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कार या टैक्सी की तर्ज पर कृषि कार्य के लिए किसान बुक करें सकेंगे ट्रैक्टर

देश के छोटे व सीमांत किसानों के लिए महंगे कृषि उपकरणों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Modi Government) किसानों के लिए नई स्कीम लाई है. इस स्कीम के अंतर्गत किसानों को खेती करने के लिए महंगे उपकरण  किराए पर मिलेंगे. इसके लिए सरकार खुद एग्रीगेटर बन गई है. गौरतलब है कि कृषि मंत्रालय ने कस्टम हायरिंग सेंटर्स के लिए सीएचसी फार्म मशीनरी ( CHC Farm Machinery )  ऐप लॉन्च की है. अब इसके अंतर्गत किसान अपने खेत के 50 किलोमीटर दायरे में उपलब्ध खेती के उपकरण को किराये पर ले सकेंगे. यह ऐप 12 भाषाओं में उपलब्ध है. इस ऐप को लेकर सरकार यह उम्मीद कर रही है कि इससे किसानों को महंगे उपकरण नहीं खरीदने होंगे. उनकी लागत कम होगी और उनकी आय में बढ़ोतरी होगी.

ओला उबर की तरह अब खेती के काम के लिए बुक करें सकेंगे कृषि उपकरण

 इस ऐप पर किसानों को कस्टम हायरिंग सेंटर्स (CHCs)  के जरिए खेती से जुड़ी मशीन दी जाएगी. इसके लिए 40,000 हजार कस्टम हायरिंग सेंटर्स देशभर में बनाए जा चुके हैं, जिनकी क्षमता 2.5 लाख खेती वाले उपकरण वार्षिक किराये पर देने की है. उनका नाम कृषि मंत्रालय ने सीएचसी फार्म मशीनरीमें रखा है. गूगल प्ले स्टोर पर यह ऐप हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू समेत 12 भाषाओं में उपलब्ध है. इस ऐप को डाउनलोड करने के बाद आपको भाषा चुननी होगी. फिर अगले स्टेप में आपको CHC/ सर्विस प्रोवाइडर और किसान/उपयोगकर्ता दिखेंगे.

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किसान आवेदन कैसे करें

अगर किसी किसान को कृषि यंत्रों पर छूट के लिए आवेदन करना है, तो वह सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) पर जाकर आवेदन कर सकता है. यहां किसान अपनी पसंद का यंत्र सीएससी संचालक को बता सकता है, जिसके बाद सीएससी सेंटर संचालक एक आवेदन नंबर किसान को देगा. इसके साथ ही किसान साइबर कैफे आदि से भी आवेदन कर सकते हैं, जिसके लिए किसान को एग्री मशीनरी.इन (https://www.agrimachinery.nic.in) पोर्टल पर आवेदन करना होगा. इस एप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है. डाउनलोड के बाद आपको भाषा चुननी होगी फिर अगले स्टेप में सेवा प्रदाता और किसान या उपयोगकर्ता का विवरण दिख जाएगा. बता दे कि इसे लेकर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने यह उम्मीद जताई है कि इससे आम किसानों, कम जोत वाले सीमांत किसानों को अधिक लाभ होगा, क्योंकि वे ज्यादा महंगे उपकरण खरीद नहीं सकते. इन उपकरणों के उपयोग से किसानों की लागत कम होगी, उपज बढ़ेगी और उनकी आमदनी में भी इजाफा होगा.



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