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ऐ खुदा बस एक ख्वाब सच्चा दे दे , अबकी बरस मानसून अच्छा दे दे

मानसून का इंतज़ार तो लोगो के लिए आफत बनता जा रहा है. कही लोग गर्मी से बेहाल होकर मानसून को याद कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर किसानो की जान मानसून में अटकी हुई है. किसानो की माने तो मानसून की बेरुखी के चलते जिले में सूखे जैसे हालात दिखने लगे हैं। मानसून के कारण खेतों में खड़ी खरीफ की फसलें 30 प्रतिशत तक प्रभावित हुई हैं। बारिश की कमी से धान की नर्सरी सूख रही है। किसानों का कहना है कि अगर यही हालात रहे तो खरीफ की फसलें तबाह हो जाएंगी।

वर्षा के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2009 की स्थिति फिर एक बार बनती नजर जा रही है। मई से जून महीने तक लगभग  200 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए लेकिन अब तक एक बार भी ठीक से बरसात नहीं हुई है। सिंचाई  के कृत्रिम साधन खेतों की प्यास नहीं बुझा पा रहे हैं। बिजली की कटौती होने के चलते किसानों नलकूपों से सिचांई नहीं कर पा रहे है। बारिश नहीं हुई तो धान की फसल तो ख़राब होगी ही साथ ही  खरीफ की अन्य फसलें भी नहीं हो सकेंगी।

अगैती मक्का और हरे चारे की फसल सूख गई है. आषाढ़ मानसून की आस में सूखा बीतता नजर आ रहा है। आसमान से बरसती चिलचिलाती आग फसलों को जला रही है। सौंधन गांव के रहने वाले किसान तुलाराम यादव का कहना था कि धान की नर्सरी सूख रही हैं रोपाई तो दूर की बात है। किसान धीरेंद्र यादव के अनुसार हालात वर्ष 2009 के सूखे से भी बदतर बनते जा रहे हैं। यदि एक हफ्ते और बारिश न हुई तो फसलें पूरी तरह चौपट हो जाएंगी।

 छत टपकती है उसके टूटे घर की

फिर भी वो किसान कि दुआ करता है बारिश की



English Summary: Ai khuda just give a dream true, let the rain a good monsoon

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