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केवीके वैशाली में ‘एमएफओआई – समृद्ध किसान उत्सव’ का आयोजन, 350 से अधिक किसानों ने लिया भाग
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NCCF ने किसानों को उड़द के उन्नत बीज वितरित कर MSP खरीद और भंडारण योजना की दी जानकारी
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वैज्ञानिकों ने दलहनी फसलों की खेती, मृदा स्वास्थ्य और आधुनिक कृषि तकनीकों पर किसानों को किया जागरूक
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प्रगतिशील किसानों को किया गया सम्मानित, कंपनियों ने उन्नत बीज और नई तकनीकों की दी जानकारी
वैशाली (बिहार), बुधवार. किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि जागरण और कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) वैशाली के संयुक्त तत्वावधान में 11 मार्च 2026 को केवीके वैशाली, सतीहारा चौक, हरिहरपुर, पी.ओ.-राजौली, थाना-हाजीपुर, जिला वैशाली (बिहार) में “एमएफओआई – समृद्ध किसान उत्सव” का सफल आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में वैशाली जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से आए 350 से अधिक किसानों ने भाग लेकर दलहनी फसलों की उन्नत खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की.
कार्यक्रम में ICAR ने Knowledge Partner के रूप में सहयोग दिया, जबकि National Cooperative Consumers’ Federation of India (NCCF) और Zydex Industries Powered By Partner के रूप में जुड़े. वहीं Somani Seedz ने Supporting Partner के रूप में.
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई. आयोजन का संचालन केवीके हरिहरपुर, वैशाली के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनिल कुमार सिंह के मार्गदर्शन में किया गया. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती, उन्नत बीजों और नई कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करना था, ताकि किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें.
इस आयोजन में NCCF (National Cooperative Consumers’ Federation of India) ने विशेष भूमिका निभाई. कार्यक्रम के दौरान NCCF की ओर से किसानों को उड़द के उन्नत बीज निःशुल्क वितरित किए गए, जिससे आगामी सीजन में दलहनी फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहन मिला. NCCF के प्रतिनिधियों ने किसानों को यह भी जानकारी दी कि संस्था किस प्रकार किसानों की उपज की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित करने के लिए कार्य कर रही है.
NCCF के प्रतिनिधियों ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि संस्था देशभर में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन के लिए लगातार प्रयास कर रही है. उन्होंने बताया कि दलहनी फसलों के उत्पादन को बढ़ाने और किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए NCCF समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम और बीज वितरण जैसी पहल भी करता है.
इस दौरान उन्होंने भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल के बारे में भी किसानों को जानकारी दी. उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने खाद्यान्न भंडारण क्षमता बढ़ाने और किसानों को बेहतर सुविधा देने के लिए विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना शुरू की है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य गांव स्तर पर भंडारण अवसंरचना (Storage Infrastructure) विकसित करना है, जिससे किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने, बेहतर मूल्य प्राप्त करने और परिवहन लागत कम करने में सहायता मिल सके.
उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत PACS (Primary Agricultural Credit Societies) स्तर पर आधुनिक गोदाम और भंडारण केंद्र बनाए जा रहे हैं. इस योजना के तहत NCCF (National Cooperative Consumers’ Federation of India Ltd.) को निर्माण एजेंसी (Construction Agency) के रूप में नामित किया गया है.
उन्होंने कहा कि इस परियोजना में NCCF की कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं, जिनमें PACS के लिए वेयरहाउस निर्माण कार्य का प्रबंधन, परियोजना की तकनीकी निगरानी (Technical Supervision), निर्माण कार्य को निर्धारित समय और गुणवत्ता मानकों के अनुसार पूरा करना, संबंधित विभागों और संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करना तथा परियोजना की प्रगति रिपोर्ट और निरीक्षण कार्य करना शामिल है. उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर भंडारण सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा, जिससे किसानों को काफी लाभ मिलेगा.
उन्होंने किसानों को यह भी बताया कि NCCF द्वारा “Janah” ब्रांड के उपभोक्ता उत्पाद भी लॉन्च किए गए हैं. इस पहल का उद्देश्य उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर उच्च गुणवत्ता वाली आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराना और सहकारी समितियों को बढ़ावा देना है. उन्होंने कहा कि इस ब्रांड के माध्यम से उपभोक्ताओं तक गुणवत्तापूर्ण खाद्य और दैनिक उपयोग की वस्तुएं पहुंचाई जा रही हैं.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केवीके वैशाली के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि दलहनी फसलों की खेती किसानों और मिट्टी दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी है. उन्होंने बताया कि दलहनी फसलों में रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है, जिससे खेती की लागत कम होती है और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है.
उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जानकारी देते हुए बताया कि वातावरण में लगभग 78 प्रतिशत नाइट्रोजन मौजूद होती है, लेकिन सामान्य फसलें इसे सीधे ग्रहण नहीं कर पातीं. दलहनी फसलों की जड़ों में मौजूद राइजोबियम जीवाणु इस नाइट्रोजन को स्थिर कर मिट्टी और पौधों के लिए उपयोगी बना देते हैं. इसी कारण पारंपरिक खेती में किसान नियमित रूप से दलहनी फसलों की खेती करते थे, जिससे मिट्टी की उर्वरता स्वाभाविक रूप से बनी रहती थी.
डॉ. सिंह ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से बचने की सलाह देते हुए कहा कि गोबर खाद, कम्पोस्ट और वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग बढ़ाना चाहिए. इससे न केवल मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है बल्कि लंबे समय तक खेतों की उत्पादकता भी बनी रहती है.
कार्यक्रम के दौरान कृषि अभियांत्रिकी विशेषज्ञ कुमारी नम्रता ने किसानों को दलहनी फसलों की खेती में आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग की जानकारी दी. उन्होंने विशेष रूप से सीड-कम-फर्टिलाइजर ड्रिल मशीन के उपयोग के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि इस मशीन की मदद से बीज और उर्वरक दोनों को एक साथ उचित दूरी और गहराई पर बोया जा सकता है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है और फसल की वृद्धि बेहतर होती है.
उन्होंने किसानों को शून्य जुताई (Zero Tillage) तकनीक से मूंग की खेती करने के तरीके भी बताए. उन्होंने बताया कि इस तकनीक से मिट्टी की नमी संरक्षित रहती है, जिससे कम सिंचाई में भी अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है. इसके अलावा इस पद्धति से खेती की लागत भी कम होती है और मिट्टी की संरचना सुरक्षित रहती है.
इस अवसर पर उद्यानिकी विशेषज्ञ डॉ. जोना दाखो ने किसानों को दलहनी फसलों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इन फसलों की जड़ों में उपस्थित विशेष प्रकार के बैक्टीरिया वायुमंडल की नाइट्रोजन को फिक्स कर मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं, जिससे अगली फसलों को भी लाभ मिलता है.
कार्यक्रम के दौरान वैशाली जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए 15 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया गया. इन किसानों को उनके उत्कृष्ट कृषि कार्यों और नवाचारों के लिए सम्मानित किया गया, ताकि अन्य किसान भी उनसे प्रेरणा लेकर नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित हों.
इस आयोजन में Zydex Industries और Somani Seedz ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. Zydex Industries के प्रतिनिधि देवेंद्र सिंह ने किसानों को कंपनी की नवीन कृषि तकनीकों और जैव-आधारित समाधानों के बारे में जानकारी दी. वहीं Somani Seedz के प्रतिनिधि नागमणि ने किसानों को सब्जी और अन्य फसलों की उन्नत किस्मों के बारे में बताया और बेहतर उत्पादन के लिए गुणवत्तापूर्ण बीजों के महत्व पर प्रकाश डाला.
कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी खेती से जुड़ी समस्याओं को साझा किया और उनके समाधान प्राप्त किए. किसानों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से उन्हें नई तकनीकों और वैज्ञानिक खेती के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है.
इस कार्यक्रम में NCCF से राजेश कुमार, निखिल कुमार सिंह और दिनेश कुमार सिंह, Zydex Industries से देवेंद्र सिंह, Somani Seedz से नागमणि, आत्मा (ATMA) के उप परियोजना निदेशक सियाराम साहू, सहायक निदेशक पादप उत्पादन अभिजीत कुमार, कृषि अभियांत्रिकी विशेषज्ञ कुमारी नम्रता, गृह विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. कविता वर्मा, उद्यानिकी विशेषज्ञ डॉ. जोना दाखो, तथा कृषि जागरण से सुजीत पाल और मणिशंकर कुमार सहित कई गणमान्य अतिथि कार्यक्रम में उपस्थित रहे.
कार्यक्रम के सफल आयोजन में केवीके वैशाली के कर्मचारियों रवि कुमार, रिचा श्रीवास्तव, रवि रंजन, सोनू कुमार, मोहित कुमार और दीपक का महत्वपूर्ण योगदान रहा.
अंत में वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की कि वे दलहनी फसलों की खेती को अधिक से अधिक अपनाएं और लाइन में बुआई तथा वैज्ञानिक खेती की तकनीकों का उपयोग करें. इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहेगी.
कुल मिलाकर “एमएफओआई - समृद्ध किसान उत्सव” किसानों के लिए एक उपयोगी और ज्ञानवर्धक मंच साबित हुआ, जहां उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों और सरकारी योजनाओं की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई.
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