MFOI 2024 Road Show
  1. Home
  2. ख़बरें

मजदूरों का मर्ज़ और कर्ज़

भारत में मजदूरों का मुद्दा हमेशा से ही संवेदनशील और ज्वलंत रहा है. आजादी के बाद से मौजूदा वक्त तक, यह मसला बेहद प्रचलित और गंभीर बना हुआ है. मजदूरों की दशा पर हमेशा से ही बात होती रही है. साथ ही मजदूरों की बनती-बिगड़ती दशा, राजनीतिक पार्टियों के लिए चर्चा का मुद्दा रहता है.

विवेक कुमार राय

भारत में मजदूरों का मुद्दा हमेशा से ही संवेदनशील और ज्वलंत रहा है. आजादी के बाद से मौजूदा वक्त तक, यह मसला बेहद प्रचलित और गंभीर बना हुआ है. मजदूरों की दशा पर हमेशा से ही बात होती रही है. साथ ही मजदूरों की बनती-बिगड़ती दशा पर राजनीतिक पार्टियों का चर्चा का मुद्दा रहा हैं. हालांकि, इनके सुधार को लेकर किसी राजनीतिक दल ने संजीदगी नहीं दिखाई. आज खेती घाटे का सौदा बनकर रह गई है. जिसके चलते इस क्षेत्र में कई नई समस्याएं उभरकर सामने आ रही हैं और मजदूर सड़कों पर उतर रहे हैं. इसी कड़ी में मजदूरों ने राजधानी दिल्ली में देशव्यापी हड़ताल का आयोजन किया. इस दौरान उन्होंने मंडी हाउस से संसद मार्ग तक विशाल प्रदर्शन किया और सरकार विरोधी नारे लगाए.

इस दौरान उन्होंने कहा कि, सरकार किसानों का अनादर कर सरकार नहीं चला सकती. सरकार को आगामी चुनाव में किसान विरोधी नीतियों का खामियाजा भुगतना पड़ेगा. इस दौरान मजदूरों ने ठेका कर्मियों को पक्का करने, पुरानी पेंशन स्कीम और ठेका प्रथा बंद करने जैसे प्रमुख मांगो को लेकर लंबा मार्च भी किया. प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में मजदूर संगठन और किसान संगठनों के अलावा अन्य संगठन भी दिखे. हड़ताल में लगभग 10 हजार से अधिक मजदूर शामिल हुए. इस देशव्यापी हड़ताल में लगभग 10 संगठनों ने हिस्सा लिया जिसमें आईएनटीयूसी, एआईटीयूसी, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीसी, टीयूसीसी, एआईसीसीटीयू, सेवा, यूटीयूसी.शामिल थे.

गौरतलब है कि जब चुनाव आता है तब राजनीतिक पार्टियां अपने घोषणा पत्र में कृषि ऋण माफ़ी का जिक्र कर देती हैं. चुनाव में प्रायः यह देखा भी गया है कि ऋण माफी के मुद्दे के सहारे राजनीतिक पार्टियां सत्ता हासिल करने में सफल भी हो जाती हैं. लेकिन नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो और राज्यों के आंकड़ों को देखें तो यह पता चलता है कि, 10 साल में देश के करीब 1 लाख से ज्यादा किसानों और मजदूरों ने आत्महत्याएं की हैं. जिनमें ज्यादातर आत्महत्याएं कर्ज के बोझ की वजह से हुई हैं. 

English Summary: labourer problem and loan Published on: 12 January 2019, 05:34 PM IST

Like this article?

Hey! I am विवेक कुमार राय. Did you liked this article and have suggestions to improve this article? Mail me your suggestions and feedback.

Share your comments

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें. कृषि से संबंधित देशभर की सभी लेटेस्ट ख़बरें मेल पर पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें.

Subscribe Newsletters

Latest feeds

More News