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दालें आयात करना हमारे लिए शर्म की बात, अब भारत दालों का निर्यातक बनेगा– शिवराज सिंह चौहान
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“बीज से बाज़ार तक”– दलहन मिशन में पूरी वैल्यू चेन पर सरकार की नज़र-शिवराज सिंह चौहान
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क्लस्टर मॉडल, बीज ग्राम और 1,000 दाल मिलें– दलहन आत्मनिर्भरता के लिए शिवराज सिंह ने बताई रूपरेखा
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समझौतों के बावजूद भारत के किसान के हितों पर ज़रा सी भी आंच नहीं आने दी जाएगी- शिवराज सिंह
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संकल्पबद्ध किसानों की ओर से प्रधानमंत्री को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने दिया धन्यवाद
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शिवराज सिंह चौहान ने किया शोध से लेकर किसान तक की कड़ी को जोड़ने वाले अत्याधुनिक FLRP कैंपस का उद्घाटन
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राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन पर संवाद में केंद्र और राज्यों के कृषि मंत्री, म.प्र. के मुख्यमंत्री और वैज्ञानिक एवं किसान भी हुए शामिल
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अमलाहा में दिनभर चला मंथन, प्रगतिशील किसानों, FPO, बीज कंपनियों और मिलर्स की सीधी भागीदारी, दाल से प्रोटीन वैल्यू एडिशन तक पर फोकस
मध्य प्रदेश के सीहोर ज़िले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (FLRP) से आज देश की दलहन नीति और किसान–केंद्रित कृषि विमर्श का नया अध्याय जुड़ा और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में देशव्यापी दलहन क्रांति का आगाज़ हुआ. यहाँ आयोजित राष्ट्रीय दलहन परामर्श एवं रणनीति बैठक में एक ही मंच पर केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान के साथ ही केंद्रीय राज्य मंत्री तथा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, ओडिशा के उपमुख्यमंत्री, कई राज्यों के कृषि मंत्री, शीर्ष वैज्ञानिक, ICAR–ICARDA के प्रतिनिधि, प्रगतिशील किसान, FPO, बीज और दाल मिल प्रतिनिधि जुटे– और संदेश साफ़ था: दलहन में आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप अब खेतों के बीच से तय होगा, दिल्ली के फाइलों के कमरों से नहीं.
भारत की दलहन नीति और किसान हितों के मोर्चे पर एक साथ दो बड़ी घोषणाएँ
एक तरफ अमलाहा (सीहोर) में खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (FLRP) से ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ का रोडमैप तय हुआ, तो दूसरी तरफ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष की आशंकाओं को ख़ारिज करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि दालें आयात करना हमारे लिए शर्म की बात है, अब भारत दालों का निर्यातक बनेगा और हालिया अंतरराष्ट्रीय समझौतों के बावजूद भारत के किसान के हितों पर ज़रा सी भी आंच नहीं आने दी जाएगी.
किसानों की ओर से प्रधानमंत्री को धन्यवाद, विपक्ष पर करारा प्रहार
केंद्रीय कृषि मंत्री ने स्पष्ट कहा कि विपक्ष का “देश बेच दिया, किसान बेच दिए, किसान बर्बाद हो जाएंगे” वाला नैरेटिव आज के तथ्य सामने आने के बाद टिक नहीं सकता. उन्होंने कहा कि यह अपने आप में एक ऐतिहासिक और अद्भुत समझौता है जिसमें भारत की प्रगति और विकास के नए द्वार खुलेंगे, निर्यात बढ़ेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और किसान की आय भी बढ़ेगी, क्योंकि हमारे मसाले निर्यात होंगे, चावल हमारा इन देशों में कितना जाता है, उसका निर्यात बढ़ेगा, हमारे डेयरी के उत्पाद सुरक्षित रहे हैं और इसलिए भारत के किसानों को इससे बहुत फायदा है. उन्होंने मंच से कहा कि इस ऐतिहासिक समझौते के लिए मैं प्रधानमंत्री का, भारत के किसानों की तरफ से– हम सब कृषि मंत्री यहाँ खड़े हैं– हम हृदय से अभिनंदन करते हैं, उनका स्वागत करते हैं, उनको धन्यवाद देते हैं कि उनके नेतृत्व में हमारे किसानों के हित सर्वथा सुरक्षित रहे हैं. प्रत्येक किसान भारत का आज नरेंद्र मोदी को बधाई दे रहा है, धन्यवाद दे रहा है और हम सभी उनके आभारी हैं कि किसानों के हितों को सुरक्षित रखा गया है. किसानों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए बहुत–बहुत धन्यवाद प्रधानमंत्री .
