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गेहूं की खेती में यह एक बात जरूर ध्यान रखना...

गेहूं का पौधा अपना 90% पोषण सूरज की रोशनी से खुद बनाता है, 10%  पोषण ही मिट्टी से बनाता है. अगर किसान गेहूं बिजाई की नई विधि, जिसे अंग्रेजी में सिस्टम ऑफ वीहट इंटेन्सिफिकेशन (एसडब्लूआई) के नाम से जाना जाता है,  को अपनाएं तो औसत पैदावार बढ़ सकती है। इस विधि की शुरुआत दक्षिण भारत में धान से हुई थी। धान के बाद गन्ना, गेहूं, सरसों और अरहर में भी इसके अच्छे नतीजे मिले। 

विशेषज्ञों के अनुसार, गेहूं का पौधा अपना 90% पोषण खुद सूरज की रोशनी से बनाता है। केवल 10% पोषण मिट्टी से लेता है। इसलिए अच्छी फसल के लिए जरूरी है कि हर पत्ते को सूरज की पूरी रोशनी मिले। अगर फसल ज्यादा घनी बो दी जाए जिसमें सब पत्तों पर सूरज की रोशनी ही पड़े तो पैदावार प्रभावित होती है। इसलिए हर फसल, किस्म को इस तरह बोएं कि पूरी बढ़ जाने पर भी हर पौधे के हर पत्ते को पूरी रोशनी मिल सके। 

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गेहूं के लिए आदर्श तरीका ये है कि इसकी बिजाई वर्गाकार रूप में 8 से 10 ईंच की दूरी पर की जाए यानि लाइन से लाइन और एक लाइन में पौधे से पौधे की दूरी 8 से 10 ईंच रहे। अगर किसी खेत की मिट्‌टी कम उपजाऊ है तो उसमें ये दूरी थोड़ी कम की जा सकती है। इसी तरह ज्यादा उपजाऊ जमीन में ये दूरी बढ़ाई भी जा सकती है। पौधों के बीच दूरी बढ़ने पर जहां पत्ते अधिक पोषण बना पाएंगे वहीं जड़ों को भी फैलने के लिए ज्यादा जगह मिलेगी। 

बिजाई बीज-खाद ड्रिल के साथ करें। इसमें बीज 4 से 6 सेंटीमीटर गहराई पर डालें। ड्रिल के साथ बीज और खाद सारे खेत में एक-समान पड़ते हैं।  जिस खेत में धान की कटाई कंबाइन से करवाई गई हो, वहां हैपी सीडर के साथ गेहूं की बुवाई करनी चाहिए। हैप्पी सीडर तकनीक से बुआई करने पर बीज 3.5 से 5 सेमी. गहराई पर बोएं।  कम खरपतवार वाले खेत में गेहूं की बिजाई जीरो-टिल ड्रिल मशीन से करनी चाहिए। इसमें डीजल और पानी कम लगता है और गेहूं पीली नहीं पड़ती। 



English Summary: Take care of this one thing in wheat farming ...

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