फसल को सूखा से बचाने के लिए गोदावरी और पेन्ना नदी को जोड़ने का काम शुरू

आंध्र प्रदेश के किसान हर वर्ष सूखा की समस्या से परेशान होते हैं. अब उनकी इस समस्या का हल राज्य सरकार ने निकाल लिया है. सोमवार को सूबे के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने गोदावरी तथा पेन्ना नदियों को जोड़ने की आधारशिला रखी. इस योजना से आंध्र प्रदेश को सूखा मुक्त राज्य बनाने में मदद  मिलेगी. इसके साथ ही राज्य के प्रत्येक क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की व्यवस्था भी दुरुस्त करने में यह योजना काफी कारगर रहेगी.

इन दोनों नदियों को जोड़ने वाली 'पट्टीसीमा लिफ्ट सिंचाई परियोजना' के पहले चरण की शुरुआत सीएम नायडू ने कल नकिरेकल्लू जिले में की. उन्होंने वहाँ एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कृष्णा और गोदावरी नदियों को पहले ही जोड़ा जा चुका है. अब गोदावरी और पेन्ना नदियों को जोड़ने वाली परियोजना पर काम शुरू कर दिया गया है. पांच चरणों में पूरी की जाने वाली इस परियोजना के लिए कुल 83,796 रूपये का बजट आवंटित किया गया है. इसके पहले चरण पर 6,020. 15 करोड़ रूपये की लागत आने का अनुमान है. गौरतलब है कि पेन्ना नदी अनंतपुर, कडपा, कुरनूल, चित्तूर और नेल्लौर जिलों से होकर बहती है. लेकिन इन जिलों की कुल जरुरत के मुताबिक इन नदियों में पानी की उपलब्धता नहीं रहती है.

पोलावरम प्रोजेक्ट

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोदावरी नदी पर जारी विशाल परियोजना 'पोलावरम' का लगभग 65 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है. मई, 2019 तक इसमें पानी छोड़ने के लिए अथक प्रयास किये जा रहे हैं. अगले साल के आखिर तक इस परियोजना के पूरा होने की उम्मीद है. इस दौरान मुख्यमंत्री ने एनडीए सरकार पर हमला करते हुए कहा कि केंद्र ने उनकी कोई मदद नहीं की है.

योजना के पहले चरण में पट्टीसीमा बांध से 8,500 जबकि चिंतालपुड़ी बांध से 6,870 क्यूसेक पानी विजयवाड़ा स्थित प्रकाशम बैराज में छोड़ा जाएगा. प्रकाशम बैराज से 7,000 क्यूसेक पानी नागार्जुन सागर मुख्य नहर में ले जाया जाएगा. इसके लिए पांच चरणों में 10.25 किमी पाइपलाइन और 56.35 किमी लंबी एक नहर का निर्माण किया जाएगा. इस कैनाल पर पांच अतिरिक्त बांध भी बनाए जाएंगे.

परियोजना के तहत नकिरेकल्लू जिले तक गोदावरी से जलापूर्ति की जाएगी. इसको सागर मुख्य नहर से जोड़ा जाएगा ताकि गुंटूर और प्रकाशम जिलों की 9,61,000 एकड़ भूमि के लिए सिंचाई की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके.

 

रोहिताश चौधरी, कृषि जागरण 

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