बरसात है भाई जरा बच के

सावन (श्रावस मास)के महीने को सबसे खास माना गया है. इस साल सावन (श्रावस मास) महीने की शुरुआत 27 जुलाई से रही, लेकिन

उदया तिथि यानि 28 थी इसलिए सावन (श्रावस मास)का महीना इसी दिन से शुरू हुआ. इस साल सावन का महीना कई मायनों में खास  रहा, क्योंकि 19 साल बाद एक दुर्लभ संयोग पड़ा. इस साल सावन (श्रावस मास) का महीना 28, 29 नहीं बल्कि पूरे 30 दिनों का था.

और इस मास में जो बरसात शुरू हुई वह अभी तक थमने का नाम नहीं ले रही. देश के कई राज्य पानी में डूबते नजर आये. बरसात अभी भी हो रही है. दिल्ली हो या कोई और जगह, बरसात में भीगना सभी को अच्छा लगता है. लेकिन यही बरसात जब मुसीबत बने तो !

बरसात की पहली फुहारें मौसम को ठंडा जरूर कर देती हैं लेकिन जैसे ही बरसात थमती है और जमीन पर खिली हुई धूप पड़ती है, मौसम में उमस आ जाती है और यही वो समय होता है जब रोगकारक सूक्ष्मजीवों और कीट - मच्छरों आदि की वृद्धि तेजी से होती है और फिर मलेरिया, डेंगू, हैजा, टायफायड, पीलिया और खाज-खुजली जैसे रोग होने की संभावनाएं भी प्रबल हो जाती है। इन सभी रोगों के होने का मुख्य कारण यह है कि बारिश के कारण मौसम में आई नमी, गड्ढों और पोखरों में जमा हुए पानी में बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीव तेजी से पनपते हैं।

ऐसे मौसम में जहाँ हवा में ही बैक्टीरिया और रोगजनित कीटाणु फैल रहे हों, कोई भी बीमार हो सकता है। बारिश हमेशा खुशहाली का पैगाम लेकर आती है, बारिश जहाँ एक ओर हरियाली और सुंदरता लेकर आती है, दूसरी तरफ यही बारिश बीमारियों की झड़ी लगा जाती है। हर तरफ पानी का जमाव, दूषित पेयजल और कीट पतंगों की भरमार कई तरह की बीमारियों को खुला निमंत्रण देते दिखायी देते हैं।

बच्चों के लिए यह मौसम बारिश की बूँदों का मजा देने के लिए आता है, साथ ही बीमारियों की चेतावनी भी लाता है। ऐसे में जरूरत है थोड़ा सचेत रहने की, खान-पान में सावधानियां बरतने की और हमारे निवास के आस-पास साफ सफाई की।

बड़े-बूढों  के अनुसार बरसात में खानपान में हल्का भोजन करना चाहिये और भोजन के साथ में आधा नींबू का रस और अदरख जरूर खाना चाहिये। नींबू और अदरख बरसात समय होने वाली अनेक तकलीफों का निवारण स्वत: ही कर देते है।

दो चम्मच कच्ची सौंफ और 5 ग्राम अदरख एक ग्लास पानी में डालकर उसे इतना उबालें कि एक चौथाई पानी बच जाये। एक दिन में 3-4 बार लेने से पतला दस्त ठीक हो जाता है। लगातार दस्त या डायरिया की शिकायत में कचनार की फल्लियों का चूर्ण (लगभग 3-5 ग्राम) रोगी को दिया जाए तो आराम मिलता है। पातालकोट के आदिवासी भी  चावल को आटे की तरह बारीक पीस लेते हैं और लगभग 250 ग्राम लेकर इसे 1 लीटर पानी में उबालकर पकाते हैं और छानकर स्वादानुसार नमक मिला लेते हैं। इन बड़े-बूढों  के अनुसार इसे बच्चों को 1/2 कप और वयस्कों को 1 कप प्रत्येक घंटे के अंतराल से पिलाने से दस्त बंद हो जाते हैं।

नीम की पत्तियों और छाल का बाहरी उपयोग त्वचा रोगों में लाभदायक होता है। बरसात के मौसम में त्वचा संबंधी कई परेशानियों से निजात पाने के लिए नीम की पत्तियों को पानी में उबाल कर उस पानी से नहाएं। नीम का तेल भी त्वचा रोगों में रामबाण का काम करता है। तुलसी: बारिश में होने वाले कई तरह के बुखारों में ये दवा का काम करती है। तुलसी के पत्तों का पाउडर इलायची के पाउडर के साथ मिलाकर लेने से बुखार में राहत मिलती है।

बरसात के मौसम में श्वसन संबंधी समस्याओं में तुलसी का नियमित उपयोग फायदा करता है। सर्दी-खांसी व जुकाम में तुलसी के पत्ते डालकर बनाई गयी चाय पीने से आराम मिलता है। करेला: बरसात के मौसम में करेले का जूस दाद, खुजली जैसे त्वचा रोगों को दूर करने में मदद करता है। बरसात में अक्सर पेट संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं, ऐसे में करेला काफी लाभदायक रहता है। हल्दी: हल्दी एक एंटीसेप्टिक का काम करती है। यह त्वचा रोगों से निजात दिलाने और घाव के लिए एंटीसेप्टिक की तरह मदद करती है।

बरसात के मौसम में भी कई तरह के इंफेक्शंस से बचने में हल्दी मदद करती है।

मक्का : बरसात में मक्के का सेवन शारीरिक शक्ति को बेहतर बनाता है। मक्का में विटामिन ए, बी2, ई, फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, आयरन, ऑरगेनिक अम्ल, नाइसिन फैट और प्रोटीन पाया जाता है तो बरसात के मौसम में इसका भरपूर फायदा क्यों न उठाया जाए।

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अदरक : अदरक भी हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता और पाचन क्रिया को मजबूत बनाने में मदद करता है। बरसात में भीग जाने पर कई रोग होने की आशंका बनी रहती है, लेकिन अगर अदरक और तुलसी के पत्तों की चाय पी ली जाए तो किसी भी तरह का इंफेक्शन होने का खतरा टाला जा सकता है। इसके अलावा खुले, हल्के और हवादार कपड़े पहनना चाहिए और शरीर को जितना हो सूखा व फ्रेश रखना जरूरी है तथा ये भी ध्यान रखा जाए कि बारिश में बार-बार भीगने की नौबत ना आए ताकि डायरिया से बचा जा सके और अपने घर के आस-पास पानी का ठहराव ना होने दिया जाए ताकि मच्छरों की पैदावार ना हों, थोड़ी सी सावधानी बरती जाए तो आप सब बरसात का भरपूर आनंद ले पाएंगे। ऐसे में हम सब के लिए जरूरी हो जाता है कि बरसात के आनंद के साथ-साथ सेहत की देखरेख पर भी समय दें और रोगों से बचाव के लिए घरेलू उपचारों को अपनाये.

चंद्र मोहन, कृषि जागरण

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