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दूध उत्पादक संगठनों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी: 1.22 लाख ‘लखपति दीदियां’ बनीं सशक्तिकरण की मिसाल

एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज (एनडीएस) के प्रयासों से डेयरी क्षेत्र में महिलाओं का नेतृत्व बढ़ा है. 1.22 लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदियां’ बनकर आत्मनिर्भर हुईं. जानिए कैसे महिला सशक्तिकरण डेयरी उद्योग में क्रांति ला रहा है.

KJ Staff
Rural Women Empowerment
एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज: महिला सशक्तिकरण से बदलता भारतीय डेयरी उद्योग (Image Source: shutterstock)

एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज (एनडीएस), राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की पूर्ण स्वामित्व वाली धारा 8 गैर-लाभकारी सहायक कंपनी है, जो डेयरी क्षेत्र में महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देती है. उल्लेखनीय है कि महिलाओं ने ऐतिहासिक रूप से डेयरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसमें मवेशियों का प्रबंधन, दूध निकालना और दूध की गुणवत्ता चेक करना शामिल हैं. एनडीएस ने सदस्य महिलाओं को वाणिज्यिक डेयरी उद्यमों के शीर्ष पर रखने, उन्हें निर्णय लेने वालों और व्यावसायिक नेताओं में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

2009 में स्थापना के बाद से एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज ने डेयरी क्षेत्र में महिलाओं के सशक्तिकरण को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया है. एनडीएस द्वारा संचालित 22 परिचालन दूध उत्पादक संगठनों (एमपीओ) में से 17 विशेष रूप से महिलाओं के स्वामित्व में हैं और महिलाओं के नेतृत्व वाले बोर्ड ही उनकी रणनीतिक दिशा तय करते हैं. उल्लेखनीय रूप से 22 एमपीओ में से 18 की अध्यक्षता महिलाओं द्वारा की जाती है.

1.22 लाख ‘लखपति दीदियां’ बनी आत्मनिर्भर

इस सराहनीय परिवर्तन पर बोलते हुए, एनडीडीबी और एनडीएस के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने कहा, "एनडीएस द्वारा सुविधा प्रदान किए गए एमपीओ इस बात का उदाहरण हैं कि कैसे महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यम डेयरी क्षेत्र में सफलता को फिर से परिभाषित कर सकते हैं. एनडीएस की उपलब्धियां सामूहिक प्रयासों की शक्ति को रेखांकित करती हैं और जमीनी स्तर पर आर्थिक विकास में महिला डेयरी किसानों की परिवर्तनकारी भूमिका को उजागर करती हैं. इनमें से कई महिला नेताओं ने वैश्विक मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है, जिसमें यूएसए और फ्रांस में अंतर्राष्ट्रीय डेयरी फेडरेशन के विश्व डेयरी शिखर सम्मेलन भी शामिल हैं. इसका प्रभाव बहुत गहरा है - इन संगठनों के माध्यम से 1,22,000 से अधिक ग्रामीण महिलाएं 'लखपति दीदियां' बन आत्मनिर्भर हुई हैं "

डॉ. शाह ने महिलाओं की भूमिका के विस्तार के महत्व पर जोर दिया और कार्यकारी नेतृत्व में उनकी अधिक भागीदारी का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि “अब समय आ गया है कि महिलाएं डेयरी क्षेत्र के दिन-प्रतिदिन के कामकाज की जिम्मेदारी भी संभालें. एक अग्रणी पहल के रूप में श्रीमती रचना देवधर गोयल ने राजस्थान के अलवर की सखी महिला दुग्ध उत्पादक संस्थआ (एमपीओ) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पदभार संभाला है.”

इस भावना को बल देते हुए, सखी एमपीओ की अध्यक्ष पिंकी शर्मा ने कहा, "सखी महिला सशक्तिकरण की नींव पर बनी है, और हमें यह देखकर बहुत गर्व होता है कि हजारों महिलाएं डेयरी के माध्यम से वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त कर रही हैं. महिलाओं के और अधिक नेतृत्व के साथ, हम अपने सदस्यों के लिए स्थायी आजीविका और आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करने के अपने मिशन को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं."

टाटा ट्रस्ट के वित्तीय सहयोग और एनडीएस के तकनीकी सहयोग से 19 मार्च 2016 को स्थापित सखी महिला दुग्ध उत्पादक संस्था डेयरी क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही है. आज यह संस्था राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के 13 जिलों में काम करती है और हजारों महिला डेयरी किसानों को स्थायी आजीविका प्रदान करती है. 3,000 गांवों की 90,000 से अधिक महिला किसान सदस्यों के साथ, 5.5 लाख लीटर दूध प्रतिदिन एकत्र किया जाता है. उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2024-25 का सखी संस्था का अनुमानित टर्नओवर 700 करोड़ रुपये है, जो ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक विकास में सखी के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करता है. एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज के माध्यम से लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि भारतीय महिलाएं देश के डेयरी क्षेत्र का केंद्र बनकर उभरें और समावेशी विकास को बढ़ावा दें.

English Summary: NDDB Dairy Services Women Empowerment Transforming Indian Dairy Industry Published on: 02 April 2025, 03:40 PM IST

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