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कुछ इस तरीके से ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल रहा सहगल फाउंडेशन

 

बदलते भारत के साथ-साथ हमारे गावों भी बदल रहे हैं. इन गावों की बदलती तस्वीर के पीछे कड़ी मेहनत और प्रयास है. ऐसे कुछ गावों की तस्वीर बदल रही है. इसमें गैर-सरकारी संगठन, (एनजीओ) का बहुत बड़ा योगदान है. ग्रामीण क्षेत्रों के लिए काम करने वाली गैर सरकारी संगठन , सहगल फाउंडेशन कुछ ऐसा सराहनीय काम कर रही है. इस गैर सरकारी संगठन ने हरियाणा के मेवात में काम करना शुरू किया. यह एक मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है. इस क्षेत्र को बहुत ही पिछड़ा माना जाता है, यह एक ऐसा इलाका है जहाँ पर महिलाओं के प्रति एक छोटी सोच होती है. यानी महिलाओं को सिर्फ घर में काम करने तक ही सिमित रखा जाता है, बिना अपने पति की इजाजत के यहाँ कि महिलाएं बोल भी नहीं सकती और महिला शिक्षा का अनुपात तो इस इलाके में बहुत कम है.

यदि कृषि की हम बात करें तो वही पुराने तरीके और पुरानी पद्तिया खेती में अपनाई जाती थी. लेकिन यहाँ पर बदलाव आना तब शुरू हुआ जब साल 2012 में सहगल फाउंडेशन ने क्षेत्र में काम करना शुरुआ किया. इसकी शुरुआत हुयी मेवात के घाघस से. यहाँ पर इस एनजीओं ने अपना मुख्यालय स्थापित कर ग्रामीण विकास कि और ध्यान दिया. इस क्षेत्र में कमाई का एकमात्र साधन सिर्फ खेती ही है तो सबसे पहले किसान परिवार पर ध्यान देना शुरू किया गया क्योंकि शिक्षा का स्तर यहाँ पर बहुत कम है इसके लिए एक सामुदायिक रेडियो स्टेशन की शुरुआत की गई. जिसके माध्यम से यहाँ के लोगो में जागरूकता फैलाना शुरू किया. इस रेडियो स्टेशन के माध्यम से सहगल फाउंडेशन ने 250 से अधिक गावों को बदलने का जिम्मा लिया. इस सामुदायिक रेडियो स्टेशन के माध्यम से किसानो को जागरूक करना शुरू किया. कई ऐसे कार्यक्रम का प्रसारण कर रहे हैं जिससे कि यहाँ के लोगो की जीवनशैली में परिवर्तन आये हैं .

 

 

कृषि जागरण इस क्षेत्र का दौरा किया और यहाँ के किसान परिवारों से बात कि और उनमें आये हुए परिवर्तन के विषय में जानने की कोशिश की. नगीना के एक गाँव के 70 वर्षीय किसान महबूब बताते हैं की उनके इलाके में प्रसारण का कोई साधन नहीं था. इसलिए उनको आधुनिक तकनीकों के विषय में भी कोई जानकरी भी उपलब्ध नही हो पाती थी और न ही उनके बच्चो की शिक्षा के लिए कोई अच्छी जानकारी शिक्षा के साधन नही थे, सबसे बढ़ी समस्या थी खेती कि जिससे हमारे घर का खर्च चलता है. वो कहते है कि हम वही पुराने तरीको से खेती करते थे जिससे कि उत्पादन कम होता था बाजार का हमें पता नही था न ही मंडी भाव का पता होता है. लेकिन अल्फाज ए मेवात रेडियो के आने से हमें बहुत फायदा मिला है. इस रेडियो स्टेशन को हम साल 2012 से सुन रहे हैं. आजादी के बाद से रेडियो सुन रहे महबूब कहते है कि उनके पास आज भी नौ साल पुराना रेडियो है. जिससे वो अल्फाज़ ऐ मेवात को सुनते हैं. किसान महबूब के साथ बैठे और साथी किसान बताते हैं कि उनके गाँव में पहले महिलाए और लड़कियां घर से बहार नही निकलते थे लेकिन अब उनके गावों की लड़कियां बाहर पढने जा रही है और महिलाये पुरुषों के साथ मिलकर काम कर रही हैं. अल्फाज-ए- मेवात से हमारे गावों में काफी परिवर्तन आए हैं. वही के रहने वाले किसान प्रेमराज बताते हैं कि पहले वो खेतों में सिंचाई पुराने तरीके से करते थे. पानी की कमी के चलते सिंचाई की बहुत परेशानी थी लेकिन इस रेडियो स्टेशन के माध्यम से उन्हें बूँद सिंचाई के विषय में जानकारी मिली जिसकी बदौलत अब उनके पूरे गाँव ड्रिप सिंचाई का इस्तेमाल हो रहा है जिसके माध्यम से किसानों को अच्छा उत्पादन भी मिल रहा है. वही प्रेमराज बताते हैं कि उनके पास 5 किल्ले भूमि है जिसमें कई फसलों की खेती करते हैं. वो कहते हैं अल्फाज ए मेवात पर कृषि सम्बन्धी कार्यक्रम सुनने के पश्चात वो लगातार उसके साथ जुड़ गए. इससे उन्होंने जैविक खेती करने के लिए भी प्रेरणा मिली. अब वो जीवामृत को अपनाकर जैविक खेती कर रहे हैं. अपने आप ही वो जीवामृत जैविक खाद बना लेते हैं. इससे उन्हें जैविक खेती में बड़ा फायदा मिला.

 

अल्फाज-ए-मेवात के स्टेशन इंचार्ज सोराब बताते हैं कि उनके स्टेशन की रेंज लगभग 20 किलोमीटर तक है जिसके माध्यम से वो 250 से अधिक गाँव को कवर करते हैं. इन गावों से उनके पास कई तरह के सवाल और कृषि सम्बन्धी परेशानियों के विषय में फ़ोन आते हैं. रेडियो स्टेशन पर कई बार किसानों की लेकर गोष्ठियां और कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं. जिसके चलते किसानों को नई तकनीकों के विषय में जानकारी दी जाती है इसी के साथ उनकी समस्याओं को भी सुना जाता है.इन किसानों की समस्याओं के सामाधान की पूरी कोशिश की जाती है. सहगल फाउंडेशन के अल्फाज-ऐ-मेवात से यहाँ के लोगो में काफी परिवर्तन देखने को मिला. कृषि जागरण ने स्वत: इस रेडियो स्टेशन पर लाइव प्रोग्राम के जरिए यहाँ के निवासियों से बात कर हुए बदलावों को जानने की कोशिश की. यह परिवर्तन यहाँ पर सही मायनो में पाए गए. यदि ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरीके से काम किया जाए तो सही मायनों में ग्रामीण भारत को सशक्त बनाया जा सकता है.अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें किसान भाइयों और भी जानकारी लिए इस वीडियो को जरूर देखें



English Summary: Sehgal Foundation changing the picture of rural India in this way

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