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एक नए अध्ययन में भारत को एशिया में एक नया बीज केंद्र माना गया

दक्षिण और दक्षिणपूर्व एशिया के लिए एक्सेस टू सीड्स इंडेक्स की टॉप 10 लिस्‍ट में पहली बार शामिल हुईं चार भारतीय बीज कंपनियां।

वैश्विक और स्‍थानीय बीज उद्योग छोटी जोत वाले किसानों की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए भारत में भारी निवेश कर रहे हैं। इस क्षेत्र की 24 अग्रणी बीज कंपनियों के मूल्यांकन से पता चलता है कि 21 कंपनियां भारत में बीज की बिक्री करती हैं और 18 ने देश में ब्रीडिंग और उत्पादन गतिविधियों में निवेश किया है। तुलनात्मक रूप से, दो अन्‍य प्रमुख क्षेत्रीय बीज केंद्रों में शामिल थाईलैंड में केवल 11 और इंडोनेशिया में 8 कंपनियां ही ब्रीडिंग गतिविधियों में निवेश करती हैं।

हाल ही में आई संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट1 के मुताबिक, दक्षिण और दक्षिणपूर्व एशिया में लगभग 350 मिलियन लोग कुपोषित हैं, पिछले दो वर्षों में इस संख्या में शायद ही कोई बदलाव हुआ है। इस क्षेत्र के लगभग 30% बच्‍चे (भारत में 38%) कुपोषित हैं। छोटी जोत वाले किसान 80% तक खाद्यान्‍न की आपूर्ति करते हैं, इसलिए खाद्य और पोषण सुरक्षा प्राप्त करने के लिए दक्षिण और दक्षिणपूर्व एशिया के 170 मिलियन छोटी जोत वाले किसानों (भारत में 100 मिलियन) को अधिक से अधिक पोषक खाद्यान्‍न पैदा करने में मदद करना बहुत ही महत्‍वपूर्ण है।

एक्सेस टू सीड्स इंडेक्स ने छोटी जोत वाले किसानों की उत्पादकता को बढ़ाने के अपने प्रयासों के तहत दक्षिण एवं दक्षिणपूर्व एशिया में मौजूद बीज कंपनियों की अपनी पहली रैंकिंग प्रकाशित की है। इस लिस्‍ट में पहले नंबर पर थाइलैंड की ईस्‍ट-वेस्‍ट सीड रही। टॉप 10 कंपनियों में चार भारतीय बीज कंपनियों ने जगह बनाई, ये हैं एडवान्‍टा, एक्‍सेनहायवेज, नामधारी सीड्स और नुज़ीवीडु सीड्स। अन्य पांच इस क्षेत्र के बाहर की कंपनियां हैं जो वैश्विक स्तर पर सक्रिय बीज कंपनियां हैं।

एक्‍सेस टू सीड्स इंडेक्‍स के एक्‍जिक्‍यूटिव डायरेक्‍टर ईडो वेरहेगेन ने कहा, ‘एक ओर जहां कई विदेशी बीज कंपनियां भारत में निवेश कर रही हैंवहीं भारत की कंपनियां भी मजबूती के साथ प्रदर्शन कर रही हैं, जिसके चलते भारत इस क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण बीज के विकास और आपूर्ति के लिए खुद को एक बड़ी महाशक्ति के रूप में पेश कर रहा है। हालांकि बहुत से छोटे किसानों तक पहुंचना अभी भी बाकी है।

छोटी जोत वाले किसानों की वरीयता और जरूरतों पर गंभीरता से ध्‍यान देने के चलते नामधारी सीड्स और नुज़ीवीडु सीड्स ने ब्रीडिंग कार्यक्रमों में अधिक अंक प्राप्‍त किए हैं। बीजों के प्रकार और पैकेज साइज़ के विस्‍तृत विकल्‍प पेश करने के साथ एक्‍सेन हाइवेज ने एक मानक तय किया है। एडवांटा ने किसानों के लिए अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम के चलते एक अलग स्‍थान हासिल किया है, जो कि किसी अन्‍य कंपनी के मुकाबले इसके क्षेत्र के अधिक देशों में कार्यरत है।

इसके अलावा, भारत में मौजूद 83% कंपनियां किसी न किसी प्रकार की विस्तार सेवाएं प्रदान करती हैं। भारत में क्षमता निर्माण के कई उदाहरणों में से एक नुज़ीविडु सीड्स भी है, जिसने उत्‍तर प्रदेश सरकार के साथ एमओयू पर हस्‍ताक्षर किए हैं। इसके तहत 25 जिलों में 40,000 किसानों के साथ चावल और मक्का उत्पादन पर सहयोगी विस्तार कार्य किया जाएगा। नामधारी सीड्स की बिजनेस शाखा नामधारी फ्रेश इस बात का एक बेहतर उदाहरण है कि कैसे कोई कंपनी छोटे किसानों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निर्यात बाजारों से जोड़ने का काम कर सकती है। किसानों को उत्‍पाद पैदा करने और फसल को एक निश्चित कीमत पर बेचने के लिए कंपनी इस रिश्‍ते को कॉन्‍ट्रेक्‍ट के रूप में औपचारिक रूप प्रदान करती है।

वर्ल्‍ड बेंचमार्किंग एलायंस द्वारा प्रकाशित, दक्षिण और दक्षिणपूर्व एशिया के लिए एक्‍सेस टू सीड्स इंडेक्‍स सतत विकास लक्ष्‍यों (एसडीजी) की माप के लिए अपनी तरह के पहले बैंचमार्क में से एक है। यह पहल पिछले सितंबर में न्यूयॉर्क में हुई संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान शुरू की गई थी।  एसडीजी पर कॉर्पोरेट के प्रदर्शन को माप और तुलना कर, इसका उद्देश्य निजी क्षेत्र को एसडीजी के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपने प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

अधिक जानकारी के लिए, कृपया एन्‍के वॉन ब्रुगेन से संपर्क करें: avanbruggen@accesstoseeds.org



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