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मध्यप्रदेश में कृषि विश्वविद्यालय अब देंगे जीरो बजट खेती पर जोर

देश के कृषि क्षेत्र में सुधारों को लेकर अब मध्य प्रदेश के कृषि एवं पशुपालन विश्वविद्यालय एक साथ मिलकर काम करेंगे. दरअसल बढ़ती आबादी के लिए अन्न की जरूरत को देखते हुए खेती को तेजी से बढ़ावा देने के लिए राज्य की सरकार ने काफी गंभीरता दिखाई है. प्रदेश के कृषि एवं पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों के माध्यम से अब जीरो बजट फार्मिग पर काम किया जाएगा. इस दिशा में प्रदेश के विश्वविद्यालयों की पहली बार एक बैठक की है. अभी तक केवल यह होता था कि सभी बैठकों में प्रोफेशनल और ट्रेडिशनल यूनिवर्सिटीज शामिल होती थी. इस बार पहली बार सिर्फ कृषि विश्वविद्यालय जैसी- जबलपुर, ग्वालियर एवं पशु चिकित्सा विज्ञान विश्विद्यालय जबलपुर को शामिल किया गया है. साथ ही पर्यावरण को काफी बेहतर बनाने की दिशा में भी पहल शुरू की है.

खेती की लागत कम करने पर विचार

खेती की लागत को कम करने के लिए दोनों ही विश्वविद्यालय मिलकर काम करेंगे. कृषि विवि उन्नत एवं ताकतवर किस्मों को तैयार करने पर फोकस करेगा. वही पर वेटनरी विवि गौ आधारित कृषि तकनीक पर काम करेगा. विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ अनुसंधान के माध्यम से जैविक खेती पर विशेष रूप से जोर दिया जा रहा है. यह तय किया गया है कि जैविक खेती को कुल 25 फीसदी पर लाया जाए. प्रदेश में फिलहाल जैविक खेती का प्रतिशत 10 से 12 प्रतिशत ही है.

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सोलर एनर्जी की दिशा में काम

यहां पर सोलर एनर्जी की दिशा में भरपूर प्रयास किए जाएंगे ताकि किसान सोलर पैनल को लगाकर खुद बिजली उत्पादन करके उसको अपने खेत में पंप के लिए उपयोग कर सकेगा. इससे खेती के बजट में कमी आएगी.

दिए गए कई सुझाव

प्रदेश में जीरो बजट फार्मिग को बढ़ावा देने के लिए बैठक में कई तरह के सुझाव पेश किए गए. जिसमें गौ आधारित कृषि व्यवस्था को लागू करने की मांग समेत फार्म में सीधे ट्रेनिंग देने की व्यवस्था के अलावा देसी गायों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा. साथ ही नेचुरल खेती पर जोर और सोलर एनर्जी से किसानों को जोड़ने पर बल दिया जाएगा. इस बैठक में पशुओं को बीमारी से बचाने, नस्लों के सुधार सहित गौ आधारित उत्पाद को तैयार करने में विवि प्रशासन प्रयास करेगा. इस काम के लिए सभी विश्वविद्यालय एक साथ प्लेटफॉर्म पर आकर कार्य करेंगे.



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