स्वामी रामदेव ने 92 ब्रहम्चारियों को दी दीक्षा

पतंजलि जिस तरीके से देश की एक अध्यात्मिक और आर्थिक ताकत बनकर पिछले कुछ समय से सामने आई है इससे कोई अछूता नहीं है. योगगुरु स्वामी रामदेव ने पतंजलि के माध्यम से बड़ी-बड़ी विदेशी कंपनियों को टक्कर दी है. जिससे भारतीय बाजार में एक बड़ा बदलवा आया है. अध्यात्म के मामले में भी स्वामी रामदेव ने देश को विश्वस्तर पर पहचान दिलाई है. पूरा विश्व योग दिवस मनाता है. अध्यात्म के क्षेत्र में देश को विश्व में एक मजबूत ताकत बनाने के लिए स्वामी रामदेव पूरी तरह से जुटे हुए हैं. भारत को 2050 तक अध्यात्म के क्षेत्र में महाशक्ति बनाने के लिए स्वामी रामदेव ने संकल्प लिया है कि वो अपने 1000 उत्तराधिकारी तैयार करेंगे. स्वामी रामदेव के ये उत्तराधिकारी विश्व में देश को अध्यात्म में महाशक्ति बनाने के लिए काम करेंगे. इसकी पहली कड़ी को आगे बढ़ाते हुए धर्मनगरी हरिद्वार में दीक्षा समारोह का आयोजन किया गया.

 

रामनवमी के मौके पर आयोजित किए गए इस कार्यक्रम में 92 विद्वानों और विदुषियों के द्वारा संन्यास की दीक्षा ग्रहण की गई. कार्यक्रम की शुरुआत पतंजलि के ऋषिग्राम से हुई. प्रात: काल कार्यक्रम की शुरुआत हुई. सभी 88 दिक्षुक ऋषि ग्राम से वीआईपी घाट हरिद्वार के लिए रवाना हुए. स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण पहले ही कार्यक्रम स्थल पर पहुँच चुके थे. सभी दिक्षुक स्वामी रामदेव से आशीर्वाद लेकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे. पहले पुरुष दिक्षुको और फिर महिला दिक्षुकों को आशीर्वाद दिया. कार्यक्रम के दौरान जाने-माने विद्वानों और संतों ने भाग लिया. हरिद्वार में हर की पैडी पर सभी दिक्षुकों ने अपनी सिखा और सूत्र विसर्जित कर गेरुआ वस्त्र ग्रहण किए. इस कड़ी में 41 महिलाए और 51 पुरुषों को सन्यासी की दीक्षा दी गई.

कार्यक्रम में सभी दिक्षुओं के लिए शिभा यात्रा निकाली गई. इन सभी सन्यासियों के परिवार वालों इन सन्यासियों को देश सेवा के लिए समर्पित कर दिया. इस मौके पर स्वामी रामदेव ने कहा कि ये सभी सन्यासी अपने परिवार और मोह माया को त्याग कर पूरी तरह से देश सेवा के लिए समर्पित है. ये सब देश की सेवा करेंगे. कार्यक्रम में आचार्य बालकृष्ण भी मौजूद रहे. सिखा एवं सूत्र विसर्जन की प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात यज्ञ का आयोजन किया गया. जिन दिक्षुको ने सन्यास लिया अधिकतर ने उच्चस्तरीय शिक्षा ग्रहण की है. योगगुरु ने सभी सन्यासी शिष्यों को नया नाम दिया. हरिद्वार में हरी की पैडी पर यह प्रक्रिया पूर्ण की गईं. लगभग 5 घंटे तक यह कार्यक्रम चला. यह सभी सन्यासी देश सेवा करेंगे.  

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