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चना मसूर और मटर के सुरक्षा ऐसे करें

कृषि विज्ञान केन्द्र पन्ना के डॉ. वी.एस. किरार वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. आर. के जायसवाल वैज्ञानिक एवं डॉ. आर.पी. सिंह वैज्ञानिक द्वारा विगत दिवस गांव सकतपुरा वि. खण्ड पन्ना में दलहनी फसलो के विपुल उत्पादन पर कृषक संगोष्ठी में तकनीकी सलाह दी गयी.

संगोष्ठी में वैज्ञानिको ने रबी, दलहनी फसलो चना, मसूर, एवं मटर (बटरी) की उन्नत किस्मों एवं उनकी विशेषताओ, जैव उर्वरक एवं फफूदनाशक दवा के महत्व एवं उपयोगिता से अवगत कराया. राइजोबियम एवं स्फुर घोलक जीवाणु कल्चर का उपयोग तथा रसायनिक उर्वरको की बचत करते है और ट्राइकोडर्मा एवं स्यूडोमोनास फ्ल्यूरोसेन्स जैविक फफूद रासायनिक दवाओं का अच्छा और सस्ता विकल्प है.

वर्तमान में दलहनी फसलो में चने की इल्ली की समस्या आ सकती है यह इल्ली शुरू में पत्तियों को खाती है और बाद में फूल एवं फलियो को नुकसान पहुचाती है. इसके नियंत्रण के लिये खेत में टी आकार की 12-15 खूटियां प्रति एकड़ लगायें. इल्ली की शुरू की अवस्था में जैविक फफूद एन.पी.वी. 100 मिली. प्रति एकड़ का छिडकाव करें और इल्ली का अधिक प्रकोप होने पर इन्डोक्साकार्व 14.5 एस. पी. 125 ग्राम या इमामेक्टिन बेन्जोइट दवा 800 ग्राम प्रति एकड़ 200 ली. पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें.

दलहनी फसलो में उकठा, कालर रॉट एवं सूखा जड सडन रोग प्रमुख है. इनकी रोकथाम हेतु फसल चक्र, प्रतिरोधी किस्मो का चुनाव, बीजोपचार आदि कार्य करें. खडी फसल में यह रोग आने पर 40-45 दिन में एक सिंचाई कर 2 कि. ग्राम ट्राइकोडर्मा 50 कि. ग्रा. गोबर खाद में मिलाकर भुरकाव करें या स्यूडोमोनास फ्ल्यूरोसेस 2 ली. प्रति एकड़ 200 ली. पानी में घोलकर छिडकाव करें. मसूर में माहू कीट की रोकथाम हेतु इमिडाक्लोप्रिड 100 मिली. या डायमेथियोट 400 मिली. प्रति एकड़ 200 ली. पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें संगोष्ठी में किसानो की गेहू एवं सरसो सम्वन्धी समस्याओ पर भी तकनीकी सलाह दी गयी.

अधिक जानकारी के लिए केवीके पन्ना से मेल पर संपर्क करें
E-mail : kvkpanna@rediffmail.com

English Summary: To protect the lentils and peas, do so

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