एकीकरण और ऑनलाइन व्यापार दोनों ही उपलब्ध कराने के लिए यह जरूरी है कि राज्यों के संबंध में योजना के तहत सहायता की मांग करने से पहले (i) एक एकल लाइसेंस जो राज्य भर में मान्य हो (ii) बाजार शुल्क को एक स्तर में एकत्र करना (iii) उत्कृष्ट मूल्य खोज के साधन के रूप में इलेक्ट्रॉनिक नीलामी का प्रावधान। केवल इन तीन पूर्व-पेक्षाओं को पूर्ण करने वाले राज्य/यू.टी इस योजना के अंतर्गत सहयोग के पात्र होंगे। राज्यों को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि सुधार ए.पी.एम.सी अधिनियमों और कानूनों दोनों में उचित और स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार पूरा किया गया है। राज्य विपणन बोर्ड/ए.पी.एम.सी के अलावा ई-नीलामी मंच को सक्षम करना आवश्यक है। राज्यों को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पड़ेगी कि वे मंडियाँ जो ई-नाम के साथ एकीकृत हैं उत्तम ऑनलाइन संयोजकता हार्डवेयर और जांचे गए उपकरणों के लिए प्रावधान बनाती है।

कार्यान्वयन के चरण

ई-मंच से जुड़ने के लिए इच्छुक राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों में चयनित 585 विनियमित थोक बाजारों में ई-नाम को प्रसारित किया जा रहा है। छोटे किसानों का कृषि व्यवसाय सहायता संघ (एस.एफ.ए.सी) ई-नाम का संचालन रणनीतिक साथी (एस.पी) से प्राप्त तकनीकी सहायता के साथ कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में हो रहा है। ई-नाम पर व्यापार के लिए वस्तुओं को जांचने की सुविधा के लिए आम व्यापार योग्य मानकों को 90 उपजो (उपज की गुणवत्ता नियोजक के संचालन के लिए) के लिए विकसित किया गया है।

राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना से किसानों को क्या लाभ

राष्ट्रीय कृषि बाजार को ऐसी व्यवस्था के रूप में विकसित किया गया जिससे की इससे जुड़े हर वर्ग को लाभ मिल सके किसान को राष्ट्रीय कृषि बाजार के माध्यम से कृषि उत्पाद विक्रय में अधिक दाम मिलने की सम्भावना है। स्थानीय व्यापारियों को अपने ही प्रदेश के अन्य भागों में तथा अन्य राज्यों में कृषि उत्पाद खरीदने व बेचने का मौका मिलेगा। थोक व्यापारियों एवं मिल संचालकों को सीधे राष्ट्रीय कृषि बाजार के माध्यम से दूर स्थित मंडियों से कृषि उत्पाद खरीदने का मौका मिलेगा ग्राहकों को कृषि उपज आसानी से उपलब्ध होगी एवं मूल्य स्थिर रहेगा। बड़े पैमाने पर खरीद होने से गुणवत्ता सुनिश्चित होगी तथा बिक्री न होने के कारण उपज खराब नहीं होगी।

-शुरुआत में 24 उपजों जिनमें सेब, आलू, प्याज, हरी मटर, महुआ के फूल. साबुत अरहर,साबुत मूंग, साबुत मसूर, साबुत उड़द, गेंहू, मक्का, चना, बाजरा, जो, ज्वार, धान, अरंडी के बीज, सरसों सोयाबीन, मूंगफली, कपास, जीरा, लाल मिर्च, और हल्दी शामिल है।

-14 अप्रैल 2016 को यह नेटवर्क 8 राज्यों की 21 मंडियों में लागू हुआ और अब तक 250 मंडिया इससे जुड़ चुके है। हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश एवं झारखण्ड को राष्ट्रीय कृषि बाजार से जुड़ने की मंजूरी दे दी है।

-नाम से जुड़ने के लिए शर्ते

ई-नाम के साथ अपने मंडियों को जोड़ने के लिए इच्छुक राज्यों को अपने ए.पी.एम.सी अधिनियम में निम्नलिखित सुधारों को पूरा करना आवश्यक है।

अ) इलेक्ट्रॉनिक व्यापार के लिए विशेष व्यवस्था।

ब) एकल व्यापार लाइसेंस राज्य की सभी मंडियों में व्यापार के लिए वैध है।

स) लेन-देन शुल्क को एक स्तर में एकत्र करना

ई-नाम से जुडी अधिक जानकारी के लिए किसान नीचे दिए न.पर सम्पर्क कर सकते हैं या फिर मेल कर सकते हैं।

टोल फ्री नंबर 1800-270-0224 या फोन नंबर से प्राप्त की जा सकती है। लघु कृषक कृषि व्यापार संघ का टेलीफोन नंबर 011-41060075 और 011-41060076 है।

आप ई-नाम की वेबसाइट www.enam.gov.in से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं याnam@sfac.in पर एस.एफ.ए.सी को लिख सकते हैं।

किस स्तर पर है योजना

ई-नाम मात्र कागजों पर सिमटी एक योजना बनकर रह गई है। जिसका जमीनी स्तर पर किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ है। हमने देश के कई राज्यों की मंडियों में दौरा किया लेकिन कोई एक किसान ऐसा नहीं मिला जिसने की इ-नाम के जरिए अपनी फसल बेचीं हो। यह सिर्फ एक कागजी योजना है। 

आविक शाह, नेशनल कन्वेनर, जय किसान आन्दोलन

इस योजना से किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ है, यहाँ तक कि किसानों को इस योजना के विषय में पूरी तरह से जानकारी भी नहीं है। यह योजना सिर्फ कागजों पर सिमट कर रह गई है।

दीवानचन्द चैधरी, भारतीय किसान यूनियन

राज्य में 5 से 10 प्रतिशत किसानों को ही इस योजना का फायदा मिल रहा है।

बी.वी. पाटिल प्रेसिडेंट, बनाना ग्रोवर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया 

English Summary: E-Name: From Farm to Modern Market

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