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विश्व बैंक का कहना है कि कमोडिटी खपत में दीर्घकालिक विकास दर कमजोर रहने कि उम्मीद है।

धातुओं और खाद्य पदार्थों की मांग में वृद्धि अगले 10 वर्षों में  धीमी रहने कि संभावना है। विश्व बैंक के अनुसार यह धातु और खाद्य उत्पादकों के लिए बुरी खबर है।विश्व बैंक का कहना है कि कृषि वस्तुओं की मांग में वैश्विक मंदी 2018-27 के दौरान 2010-16 के बाद वैश्विक वित्तीय संकट के मुकाबले औसतन 2.8 प्रतिशत से घटकर 1.8 प्रतिशत हो जाएगी। इस पर्याप्त गिरावट से कृषि उत्पादों की कीमतों में भारी कमी हो सकती हैं। चावल और गेहूं के दाम भी गिर जाएंगे।

पहले ऐसा लग रहा था भारतीय कृषि उत्पादों कि कीमतों का अंतराष्ट्रिय बाज़ार में संरक्षण इसका मुख्य कारण है परंतु नहीं इस स्थिति का मुख्य कारण ग्राहकों कि आमदनी बढ़ने से ग्राहक साधारण अऩाज से  ज्यादा हाई प्रोटीन और वसा कि मात्रा वाले खाघ पदार्थ को खरीदना पसंद करते है। उनकी प्राथमिकता बदल गई है। अब वह पहले कि तरह अनाज नहीं अपितु हाई प्रोटीन और वसा कि मात्रा वाले खाघ पदार्थ को खरीदना पसंद करते है। 

धातु खपत के विकास में गिरावट का अनुमान लगाया गया है कि वैश्विक मांग में वृद्धि 2010-2016 के दौरान 4.2 प्रतिशत की औसत से 2018-27  के दौरान 2.8 प्रतिशत की औसत से गिरने की उम्मीद है। चीन के विकास में मंदी और निवेश से इसकी चाल में अधिक खपत इसका मुख्य कारण है।विश्व बैंक कि रिपोर्ट के अनुसार एल्यूमीनियम और तांबे कि मांगो में वृद्धि उच्च मांग के उच्च आय को दर्शाता है

भारत के संबंध में ऊर्जा की कीमतों में कहा गया है कि 2018-27 के दौरान ऊर्जा की वैश्विक मांग 2010-16 के मुकाबले थोड़ी अधिक होगी। यह कहता है कि वैश्विक कच्चे तेल की खपत में वृद्धि स्थिर रहेगी, जबकि कोयले की मांग में कमी आएगी।

 

भानु प्रताप
कृषि जागरण



English Summary: The World Bank says that long-term growth rate in commodity consumption is expected to be weak.

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