कौशल प्रशिक्षण से बेरोजगारों को मिलेगा स्वरोजगार

बिहार के प्रसार शिक्षा निदेशालय, कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर के में गार्डेनर (माली प्रशिक्षण) विषय पर कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार के कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने दीप प्रज्जवलित कर किया। यह कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम 340 घंटे का है, जिसे उद्यान निदेशालय, कृषि विभाग की ओर से एमआईडीएच योजना के अन्तर्गत गार्डेनर (माली प्रशिक्षण) विषय पर बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर को आवंटित किया गया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न जिलों के कुल 30 प्रशिक्षणार्थी भाग ले रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों को माली प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत अपने कौशल ज्ञान यानि हुनर द्वारा स्वरोजगार प्राप्त करने का आहवाह्न किया। उन्होंने बताया कि कौशल प्रशिक्षण प्राप्त युवा आने वाले समय में राष्ट्र एवं राज्य की प्रगति में अपना महती योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ माननीय प्रधानमंत्री का सपना किसानों की आमदनी कैसे दोगुनी होगी, उसमें काफी कारगर सिद्ध होगी। आज के समय में शहरीकरण के दौर में कुशल गार्डेनर (माली) की माँग हर जगह है। वे अपनी सेवा देकर अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ-साथ स्वयं अपने ज्ञान, जो इस कौशल प्रशिक्षण से सीखेंगे, उसके द्वारा नर्सरी स्थापित कर अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं। उन्हें रोजगार के लिए भटकना नहीं होगा, बल्कि रोजगार सृजन कर दूसरे लोगों को रोजगार के अवसर भी सृजित कर सकेंगे।

किसानों एवं कृषि से संबंधित उद्यमियों को बैंकों से जोड़ने संबंधी सरकार की नीतियों पर विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि एक लाख तक बैंक लोन बिना किसी गारन्टर का सब्सिडी के बाद मात्र तीन प्रतिशत ब्याज पर यानिकि एक साल में एक लाख पर मात्र तीन हजार ब्याज पर उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर द्वारा संचालित किये जा रहे प्रशिक्षण को देखकर काफी प्रसन्नता व्यक्त की एवं पिछले वर्ष कुल 43 कौशल विकास प्रशिक्षण सम्पादित किये गये, जिसमें कुल 1257 प्रशिक्षणार्थियों ने सफलतापूर्वक कौशल प्रशिक्षण प्राप्त किया। कृषि मंत्री द्वारा दो दिन पहले विश्व कौशल दिवस के इस अवसर पर कुलाधिपति के हाथों बिहार में चलाये जा रहे कौशल प्रशिक्षण में कृषि विभाग को प्रथम स्थान प्राप्त होने पर कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के सहयोग एवं योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है।

इस अवसर पर बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति, निदेशक प्रसार शिक्षा सहित अन्य वैज्ञानिक एवं पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

 

संदीप कुमार

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