News

दालों का बफर स्टाक बना सरकार के लिए मुसीबत

दालों की आसमान छूती कीमतें आम लोगों को परेशान करती रही हैं। पिछले कई सालों से उपभोक्ताओं के साथ सरकार के लिए दालें सिरदर्द बन गई हैं। वहीं,  बफर स्टॉक बनाने का फैसला सरकारी खजाने पर अब भारी पड़ने लगा है। राज्यों के असहयोग के चलते केंद्र की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इसी वजह से केंद्र सरकार ने राज्यों के सामने सस्ती से सस्ती दरों पर दालें बेचने की पेशकश की है।

दरअसल, बफर स्टॉक में आयात की हुई दालें खराब होने के कगार पर पहुंच गई हैं। दलहन फसलों का भंडारण एक समय तक ही किया जा सकता है। उसके बाद उनके खराब होने की आशंका बढ़ जाती है। बफर स्टॉक में फिलहाल लगभग चार लाख टन आयातित दालें पड़ी हुई हैं। इनमें सबसे ज्यादा डेढ़ लाख टन से अधिक अरहर दाल है, जबकि बाकी मसूर, चना और उड़द की दालें हैं।

सूत्रों के मुताबिक अपने बफर स्टॉक में पड़ी-पड़ी दालें खराब होने के मद्देनजर खाद्य मंत्रलय उन्हें राज्यों को बेचना चाहता है। मगर राज्यों ने आयातित दालों की खरीद में कोई रुचि नहीं दिखाई है। बफर स्टॉक में कुल 19.91 लाख टन दालों की खरीद हो चुकी है। लेकिन इसमें से केवल 1.31 लाख टन दालें ही बेची जा सकी हैं। बाकी दालों के खरीदार नहीं हैं।

सरकार इन दालों को हर हाल में जैसे तैसे बेचकर फारिग होना चाहती है। इसके लिए मई के दूसरे सप्ताह में दालों की नीलामी किए जाने की संभावना है। इसमें न्यूनतम मूल्य निर्धारित किए जा सकते हैं। इसके ऊपर बोली लगाने वाले राज्यों को दालें बेची जा सकती हैं। लेकिन सूत्रों का कहना है कि इन दालों को बेचने के लिए कई तरह की रियायतों की घोषणा की जा सकती है।



Share your comments


Subscribe to newsletter

Sign up with your email to get updates about the most important stories directly into your inbox

Just in