मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों के हित में एक बड़ा और अहम फैसला लेते हुए चना एवं मसूर के उपार्जन के लिए ₹3,174 करोड़ की राशि को मंजूरी दे दी है. 7 अप्रैल 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और फसलों की खरीदी को व्यवस्थित बनाना है. इस फैसले से प्रदेश के लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है.
कितने वर्षों तक उपार्जन की गारंटी
सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले के तहत आगामी तीन वर्षों तक चना और मसूर की फसलों का उपार्जन सुनिश्चित किया जाएगा. इससे किसानों को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से राहत मिलेगी और वे बिना किसी चिंता के इन फसलों की खेती कर सकेंगे. यह कदम दलहन उत्पादन को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ देश में खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
कार्यशील पूंजी के लिए 15% ऋण व्यवस्था
उपार्जन प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सरकार ने 15% ऋण व्यवस्था का प्रावधान भी किया है. इस व्यवस्था के तहत संबंधित एजेंसियों को कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे खरीद प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए. इससे समय पर किसानों से उपज खरीदी जा सकेगी और भुगतान प्रक्रिया भी तेज होगी.
सहकारी विपणन संघ करेगा उपार्जन
चना और मसूर के उपार्जन का जिम्मा सहकारी विपणन संघ को सौंपा गया है. इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को सीधे लाभ मिलेगा. सहकारी संस्थाओं के माध्यम से खरीद होने से बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सकेगा.
चना और मसूर पर कितना उपार्जन मिलेगा?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि चना उत्पादन का 25% और मसूर उत्पादन का 100% उपार्जन किया जाएगा. मसूर के मामले में पूर्ण उपार्जन का फैसला खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे इस फसल के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को बेहतर आय सुनिश्चित होगी. वहीं चना के 25% उपार्जन से भी बाजार में संतुलन बना रहेगा.
किसानों के लिए क्या होगा फायदा?
मध्य प्रदेश सरकार के इस फैसले से किसानों को कई तरह के लाभ मिलने की पूरी संभावना है-
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किसानों से उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित खरीदी
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किसानों की फसलों का समय पर भुगतान किया जाएगा
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दलहन की खेती के लिए प्रोत्साहन और अक्सर बाजार में कीमतें गिरने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन सरकारी उपार्जन से उन्हें स्थिर आय का भरोसा मिलेगा. इससे खेती को लाभकारी बनाने में भी मदद मिलेगी.
लेखक: रवीना सिंह
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