जापान में खिला दुनिया का सबसे बड़ा फूल

किसी से प्यार का इजहार करना हो या फिर किसी को मुबारक बाद देनी हो, अमूमन हर स्थिति में फूल ही हैं जिनसे आप अपनी भावनाओं को प्रकट कर सकते हैं। कोई भी मौका क्यों न हो फूलों की बानगी हर मौके को खुशनुमा बनाने के साथ-साथ सुगंधित और आकर्षित बना देती है। वहीं कई ऐसे मौके भी होते हैं जब लोग अद्भुत नजारे को देखते रह जाते हैं। जी हां, प्रकृति ने एक बार फिर पूरी दुनिया को अचरज में डाल दिया है। जापान की राजधानी टोक्यो में हाल ही में यह नजारा देखने को मिला जब दुनिया का सबसे बड़ा फूल एमार्फोफैलस टिटैनियम खिला जिसे देखने के लिए सैलाब उमड़ पड़ा। इसे खिलने में पूरे पांच साल का वक्त लगा है।

आमतौर पर लोग ऐसे फूल पसंद करते हैं जिन्हें वो आसानी से अपने हाथ में पकड़ सकें पर प्रकृति में ऐसे फूल भी मौजूद हैं जो औसत इंसानी लंबाई से कहीं बड़े हैं। बड़ी मुश्किल से खिलने वाला छः फीट का यह फूल जापान के जिंदई बाटेनिकल गार्डन में खिला है। इसे दुनिया के सबसे पुराने व सबसे बड़े फूल की प्रजाति होने का दर्जा दिया जा रहा है।

एमार्फोफैलस टिटैनियम के बारे में कुछ तथ्य:

  1. एमार्फोफैलस टिटैनियम आरेशिया प्रजाति का फूल है।
  2. एमार्फोफैलस टिटैनियम भी टाइटन एरम के रूप में जाना जाता है जो एक शाखा रहित पुष्पक्रम है।
  3. 1878, में इतालवी वनस्पतिशास्त्री ओडोआर्डो बकारी ने सबसे पहले इस फूल की वैज्ञानिक व्याख्या की थी।
  4. 1889 में यह फूल पहली बार लंदन के रायल बाटेनिक गार्डन में लगाया गया था।
  5. इस फूल की खुशबू सड़े हुए मांस की भांति आती है। यही वजह है कि इसे मृत फूल भी कहा जाता है।
  6. टाइटन एरम एक ऐसा पौधा है जो अपने 45 वर्ष के आयुकाल में सिर्फ 3-4 बार ही पूरी तरह से खिलता है।
  7. टोक्यो के जिंदाई बाटेनिकल गार्डन में लगे इस मृत पौधे की एक झलक पाने और विजिटर्स द्वारा सराहे जाने के लिए सिर्फ 4 दिन के लिए गार्डन के गेट खोले गए थे।
  8. वैसे तो यह मुख्य रूप से इंडोनेशिया में पाया जाता है। यह फूल सुमात्रा द्वीप का मूल निवासी है जो समुद्र तट की उपरी सतह से 100-150 मीटर की दूरी पर खिलता है।
  9. फूल की लंबाई 2 मीटर होती है यानि कि 56 फीट। यह फूल 3 मीटर तक खिल सकता है अर्थात् 10 फीट।
  10. इस फूल से सड़े हुए मांस की दुर्गंध आती है। जब यह फूल खिलता है तब परागण इसकी ओर आकर्षित हुए बिना नहीं रहते।
  11. प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संघ (आईयूसीएन) ने बड़े पैमाने पर वनों की कटाई की वजह से इस फूल की प्रजाति को खतरा होने के कारण इसे संवेदनशील प्रजातियों में सूचीबद्ध किया गया है। 

 

 

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