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Mushroom Girls: मशरूम उत्पादन के लिए किसी ने लांघी चौखट तो किसी ने छोड़ी नौकरी

मुश्किलें हर किसी के जीवन में आती हैं, कुछ टूट जाते हैं, तो कुछ उसे चुनौती समझकर उनका सामना करते हैं. हम आपको मिलवाने जा रहे हैं ऐसी ही कुछ महिलाओं से जिन्होंने कम उम्र में ही लीक से हटकर काम किया और अपनी पहचान बनाई. किसी ने घर की चौखट लांघी, तो किसी ने नौकरी छोड़ आत्मनिर्भर बनने की ठानी. 

दिव्या रावत

उत्तराखंड की यह 'मशरूम लेडी' काफी चर्चा में रही. इनकी सफलता की कहानी को पूरे देश ने जाना. कुछ साल पहले देहरादून की रहने वाली दिव्या ने सौम्या फूड प्राइवेट लि. कंपनी खोली और मशरूम उत्पादन शुरू किया. उन्होंने बटन, ऑएस्टर और मिल्की मशरूम उगाया. लगभग पांच साल में दिव्या को कंपनी से लगभग 15 करोड़ तक का टर्नओवर मिलने लगा. इसी के साथ उनका यह व्यवसाय चल पड़ा.

मशरूम से तैयार किए कई उत्पाद

काराबोर को उंचाइयों पर ले जाने के लिए उन्होंने मलेशिया की एक कंपनी के साथ करार भी किया. इसके तहत मलेशियाई तकनीक से मशरूम उत्पादन को बेहतर बनाए जाने पर काम शुरू किया गया. तकनीक के सफल होने पर मशरूम से बने कई उत्पाद भी तैयार किए गए. इससे स्थानीय संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है. दिव्या का मानना है कि लोगों को आज के दौर के हिसाब से नौकरियों के सीमित अवसर को ध्यान में रखते हुए आत्मनिर्भर होना चाहिए. उन्होंने हिमालयी क्षेत्र की कीड़ा जड़ी का भी उत्पादन अपने लैब में शुरू किया है.

नीतू कुमारी

बिहार की महिलाएं भी अब आगे बढ़ रही हैं. उनका जीवन घर-गृहस्थी के ही इर्द-गिर्द नहीं रह गया है. यहां की महिलाऐं घर के बाहर निकलकर मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक विधि अपनाकर सशक्त बन रही हैं. राज्य के बांका क्षेत्र के गांव झिरवा की नीतू कुमारी ने भी महिला सशक्तीकरण योजना का लाभ उठाते हुए मशरूम उत्पादन किया. अपनी मेहनत से वो सफल रहीं और इसी की वजह से घर बैठे ही सालाना लाखों की कमाई कर रही हैं.

एक कमरे से शुरू हुआ सफलता का सफर

उन्होंने अपने मशरूम उत्पादन व्यवसाय का सफ़र एक कमरे से शुरू किया था. इसके लिए उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण भी लिया. कई क्षेत्रों, जैसे- देवघर, भागलपुर, रांची, सुपौल में भी इनका उत्पाद पहुंच रहा है. इस सफल उत्पादन के लिए नीतू को महिन्द्रा एंड महिन्द्रा कंपनी ने 51 हजार रुपए का कृषि प्रेरणा सम्मान भी दिया. ऐसे ही केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं.

संध्या गोप

झारखंड के पूर्वी सिंहभूमि स्थित सुंदरगांव में रहने वाली संध्या गोप शिक्षित हैं. उन्होंने कई स्कूल और स्वयंसेवी संस्थाओं में काम भी किया और उसी दौरान उन्होंने नौकरी छोड़, अपना व्यवसाय शुरू करने का सोचा. उन्होंने मशरूम उत्पादन करने के लिए प्रशिक्षण भी लिया और पहले छोटे स्तर पर उत्पादन का ट्रायल भी लिया. उसके बाद सफल होने पर उन्होंने इसका विस्तार करते हुए बड़े पैमाने पर उत्पादन किया और वह सफल भी हुईं. बस वहीं से उनकी गाड़ी चल पड़ी और वह इस क्षेत्र में आ गयीं.

कुछ यूं हुई शुरुआत...

शुरुआत में संध्या ने 200 ग्राम मशरूम के बीज लगाए और उनसे लगभग 250 रुपये की कमाई की. धीरे-धीरे उत्पादन के साथ आमदनी भी बढ़ी. संध्या महीने में लगभग 25 से 30 हजार रुपये तक की आमदनी कर लेती हैं. मशरूम उत्पादन में पहचान बना चुकी संध्या ने बताया कि ऑएस्टर और बटन के लिए जाड़े के मौसम में सितंबर से लेकर मार्च तक का महीना काफी उपयुक्त होता है. इसी प्रकार दूधिया मशरूम के उत्पादन के लिए गर्मी में अप्रैल से लेकर सितंबर तक का समय अच्छा होता है. इस हिसाब से मशरूम का उत्पादन सालभर किया जा सकता है.

बाजार में है मशरूम की मांग

इसके पौष्टिक तत्वों की वजह से बाजार में इसकी मांग इन दिनों काफी है. ऐसे में अगर आप भी इसका उत्पादन करने के बारे में सोच रहे हैं तो आपके लिए यह मुनाफ़े का सौदा साबित हो सकता है.

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English Summary: divya rawat and two more women farmers are earning huge profits from mushroom cultivation

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