अमलाहा से दलहन आत्मनिर्भर भारत की हुंकार
‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ की राष्ट्रीय बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि आप समझ सकते हैं कि पूरा हिंदुस्तान आज अमलाहा में इकट्ठा हो गया है. शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि विकसित भारत के लिए आत्मनिर्भर भारत बनाना आवश्यक है और उसी कड़ी में दलहन में आत्मनिर्भरता एक बड़ा लक्ष्य है. प्रधानमंत्री का संकल्प है, दलहन में भी भारत आत्मनिर्भर बने, दालें बाहर से नहीं मंगाएँगे, बल्कि कल ऐसी स्थिति आए कि हम दालों का निर्यात करेंगे. इसके लिए उन्होंने ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ बनाया है. आज उसी मिशन की राष्ट्रीय बैठक यहाँ की गई है.
केंद्र–राज्य साझेदारी का भरोसा
चौहान ने म.प्र. के मुख्यमंत्री को इस वर्ष को “कृषक कल्याण वर्ष” घोषित करने के लिए बधाई देते हुए कहा कि भारत सरकार, मध्य प्रदेश सरकार के इस निर्णय में पूरी तरह से कदम से कदम, कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करेगी, ताकि प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाई जा सके, फसलों का उत्पादन बढ़े और वैल्यू एडिशन के नए अवसर तैयार हों. उन्होंने यह भी कहा कि सभी राज्यों के कृषि मंत्री अपने–अपने राज्यों में भी हम सब मिलकर अलग–अलग रोडमैप बनाएंगे, ताकि प्रत्येक राज्य की ज़रूरतों के अनुरूप दलहन मिशन को आगे बढ़ाया जा सके.
विपक्ष पर वार: “किसान बर्बाद हो जाएगा” की अफ़वाहें झूठी साबित
भारत–अमेरिका समझौते को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने विपक्ष को कठोर शब्दों में घेरा. उन्होंने कहा कि हमारा विपक्ष हाय–तौबा मचा रहा था कि अमेरिका के साथ ऐसा समझौता हो जाएगा जिसमें भारत का किसान तबाह हो जाएगा, बर्बाद हो जाएगा, लुट जाएगा. ऐसे आरोप लगाए गए कि शर्म आती है कहते हुए. उन्होंने याद दिलाया कि यह वही नरेंद्र मोदी हैं, जिन्होंने कहा था “देश नहीं झुकने दूँगा” और यह भी कहा था कि चाहे कितनी बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़े, किसानों के हितों की रक्षा करेंगे. अभी जो समझौता हुआ है USA के साथ, इसके पहले 27 देशों के साथ यूरोपियन यूनियन के, और उसके पहले जो FTA हुए हैं, आज के समझौते ने तो बता दिया है कि देश के और किसानों के हित पूरी तरह से सुरक्षित रखे गए हैं.
कृषि और डेयरी पर स्पष्ट सुरक्षा: “ये उत्पाद अमेरिका से नहीं आएँगे”
किसानों की मुख्य चिंता पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि वह केवल किसानों के पक्ष की चर्चा करेंगे. हमारे प्रमुख अनाज मक्का, बड़ा हल्ला मचाया जा रहा था कि आ जाएगा– बिल्कुल नहीं आएगा. मक्का, गेहूँ, चावल, सोयाबीन, पोल्ट्री, दूध, पनीर, इथेनॉल, तंबाकू, कई सब्जियाँ और उसके अलावा कृषि और डेयरी उत्पाद कई तरह के पूरी तरह से सुरक्षित रखे गए हैं. उन्होंने कहा कि इन उत्पादों पर भारत का बाजार भारत के किसानों के लिए सुरक्षित है; अमेरिका से न तो मक्का आएगा, न गेहूँ, न चावल, न सोया, न पोल्ट्री उत्पाद, न दूध, न पनीर, न इथेनॉल, न तंबाकू और न ही कई संवेदनशील सब्जियाँ. उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका से नहीं आएँगे, भारत के हितों का पूरी तरह से संरक्षण किया गया है.
निर्यात के नए अवसर: बासमती, मसाले और टेक्सटाइल को बढ़त
चौहान ने कहा कि इस समझौते से देश के अन्य क्षेत्रों को भी लाभ होगा, विशेष रूप से हमारे निर्यातकों, MSME और युवाओं को. उन्होंने कहा कि भारतीय सामानों पर जो परंपरागत शुल्क था, वह घटकर लगभग 18 प्रतिशत हो जाएगा, जिससे टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक, रबर उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल, होम डेकोर, हस्तशिल्प और चुनिंदा मशीनरी जैसे क्षेत्रों में विशाल बाजार और अवसर मिलेंगे. उन्होंने बताया कि जेनेरिक दवाओं, रत्नों, हीरों, विमान के पुर्जों और कई तरह के सामान पर शुल्क घटकर शून्य हो जाएगा, जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा और ‘Make in India’ को मजबूती मिलेगी.
कृषि के संदर्भ में उन्होंने कहा कि बासमती चावल और मसालों को विशेष लाभ होगा; हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश और पंजाब में बासमती उगाने वाले किसानों के लिए 18% टैरिफ वाले बाजार में नए अवसर खुलेंगे. उन्होंने उल्लेख किया कि पहले लगभग 63,000 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था, जो इस समझौते से और बढ़ने की संभावना है, और टेक्सटाइल निर्यात बढ़ने से कपास उत्पादक किसानों को भी फायदा होगा.
