सफी के जज्बे ने दिलाई उन्हें अलग पहचान

सरकार लगातार किसानों की आय दोगुनी करने की बात कह रही है। इस उद्देश्य से उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर ज़िले के कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर ने ज़िलें में सब्जी की खेती करने वाले किसानों को फसल की बुवाई में फर्बस् मैथेड के इस्तेमाल के लिए जागरुक किया जो कि वास्तव में किसानों की आय दो गुनी करने में मददगार साबित हुई है। इसकी एक मिसाल शाहजहांपुर ज़िले के शाबाज़नगर गांव के मोहम्मद सफी ने प्रस्तुत की है। सफी के पास लगभग तीन एकड़ कृषि योग्य भूमि है। जिस पर सफी पहले लोकल प्रजातियों के बीज के साथ-साथ परंपरागत तरीके से बैंगन की खेती करते थे। जिससे कम आय के कारण वह घर का खर्च बमुश्किल ही चला सकते थे।

कृषि वैज्ञानिकों की सलाह

एक दिन सफी ने कृषि विज्ञान केंद्र जाकर कृषि वैज्ञानिकों से मुलाकात की व उन्नत सब्जी उत्पादन के लिए प्रशिक्षण मांगा। जिसके तहत कृषि वैज्ञानिकों ने उनके खेत पर फर्ब्स मैथेड (रिज्ड बेड प्लांटिंग सिस्टम) द्वारा बैंगन की खेती कर प्रयोग करके दिखाया। इसके अतिरिक्त वैज्ञानिकों ने सफी को इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट का भी प्रशिक्षण दिया। इन सभी प्रयोगों के आधार पर खेती करने से सफी को खेती में अधिक लाभ मिला। जिससे वाकई उन्होंने खेती में न केवल लाभ प्राप्त किया बल्कि और किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। यहीं नहीं सफी समाज में एक अलग पहचान रखते हैं ।

परिणाम

परंपरागत खेती करने पर समी 104 क्विंटल प्रति एकड़ की उपज के साथ 32000 रुपए प्रति एकड़ वार्षिक कमाया करते थे। लेकिन कृषि वैज्ञानिकों की राय के अनुसार सफी ने पूसा हायब्रिड-6 बीज के इस्तेमाल करने पर प्रति एकड़ 170 क्विंटल के साथ 80580 रुपए की शुद्ध आय प्राप्त कर रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के निर्देशों पर चलते हुए सफी पहले से लगबग दो गुनी आय प्राप्त कर रहें हैं।

अन्य किसानों पर प्रभाव

सफी द्वारा खेती से लाभ प्राप्त करने के साथ ही उनके आस पास के गांवों के किसान भी नई पद्धतियों के प्रयोग करने से बैंगन की खेती से अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहें हैं। शाहजहांपुर ज़िले के भवलखेड़ा ब्लाक में ही लगभग 35 प्रतिशत किसान इस पद्धति का प्रयोग कर रहें हैं।



कृषि विज्ञान केंद्र, शाहजहांपुर

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