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पंजाब हरियाणा का जैविक खेती की ओर कदम

बढ़ती जैविक खेती की मांग से हर रोज एक नई पहल हो रही है. कोई लाखो की नौकरी छोड़कर जैविक खेती में जुटा है तो कोई विदेशो में जैविक खेती को बढ़ावा दे रहा है लेकिन पंजाब और हरियाणा के लोगो ने बीमारी से बचने के लिए जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाये है. जैविक खेती से पैदा होने वाली फसल के दाम भी अधिक मिलते हैं.

दरअसल पंजाब और हरियाणा में कैंसर से तड़प तड़प कर मरते हुए लोगों के घरवालों ने इस खतरनाक बीमारी से बचने के लिए अपने भोजन में बदलाव किया है. रसायनिक खाद और कीटनाशक से पैदा अनाज से लोगो ने मुँह मोड़ लिया है, और जैविक खेती से पैदा अन्न को अब प्रयोग में ला रहे है. कैंसर जैसी बीमारियों से बचने के लिए दोनों राज्यों के निवासियों ने राजस्थान के मारवाड से भी जैविक गेंहू मंगाना शुरू कर दिया है.

कड़ी मेहनत के बाद भी स्वस्थ नहीं है किसान

लोगों का कहना है कि पिछले कुछ साल में पंजाब एवं हरियाणा में ज्यादा फसल के लालच में आकर रसायनिक एवं कीटनाशक खाद का बेतहाशा इस्तेमाल किया,  जिसका परिणाम यह है की लोगो को कीटनाशक और रासायनिक खाद से लोगो के स्वास्थ पर बहुत असर पड़ा है. आखिर यहां के विशेषज्ञों के ध्यान में यह बात आई कि अब जैविक खेती से उत्पन्न अनाज से ही लोगों की जान बचेगी और दोनों राज्यों के किसान इसकी पैदावार में जुट गए.

ज्यादा मुनाफा कमा रहे किसान

हरियाणा के करनाल जिले के किसान जैविक अनाज की मांग को देखते हुए पिछले तीन-चार साल से अपने 11 एकड के फार्म में आर्गेनिक खेती कर रहे है. वे गेंहू और चावल के अलावा मसाले और सब्जियां भी पैदा करते है. किसानो के अनुसार रासायनिक खाद आधारित अनाज के मुकाबले आर्गेनिक अनाज डेढ़ से दोगुनी कीमत पर बिकता है. अभी रासायनिक खाद व कीटनाशकों के इस्तेमाल से पैदा हुए गेंहू की बाजार दर 1700 रूपए प्रति क्विंटल से कुछ अधिक है तो जैविक खेती से पैदा गेंहूं इसके दोगुने भाव में बेचा गया है.

 

वर्षा
कृषि जागरण



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