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हमारी कोशिश कम भूमि में अधिक उत्पादन ले किसान : एस.के. मल्होत्रा

कृषि एक ऐसा क्षेत्र है जिसके ऊपर इस पूरे संसार की रोटी निर्भर करती है. यदि किसान अनाज उगाना बंद कर दे तो शायद इस संसार में एक महामारी फ़ैल जाए. ये तो आप जानते ही हैं कि विश्व के अधिकतर देशों में बड़े पैमाने पर खेती होती है, जिनमें से भारत भी एक है. भारत में सभी तरह की फसलें उगाई जाती हैं.

भारत में चावल, गेहूं, मक्का के अलावा और भी बागवानी फसलों का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है जिसके चलते देश की जनता का पेट भरा जाता है. साथ ही साथ दूसरे देशों में एक्सपोर्ट भी किया जाता है. यह सब तभी सम्भव है जब हमारे पास आधुनिक कृषि तकनीकियाँ, काम करने के तरीके है और आधुनिक कृषि यंत्र हैं. कृषि की इन सफलताओं के पीछे हमारे कृषि वैज्ञानिको और अधिकारियों का बहुत बड़ा योगदान है.

डॉ. एस.के.मल्होत्रा एक ऐसी ही शख्सियत है जिन्होंने किसानों की सेवा को ही सर्वधर्म मानकर उनके लिए कार्य करना बेहतर समझा. वो भारत सरकार के कृषि मंत्रालय में बतौर कृषि आयुक्त अपनी सेवाए दे रहे हैं. वो भारत ही नहीं वरन अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कृषि का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. भारत में कृषि की मौजूदा परिस्थितियों और इस खरीफ सीजन के आंकड़ों के विषय में उनसे जानने की कोशिश की.

इसके लिए भारत सरकार के कृषि आयुक्त डॉ.एस.के. मल्होत्रा से बातचीत की पेश है कुछ मौजूदा अंश:

डॉ.एस.के मल्होत्रा बताते हैं कि भारत में जिस तरीके से तेजी के साथ कृषि विकास हो रहा है और उत्पादन दर बढ़ रही है. इससे हमें उम्मीद है कि देश में खाद्दानों की आपूर्ति में और अधिक इजाफा होगा. इस साल का फसल वर्ष भी हमारे लिए अच्छा रहा है. इस सीजन में हमने 1065 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल फसलों के अंतर्गत  रहा. यह पिछले वर्ष 1070 लाख हेक्टेयर था. यह पिछले साल के मुकाबले 5 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल कम है. लेकिन इतना कमी और बढ़ोतरी होती रहती है. क्योंकि हमारा पिछले 5 सालों का औसत उत्पादन 1058 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल रहा है. तो अभी तक के आंकड़े औसत से ज्यादा ही है. गन्ना और कपास में कुछ बढ़ोतरी हुयी है.

इस साल कपास में 20 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में बुवाई हुई है. जबकि गन्ने का रकबा पिछले साल के मुकाबले 7 लाख हेक्टेयर बढ़ा है. वही दूसरी और इस बार धान में कुछ कमी आयी है. पिछले साल यह आंकड़ा 381 लाख हेक्टेयर था जबकि इस खरीफ सीजन में यह 300 लाख हेक्टेयर रह गया है. दालों में भी इस बार 142 लाख हेक्टेयर रहा है जबकि पिछले साल यह 148 लाख हेक्टेयर था जबकि दालों का हमारा औसत 105 लाख हेक्टेयर हेक्टेयर होता है. दलहनी फसलों में अरहर में थोड़ी कमी आई है जबकि उड़द बीन की 7 लाख हेक्टेयर है. धान का एरिया भी थोडा कम है. लेकिन इसमें चिंता की कोई बात नहीं क्योंकि चावल में हमेशा हमारा उत्पादन हमेशा ही सरप्लस रहा है.  दलहन में भी कुछ दालों का उत्पादन घटा है तो कुछ का बढ़ा है. दलहन में अभी हम आत्मनिर्भरता की और अग्रसर है. क्योंकि हमने 24 मीट्रिक टन दलहन की आवश्यकता होती है जबकि पिछले साल का उत्पादन लगभग 23 लाख मीट्रिक टन का है.

डॉ. मल्होत्रा कहते हैं कि मैं कहना चाहूँगा कि हमारे किसानों को सभी फसलों की हाइब्रिड वैरायटी अपनाने की जरुरत है . इसी के साथ किसानों को चाहिए कि वो कृषि की आधुनिक तकनीकों को अपनाएं  जिससे की उनको अधिक और अच्छा फसल उत्पादन मिल सके. ऐसे इलाके जहाँ पर पानी की कमी है. उनमें किसानों को माइक्रो इरीगेशन सिस्टम अपनाना चाहिए और हाइब्रिड फसलों को अपनाए. इससे फसल उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों को बेहतर फसल मिलेगी. किसान ऐसे इलाकों में फसल बदल-बदल कर लगाए इससे उनको अधिक फायदा मिलेगा. फिलहाल भारत में 9.7 हेक्टेयर एरिया कवर किया जा चुका और अगले 3-4 सालों में 10 लाख हेक्टेयर एरिया माइक्रो इरीगेशन सिस्टम से कवर करने का लक्ष्य है. इस बार हमने लक्ष्य कुछ बढ़ाए है.जिससे पैदावार में और अधिक इजाफा होगा. हमारी कोशिश है कि किसान कम भूमि में अधिक उत्पादन ले सके. 

किसानों के लिए प्लानिग: डॉ. एस.के मल्होत्रा कहते हैं कि किसानों को अच्छी फसल के लिए प्लानिंग पर ध्यान देना बहुत जरुरी है. यदि किसान प्लानिंग से कार्य करेंगे तो उनको अधिक फायदा होगा. किसानों को चाहिए की यदि खरीफ सीजन समाप्ति की ओर है तो उनको पहले से ही अगली फसल के लिए पहले से तैयारी करके रखे कि किस समय पर उनको बुवाई, बिजाई,  कौन सा उर्वरक, माइक्रो न्यूट्रीएन्ट, आर्गेनिक मेन्योर इस्तेमाल करे. किस समय पानी की कितनी मात्रा उनको देनी है. यदि किसान इस तरह से पूरी प्रणाली पहले से ही बनाकर चलेंगे तो इससे किसानों का फायदा होगा और उनको खेती में आने वाली समस्याओं से निपटने में भी कोई दिक्कत नहीं होगी. किसानों को यह पहले से चाहिए होता है कि साइल हेल्थ कार्ड के आधार पर मिटटी की जांच कराने के बाद वो खाद और उर्वरक इस्तेमाल करें.

अभी हमारे सामने जो सबसे बड़ी चुनौती है वो तिलहन वाली फसलों की है. क्योंकि तिलहन का उत्पादन हमारे पास पर्याप्त मात्रा में नही है. इसके लिए मूंगफली, सूरजमुखी जैसी फसलों पर ध्यान देने की आवश्यकता है. क्योंकि अभी हम बड़ी मात्रा में खाद्य तेलों का कर रहे हैं. यह बहुत बड़ा गैप है इसको भरने में अभी समय लगेगा.  इसलिए मै किसान भाईयों को कहूँगा की पूरी तरह से अपनी प्लानिंग पर ध्यान दे आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग करे. सबसे जरुरी कि अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र के संपर्क में रहे और वैज्ञानिकों से समय-समय पर जानकारी लेते रहे.

- इमरान खान 

 

 



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