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एनबीएफजीआर : सदैव किसानों को समर्पित

आनुवंशिक संसाधनों को परिरक्षित करने के लिए वैज्ञानिक आधार आवश्यक है जिसका इस्तेमाल मानव की पोषाहार और पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए किया जा सकता है | इस आवश्यकता को महसूस करते हुए भारत सरकार ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के तत्वावधान के तहत देश के मत्स्य जननद्रय्व संसाधनों के संरक्षण और स्थायी प्रबंधन के लिए छठी पंचवर्षीय योजना के अंत में राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरों की स्थापना का अनुमोदन किया |

राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरों (एनबीएफजीआर)

आनुवंशिक संसाधनों को परिरक्षित करने के लिए वैज्ञानिक आधार आवश्यक है जिसका इस्तेमाल मानव की पोषाहार और पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए किया जा सकता है | इस आवश्यकता को महसूस करते हुए भारत सरकार ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के तत्वावधान के तहत देश के मत्स्य जननद्रय्व संसाधनों के संरक्षण और स्थायी प्रबंधन के लिए छठी पंचवर्षीय योजना के अंत में राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरों की स्थापना का अनुमोदन किया |

वर्ष 1983 में इलाहाबाद में अपनी स्थापना के पश्चात राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरों मत्स्य विविधता के संरक्षण से सम्बंधित विभिन्न मुद्दों पर अनुसन्धान करने हेतु एक अग्रणीय संस्थान के रूप में उभर कर आया है | ब्यूरों ने वर्ष 1999 में शानदार रूप से निर्मित किए गए प्रशासनिक और प्रयोगशाला भवनों में स्थानांतरण कर अपना कार्य संचालन जारी रखा |

संस्थान ने न केवल बुनियादी ढांचे के सृजन के आधार पर, अपितु मत्स्य विविधता के निर्धारण के लिए नए भौगोलिक क्षेत्रों के अन्वेषण तथा अनान्वेषित जनजीव संसाधनों, पूर्ण जिनोम अनुक्रमण, समष्टि आनुवंशिकी, कार्यात्मक जिनोमिक, आण्विक रोग नैदानिक, राष्ट्रीय जलजीव रोग निगरानी कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल कर अनुसन्धान कार्यक्रमों के विस्तार में भी उत्कृष्ट कार्य किया है |

एनबीएफजीआर के निदेशक डॉ. कुलदीप के लाल ने बताया कि संस्थान की तरफ से किसानों को प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे कि वो मछली पालन करके अपनी आय की बढ़ोत्तरी कर सकें | समय समय पर नाबार्ड, सिंचाई विभाग आदि किसानों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम करतें है जो कि एनबीएफजीआर में ही होती है |

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने जो किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है, मछली पालन के जरिए यह संभव हो सकता है |  आजकल किसान जिस तरह से परम्परागत खेती कर रहा है उसके बावजूद उसका उत्पादन उसके मुताबिक नहीं हो पा रहा है | जिसके फलस्वरूप किसान आर्थिक रूप से कमजोर हो जाता है | 

एनबीएफजीआर के द्वारा किसानों को हम इतना आत्मनिर्भर कर देतें है जिससे की वह मछली पालन के व्यवसाय में अपनी स्थित बहुत ज्यादा सुधार सकता है | हमारे पास भारत के कई राज्यों से किसान आतें है और मछली पालन का प्रशिक्षण लेते है |                                                                                        

                      

एनबीएफजीआर के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. शरद कुमार सिंह ने बताया कि हमारे प्रशिक्षण केंद्र पर किसानों को मछली पालन से जुड़ी सारी जानकारी दी जाती है |

किसान किस तरह मछली पालन से उचित आय प्राप्त कर सकतें है इन सब की जानकारी वो एनबीएफजीआर से प्राप्त करते हैं | एनबीएफजीआर से प्रशिक्षण प्राप्त किसान इतना आत्मनिर्भर हो जाता है कि वह खुद ही मछली पालन से एक सफल व्यवसाय कर सकता है |

हमारे यहाँ हर महीने किसानों का प्रशिक्षण चलता रहता है, जिसमें पूरे देश से ज्यादातर किसान आकर मछली पालन का प्रशिक्षण लेतें हैं | और वापस जाकर करते भी है | उसके आलावा कही भी कोई समस्या अगर आती है तो किसान हमसे कभी भी संपर्क कर सकतें है | 

एनबीएफजीआर के ट्रेनिंग सेंटर पर आए कुछ किसानों से बात करने पर उन्होंने बताया कि “परम्परागत खेती से उतना ज्यादा लाभ नहीं हो पाता है इसलिए हम लोग मछली पालन का प्रशिक्षण लेने यहाँ आएं है | और यहां से हमने मछली पालन करने के सभी गुर सीखें है |” 

English Summary: NBFGR: Always dedicated to farmers Published on: 26 August 2017, 02:24 AM IST

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