भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली के साथ मिलकर विश्व जल दिवस 2026 का आयोजन अत्यंत उत्साह के साथ किया. कार्यक्रम का विषय “जल और लैंगिक समानता” था, जिसमें सतत जल प्रबंधन के महत्व तथा जल संसाधनों के उपयोग में लैंगिक समानता की महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष बल दिया गया.
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. अनुप दास, निदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने की. अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि जल का प्रभावी प्रबंधन जलवायु परिवर्तन की परिस्थितियों में कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने सूक्ष्म सिंचाई एवं रेज्ड बेड खेती जैसी तकनीकों को अपनाने पर बल दिया, जिससे जल उपयोग दक्षता में सुधार हो सके.
इसके अतिरिक्त उन्होंने फसल विविधीकरण, विशेषकर मोटे अनाज (मिलेट्स) एवं दलहनों के प्रोत्साहन को जल-संरक्षण एवं जलवायु अनुकूल कृषि के लिए आवश्यक बताया. उन्होंने उन्नत तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान एवं पद्धतियों को भी समाहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया.
कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान (IWMI) के कंट्री रिप्रेजेंटेटिव डॉ. गोपाल कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे. उन्होंने अपने संबोधन में उभरती जल चुनौतियों से निपटने के लिए नवाचारी एवं सामुदायिक-आधारित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया तथा जल के समान एवं कुशल उपयोग को बढ़ावा देने हेतु संस्थागत सहयोग के महत्व को रेखांकित किया.
इससे पूर्व स्वागत भाषण डॉ. पी.सी. चंद्रन, प्रधान वैज्ञानिक द्वारा दिया गया, जिसमें उन्होंने पशुपालन में जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे सतत कृषि, उत्पादकता वृद्धि एवं ग्रामीण पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती से जोड़ा. डॉ. आशुतोष उपाध्याय, प्रमुख, भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग ने सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली, प्रक्षेत्र में जल प्रबंधन तकनीकों एवं वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने पर जोर दिया. वहीं डॉ. कमल शर्मा, प्रमुख, पशुधन एवं मात्स्यिकी प्रबंधन प्रभाग ने पशुपालन एवं मत्स्य पालन प्रणालियों में समेकित जल प्रबंधन रणनीतियों को अपनाने की आवश्यकता बताई. डॉ. शिवेंद्र कुमार, प्रोफेसर, मत्स्य महाविद्यालय, ढोली ने सतत जलीय कृषि पद्धतियों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने पर प्रकाश डाला.
डॉ. अजय कुमार, प्रधान वैज्ञानिक ने संसाधन-कुशल तकनीकों को अपनाने एवं जल के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति किसानों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया.
तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न विषयों पर व्याख्यान प्रस्तुत किए गए. डॉ. संतोष एस. माली ने सौर ऊर्जा आधारित जल प्रबंधन तकनीकों एवं उनकी उपयोगिता पर चर्चा की. डॉ. राकेश कुमार ने धान-परती क्षेत्रों में जल प्रबंधन के कुशल उपायों पर अपने अनुभव साझा किए. डॉ. आरती कुमारी ने सेंसर-आधारित जल प्रबंधन प्रणाली पर प्रकाश डालते हुए भविष्य की उन्नत कृषि प्रणालियों में आधुनिक तकनीकों के एकीकरण की आवश्यकता बताई.
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण किसान–वैज्ञानिक संवाद सत्र रहा, जिसमें किसानों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए खेती की समस्याओं एवं उनके व्यावहारिक समाधान पर विशेषज्ञों से चर्चा की. उन्नत तकनीकों के प्रसार हेतु किसानों के बीच जल पंप, स्वर्ण मिश्रण, दूध केन तथा सूखा सहिष्णु किस्म ‘स्वर्ण श्रेया’ जैसे कृषि आदान वितरित किए गए. यह कार्यक्रम भैंस सुधार नेटवर्क परियोजना एवं पशु आनुवंशिक संसाधन परियोजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति उप योजना के तहत समर्थित था.
इसके अतिरिक्त किसानों को समेकित कृषि प्रणाली, दाबीय सिंचाई प्रणाली, सौर ऊर्जा इकाई आदि का अवलोकन कराया गया, जिससे उन्हें सतत एवं संसाधन-कुशल कृषि पद्धतियों की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई. कार्यक्रम के दौरान अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान “वॉटर इनोवेशन हैकाथॉन 2026” का फ्लायर भी जारी किया गया.
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ डॉ. आरती कुमारी द्वारा किया गया. संस्थान के मीडिया सदस्य सचिव उमेश कुमार मिश्र ने बताया कि इस कार्यक्रम में लगभग 140 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें गया एवं अररिया जिलों से लगभग 80 किसान शामिल थे.
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