दलहन के संदर्भ में सख्त संदेश: “दालें विदेश से मंगाना आनंद नहीं, शर्म की बात”
दलहन की स्थिति पर बोलते हुए चौहान ने साफ कहा कि दालों का आयात भारत के लिए सम्मान की बात नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने तय किया है कि “दलहन का उत्पादन बढ़ना चाहिए. अभी दालें हमको मंगानी पड़ती हैं बाहर से… दाल हमें विदेशों से मंगानी पड़े तो ये हमारे लिए आनंद का विषय नहीं है, शर्म की बात है. उन्होंने म.प्र. के किसानों को बधाई देते हुए कहा कि आज भी दलहन के उत्पादन में म.प्र. नंबर वन है देश में, लेकिन साथ ही चेताया कि दलहन का क्षेत्र घट रहा है, जिसे बढ़ाने की आवश्यकता है. उन्होंने माना कि किसान वही फसल बोता है, जिसमें अधिक फायदा हो– गेहूँ में होगा तो गेहूँ बोएँगे और चना में होने लगे तो चना बोएँगे, इसलिए दलहन फसलों की उत्पादकता और लाभ दोनों बढ़ाने पर ज़ोर दिया जा रहा है.
किसान को उचित मूल्य मिले, यह हम सुनिश्चित करेंगे
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बीज से लेकर बाज़ार तक की पूरी व्यवस्था पर सरकार का फोकस है. अच्छा उत्पादन होने पर किसान को उचित मूल्य मिले, यह हम सुनिश्चित करेंगे. उन्होंने बताया कि क्लस्टर स्तर पर दाल मिल लगाने को प्रोत्साहन दिया जाएगा और दाल मिल स्थापित करने पर भारत सरकार ₹25 लाख तक की सब्सिडी देगी, ताकि जहाँ दाल का उत्पादन होगा, वहीं उसकी प्रोसेसिंग और बिक्री हो और किसानों को वैल्यू एडिशन का सीधा लाभ मिल सके. चौहान ने कहा कि इस मिशन के तहत देशभर में 1,000 दाल मिलें खोली जाएँगी, जिनमें से 55 दाल मिलें मध्य प्रदेश के अलग-अलग क्लस्टरों में स्थापित की जाएँगी, जिससे प्रदेश के किसानों को विशेष लाभ मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
कोई भी बीज अब दिल्ली में रिलीज़ नहीं होगा
बीज सुधार और वितरण की नई व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हम एक फैसला कर रहे हैं– कोई भी बीज अब दिल्ली में रिलीज़ नहीं होगा, अलग-अलग प्रदेशों में जाकर किसान के बीच बीज रिलीज़ करेंगे. उन्होंने बताया कि क्लस्टर मॉडल के ज़रिए खेती को मजबूती दी जाएगी, किसानों को जोड़कर संगठित रूप से उत्पादन बढ़ाया जाएगा और हर किसान को पूरा सहयोग मिलेगा. क्लस्टर में आने वाले किसानों को बीज किट दी जाएगी और आदर्श खेती के लिए एक हेक्टेयर पर ₹10,000 की सहायता दी जाएगी, ताकि अच्छे बीज, बेहतर तकनीक और पर्याप्त वित्तीय सहयोग के साथ दलहन उत्पादन को नई ऊँचाई तक पहुँचाया जा सके.
उन्होंने अमलाहा स्थित संस्थान, ICARDA और ICAR के शोध कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि मसूर, चना, उड़द, बटरा, मूंग आदि की उत्पादकता बढ़ाने, जल्दी पकने वाली किस्में विकसित करने, उन्नत बीज तैयार करने और रोग–मुक्त फसलें उगाने पर काम युद्धस्तर पर चल रहा है, ताकि किसान को दलहन बोने पर ज़्यादा फायदा हो.
अमलाहा से निकला संदेश– किसान हित सुरक्षित, दलहन में आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त
अमलाहा में हुई इस राष्ट्रीय बैठक के माध्यम से शिवराज सिंह चौहान ने दो स्पष्ट राजनीतिक–नीतिगत संदेश दिए– पहला, अंतरराष्ट्रीय समझौतों के बावजूद भारत के किसानों के हितों पर आंच नहीं आने दी जाएगी, और दूसरा, दलहन में आत्मनिर्भरता को केवल नारा नहीं, बल्कि वैज्ञानिक शोध, नीति, MSP, बीज सुधार और बाजार के माध्यम से ज़मीन पर उतारा जाएगा. उन्होंने कहा कि विपक्ष का डर फैलाने वाला अभियान आज तथ्यों के सामने कमजोर पड़ गया है और देश के किसान देख रहे हैं कि उनके हितों की रक्षा करते हुए ही भारत आगे बढ़ रहा है. अमलाहा से निकले इस संदेश के साथ, अब दलहन आत्मनिर्भरता मिशन और तेज़ी से आगे बढ़ेगा और भारत को दालों के मामले में आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में यह बैठक एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी.
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