फ्री इन्टरनेट पाकर डिजिटल हो रही ग्रामीण महिलाऐं

गूगल और टाटा ट्रस्ट ने मिलकर काफ़ी पहले इंटरनेट साथी स्कीम की शुरुआत की थी. अब इसका  असर  सतह पर दिख रहा है. गांव की वैसी महिलाएं जिन्होंने पढ़ाई नहीं की वो अब इंटरनेट में दक्ष हैं और वो गांव के दूसरे लोगों को इंटरनेट के बारे में बता रही हैं.

झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 20 किलोमीटर दूर लोधमा गांव में हमने ऐसे ही कुछ महिला इंटरनेट साथियों से बातचीत करके ये जानने की कोशिश की है कि डिजिटल लिटरेसी में इस स्कीम का कितना योगदान है. 

सुजाता देवी इनमें से एक हैं जिन्हें लगभग छह महीने पहले ये भी पता नहीं था की इंटरनेट पर कैसे काम किया जाता है और इसे कैसे  यूज कर सकते हैं.  क्या होता है. लेकिन अब आलम ये है की वो इंटरनेट से सीख कर कई नए काम कर रही हैं. चाहे फ्लिपकार्ट से सामान ऑर्डर करना हो या विडीओ कॉलिंग करना हो. इन सब में अब वो दक्ष हैं. हमने उनसे बातचीत की और इस दौरान उन्होंने हमें बताया कि पहले ये सब पहाड़ जैसा लगता था पर अब सबकुछ बदल चुका है और internet सबसे आसान चीज़ लगती है.

सुजाता देवी ना सिर्फ़ खुद इंटरनेट सीख कर इसे रोज़मर्रा की जरूरतें पूरी कर रही हैं, बल्कि वो सैकड़ों लोगों को वो मोबाइल और इंटरनेट की शिक्षा भी दे रही हैं. सुजाता देवी के अलावा ऐसी हज़ारों महिलाएं हैं जो गूगल-टाटा ट्रस्ट के इंटरनेट साथी प्रोग्राम से जुड़ी हैं और इससे फ़ायदा उठा रही हैं.

हमने खास तौर पर कुछ ऐसी महिलाओं से बातचीत की है जिन्हें इंग्लिश नहीं आती फिर भी वो इंटरनेट आसानी से यूज कर रही हैं. हालांकि इंटरनेट पर हिंदी कॉन्टेंट की कमी होने की वजह से इन्हें परेशानी ज़रूर होती है. कई महिलाओं से हमने बातचीत की तो उन्होंने बताया की इंटरनेट पर हिंदी में ज्यादा चीजें होतीं तो उनके लिए अच्छा होता.

इंटरनेट साथी की वजह से इंटरनेट के बारे में जानकारी रखने वाली महिला पूनम देवी ने बताया कि इस प्रोग्राम की वजह से अब सरकारी स्कीम की जानकारियां मिलती हैं. उन्होंने उज्जवला योजना का उदाहरण दिया और बताया कि इंटरनेट आने से पहले तक उन्हें या उनके गांव में किसी को इस स्कीम के बारे में न तो जानकारी थी और न ही किसी ने इस योजना का फायदा उठाया. लेकिन अब उज्जवला योजना से एलपीजी कनेक्शन लगवाया है और यह उन्होंने इंटरनेट से जान कर किया है.

डिजिटल इंडिया का सपना तब तक पूरा नहीं हो सकता जब भारत में ग्रामीण स्तर पर डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा न दिया जाए. हमने लोधमा में न सिर्फ इंटरनेट साथियों से बातचीत की है, बल्कि वहां की आम महिलाएं जिन्हें इंटरनेट साथियों ने इंटरनेट की जानकारी दी है उनसे भी बातचीत की. उनमे से कई के पास फिलहाल स्मार्टफोन नहीं है, लेकिन उन्हें इंटरनेट की समझ है और घर के मोबाइल से ही सरकारी स्कीम का पता लगती हैं.  

क्या है इंटरनेट साथी प्रोग्राम?

इंटरनेट साथी गूगल और टाटा ट्रस्ट का ज्वाइंट प्रोग्राम है जिसकी शुरुआत 2015 में की गई है. यह डिजिटल साक्षरता का प्रोग्राम है. इसके तहत भारत के गांव में महिलाओं को मोबाइल और इंटरनेट की बकायदा ट्रेनिंग दी जाती है. इंटरनेट साथी गांव की दूसरी महिलाओं को मोबाइल और इंटरनेट की ट्रेनिंग देती हैं. गूगल के मुताबिक इंटरनेट साथी प्रोग्राम देश के 13 राज्यों के लगभग 1 लाख 35 हजार गांव में चलाया जा रहा है. कंपनी का दावा है कि इसके तहत 13.3 लाख महिलाओं को फायदा मिल रहा है और आगे इसका दायरा और भी बढ़ाने की तैयारी है.

गूगल इंडिया इंटरनेट साथी प्रोग्राम चीफ नेहा बड़जात्या ने कहा है, ‘सभी भारतीय तक इंटोरनेट पहुंचाना गूगल का मिशन है. इस मिशन में इंटरनेट साथी एक अहम प्रोग्राम है और इससे ग्रामीण इलाकों में जेंडर गैप को ठीक करने में फायदेमंद होगा. पुरुष और महिला इंटरनेट यूजर्स के अनुपात की बात करें तो कंपनी के मुताबिक यह 2015 में 10 में से 1 का था जो अब बढ़ कर 10 में से 3 हो गया है.’

गूगल के मुताबिक गूगल और टाटा ट्रस्ट के इस प्रोग्राम से 13.5 लाख महिलाएं फायदा उठा रही हैं. 36 हजार इंटरनेट साथियों की मदद से लोगों को इंटरनेट की जानकारी दी जा रही है. कंपनी का प्लान देश भर के 3 लाख गांव तक पहुंचना है.

इंटरनेट साथियों  ने हमें बताया है कि इससे स्वास्थ्य, कृषि और सरकारी योजनाओं सहित शिक्षा की सरल जानकारी भारत के गांव में महिलाओं की जिंदगी में बदलाव ला रही है.

इंटरनेट साथी प्रोग्राम के तहत ग्रामीण इलाकों को चुना जाता है इसके बाद वाहां की कुछ महिला को इंटनेट साथी के लिए सेलेक्ट किया जाता है. सेलेक्शन के बाद उन्हें इंटरनेट की बेसिक ट्रेनिंग दी जाती है. इसके लिए उन्हें स्मार्टफोन, टैबलेट और डेटा कनेक्शन भी दिया जाता है. इंटनेट साथी को पूरी तरह ट्रेनिंग देने के बाद गांव की दूसरी महिलाओं को मोबाइल और इंटरेट की शिक्षा देने की जिम्मेदारी दी जाती है. इसके लिए इंटरनेट साथी को एक गांव से दूसरे गांव भी जाने की जरूरत होती है ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को इसकी जानकारी दी जा सके. 

सूत्र : आज तक 

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