कोरोना काल में ऐसा बहुत कुछ हो रहा है, जिसकी वजह से कृषि जगत को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है. एक तो पहले से ही सब्जियों समेत फलों की मांग धड़ाम से नीचे गिर चुकी है, जिसकी वजह से किसान भाई इसे औने-पौने दाम पर बेचने पर मजबूर हो चुके हैं. उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा है कि इस मुसीबत के समय में क्या किया और अब खबर आई है कि एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव को कोरोना की वजह से बंद कर दिया गया है. वहीं, लासलगांव के इतर पिंपलगाव बसवंत, नासिक, कलवण, चांदवड, देवला, सटाणा, नामपुर, निफाड, विंचूर, येवला, मनमाड, अभोणा एवं उमराणे में भी सब्जियों समेत फलों की मंडियों को कोरोना के बढ़ते कहर को ध्यान में रखते हुए बंद कर दिया गया है. इस तरह का फैसला इसलिए लिया गया है, ताकि कोरोना के बढ़ते कहर को पर ब्रेक लगाई जा सके.
किसानों को लगा बड़ा झटका
मंडियों को बंद करने की वजह से किसानों को बड़ा झटका लगा है. अब ऐसे में उन्हें अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. उन्हें अपने उत्पादों को बेचने के लिए अब सहज ही मंडियों उपलब्ध नहीं हो पाएंगी. पहले किसान भाइयों को बड़ी ही आसानी से मंडियां प्राप्त हो जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. ऐसे में किसानों को यह समझ नहीं आ रहा है कि क्या किया जाए.
आम जनता भी होंगी बेहाल
वहीं, एशिया की सबसे बड़ी मंडी लासलगांव के बंद होने के बाद से न महज किसानों को ही समस्या हुई है, बल्कि आम जनता को भी काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. बताया जा रहा है कि मंडियों के बंद होने के बाद प्याज की कीमत अपने चरम पर पहुंच जाएंगी, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा. हालांकि, पहले से ही किसान भाई औने पौने दाम पर प्याज बेचने पर मजबूर हैं, चूंकि कोरोना के कहर को ध्यान में रखते हुए सब्जियों समेत कई चीजों की मांग में कमी आ गई है.
कृषि के लिए छूट महज नाम के लिए है
इसके साथ ही किसान भाइयों ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान कृषि क्षेत्र को महज कहने के लिए ही छूट प्रदान की गई है. पहले से ही मंडियों को कोरोना के कहर को ध्यान में रखते हुए बंद कर दिया गया है, जिसकी वजह से सब्जियों समेत फलों की आवक कम हो चुकी है. उधर, बाजार में भी ग्राहकों की तरफ से मांग कम हो चुकी है. ऐसी स्थिति में बची खुची सब्जियों को भी बड़े ही कम दाम पर किसान भाई बेचने पर मबजूर हो चुके हैं.
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